गोडसे को देशभक्त कहने वाली साध्वी प्रज्ञा की पांच विवादित बातें

भोपाल से बीजेपी प्रत्याशी और साध्वी प्रज्ञा ठाकुर जिस तरह के विवादित बयान देती जा रही हैं, उससे खुद उनकी पार्टी बेचैनी महसूस करने लगती है.

News18Hindi
Updated: May 17, 2019, 7:49 PM IST
गोडसे को देशभक्त कहने वाली साध्वी प्रज्ञा की पांच विवादित बातें
प्रज्ञा ठाकुर
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Updated: May 17, 2019, 7:49 PM IST
भोपाल में भारतीय जनता पार्टी की उम्मीदवार और मालेगांव विस्फोट में आरोपी रहीं साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने चुनाव मैदान में उतरने के बाद लगातार विवादित बयान दिये हैं. लेकिन उनके पांच बयान ऐसे रहे हैं, जिस पर सफाई देना ना केवल उनके लिए बल्कि बीजेपी के लिए भी भारी पड़ गया. इनमें से ज्यादातर बयानों पर उन्हें खुद ही कदम पीछे खींचने पड़े।

1. नंबर वन विवादित बयान


- ''नाथूराम गोडसे देश भक्त थे, हैं और रहेंगे. उनको आतंकवादी कहने वाले लोगों को स्वयं की गिरेबान में झांक कर देखना चाहिए, ऐसा बोलने वालों को इस चुनाव में जवाब दे दिया जाएगा.''

(ये बयान उन्होंने कमल हासन द्वारा नाथूराम गोडसे को पहला हिंदू आतंकवादी कहने के जवाब में दिया था, जिस पर इतनी तीखी प्रतिक्रिया हुई कि उन्हें खुद अपने कदम पीछने खींचने पड़े.)

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2. नंबर दो विवादित बयान
- अयोध्या में विवादित ढांचे को तोड़ने पर मुझे गर्व है. मैं खुद विवादित ढांचा गिराने गई थी. मुझे ईश्वर ने शक्ति दी थी, हमने देश का कलंक मिटाया है.
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(चुनाव का पर्चा भरने के बाद एक टीवी कार्यक्रम में. जब चुनाव आयोग ने इस पर स्पष्टीकरण मांगा तो वो इससे मुकर गईं और कहा कि ये टीवी से उनकी पुरानी भेंट थी, तब उन्होंने चुनाव में नामांकन नहीं किया था)

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3. नंबर तीन विवादित बयान
- ‘‘मैंने करकरे से कहा था, तेरा सर्वनाश होगा. ठीक सवा महीने में सूतक लगता है. जिस दिन मैं गई थी. उस दिन इसका सूतक लग गया था और ठीक सवा महीने में जिस दिन आतंकवादियों ने इसको मारा उस दिन उसका अंत हुआ.’’
(इस बयान के बाद ना केवल बीजेपी बल्कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में खलबली मच गई. पार्टी और संघ के शीर्ष लोगों ने उन्हें ताकीद किया कि उन्हें ऐसे बयानों से बचना चाहिए, क्योंकि ये पार्टी के शहीदों के मसले को मुद्दा बनाने के खिलाफ जा रहा है. मतदाताओं के बीच भी इसे बहुत अच्छे तरीके से नहीं लिया जाएगा. करकरे के परिवार ही नहीं बल्कि उनके कई साथी पुलिस अधिकारियों ने इसकी आलोचना की)

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4. नंबर चार विवादित बयान
- 'भगवान राम के काल में रावण हुआ उसका अंत संन्यासियों के द्वारा करवाया गया. जब हमारा द्वापर युग था जब कंस हुआ तो उसका अंत कराने के लिए पुनः संत आए जिनको कंस ने जेलों में ठूंस रखा था. ऐसे संतों का ऐसे संन्यासियों का शाप लगा और वह शाप उसको अंत तक ले गए और भगवान कृष्ण ने उसका अंत किया. ऐसी ही आसुरी शक्तियां जब यहां व्याप्त हो गईं 2008 में मैं जब जेल गई पूरा दृश्य मुझे समझ में आया और जब यह धर्मविरुद्ध गया और कांग्रेस धर्मविरुद्ध गई. सूत्रकार यह है इसका समापन हमें करना है.

कई बार तो प्रज्ञा के बयानों पर सफाई देना बीजेपी के लिए भी मुश्किल हो गया


5. नंबर पांच विवादित बयान
- 'राज्य में 16 साल पहले उमा दीदी ने हराया था और वह 16 साल मुंह नहीं उठा पाया, और राजनीति कर लेता इसकी कोशिश नहीं कर पाया. अब फिर से सिर उठा है तो दूसरी संन्यासी सामने आ गई है जो उसके कर्मों का प्रत्यक्ष प्रमाण है.''
(भोपाल में कांग्रेस के प्रत्याशी और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के खिलाफ बयान)

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