5 ऐतिहासिक ब्लैक आउट : कैसे भारत और पड़ोस में गुल होती रही बिजली?

प्रतीकात्मक तस्वीर.

दुनिया के सबसे बड़े पावर फेलियरों (Largest Power Outages) की बात करें तो टॉप 10 की लिस्ट में दो बार ब्राज़ील और एक बार तुर्की का नाम है. यानी सात बार एशियाई देशों (Asian Countries) में यह दुखद रिकॉर्ड बना. इनमें भी 5 बार सिर्फ भारतीय उपमहाद्वीप (Indian Subcontinent) में.

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    पाकिस्तान में पांच साल पहले आतंकी हमले (Terrorist Attack) के चलते बिजली गुल होने से देश अंधेरे में डूब गया था. ताज़ा खबरों में कहा जा रहा है कि इस बार तकनीकी खराबी (Technical Fault) के चलते कराची, इस्लामाबाद, लाहौर, पेशावर और रावलपिंडी समेत पूरे पाकिस्तान (Pakistan Power Outage) में बीती रात से बिजली गुल है. आपको याद होगा अक्टूबर 2020 में भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई (Mumbai Power Failure) में पावर फेलियर की बड़ी खबर आई थी, तब चर्चा हुई थी कि भारत का पावर सेक्टर कितना मज़बूत और भरोसेमंद है.

    क्या आपको पता है कि दुनिया के इतिहास में जो सबसे बड़े पांच ब्लैक आउट हुए हैं, वो सिर्फ भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश में ही हुए हैं. सबसे बड़े ब्लैक आउट की लिस्ट में पाकिस्तान का ताज़ा ब्लैक आउट तीसरे नंबर पर माना जा रहा है. उन पांच घटनाओं को जानिए कि जब भारतीय उपमहाद्वीप अंधेरे में डूबा.

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    1. जब 10 फीसदी दुनिया डूबी अंधेरे में
    30 और 31 जुलाई 2012, देश के उत्तरी और पूर्वी हिस्से में इतिहास का सबसे बड़ा ब्लैक आउट हुआ. 30 जुलाई को 40 करोड़ और 31 जुलाई को 62 करोड़ से ज़्यादा की आबादी अंधेरे से जूझी. 62 करोड़ लोग यानी उस समय दुनिया की करीब 10 फीसदी आबादी और हिंदोस्तान की आधी से ज़्यादा. भारत के 22 राज्य इस ब्लैक आउट की चपेट में थे और 32 गीगावॉट की बिजली उत्पादन क्षमता ऑफलाइन हो गई थी.

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    भारत में 2012 में हुआ पावर फेलियर इतिहास का सबसे बड़ा ब्लैक आउट था.


    400 किलोवॉट की बीना-ग्वालियर लाइन ट्रिप हुई और सर्किट ब्रेक हुआ. चूंकि इस लाइन से आगरा-बरेली ट्रांसमिशन सेक्शन को बिजली मिलती थी, पूरे रूट के सभी प्रमुख पावर स्टेशन शट-डाउन कर दिए गए. जानकारों ने इसे दशक का सबसे खबरा फेलियर करार दिया. रेलवे और कुछ हवाई अड्डे घंटों तक ठप पड़े रहे थे. ट्रेनें तीन से पांच घंटों तक पूरे उत्तर भारत में ठप रहीं. स्वास्थ्य सेवाएं, पानी ट्रीटमेंट प्लांट, तेल रिफाइनरियां और कई सेक्टर बुरी तरह प्रभावित थे.

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    2. जब उत्तर भारत हो गया था ठप
    भारत में ही 2 जनवरी 2001 को जो बिजली सप्लाई का ब्रेकडाउन हुआ, वह इतिहास का दूसरा सबसे बड़ा ब्लैक आउट है, हालांकि उस समय यह पहले नंबर पर ही था और 11 सालों तक रिकॉर्ड था. इस पावर फेलियर के चलते करीब 23 करोड़ की आबादी प्रभावित हुई थी. आधिकारिक तौर पर बताया गया था कि ट्रांसमिशन सिस्टम में फॉल्ट के चलते उत्तर भारत में बिजली ठप हुई थी.

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    तब भी रेल नेटवर्क सबसे बुरी तरह प्रभावित हुआ था और दिल्ली का अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा भी काफी देर के लिए ठप हो गया था. ज़्यादा डिमांड और कम सप्लाई को इस फेलियर की बड़ी वजह माना गया था. ब्रेकडाउन से 2.5 से 5 अरब रुपये तक के नुकसान के अनुमान सीआईआई ने लगाए थे.

    3. पाकिस्तान का हालिया ब्लैक आउट
    पाकिस्तान के ऊर्जा मंत्रालय ने ट्वीट किया कि 'पावर ट्रांसमिशन सिस्टम की फ्रीक्वेंसी में अचानक 50 से 0 की गिरावट की वजह से देशव्यापी ब्लैकआउट हो गया.' मंत्रालय ने शनिवार रात करीब 11 बजकर 41 मिनट पर तकनीकी दिक्कत से हुए ब्लैकआउट के बाद लोगों से संयम बरतने की अपील की. ताज़ा रिपोर्ट्स की मानें तो देर रात करीब दो बजे कुछ शहरों में बिजली आई लेकिन ज़्यादातर में नहीं.

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    पाकिस्तान में पावर फेलियर से तकरीबन पूरा देश प्रभावित हुआ.


    9 और 10 जनवरी को पाकिस्तान के तमाम इलाकों में इस पावर फेलियर के कारण 20 करोड़ की आबादी के प्रभावित होने का अनुमान है, हालांकि अभी इस बारे में आधिकारिक आंकड़ा आना बाकी है. यदि इसके क़रीब का कोई आंकड़ा होता है तो यह इतिहास का तीसरा सबसे बड़ा ब्लैक आउट माना जाएगा.

    4. जब 12 घंटे मोमबत्तियों के सहारे रहे लोग
    बांग्लादेश में 1 नवंबर 2014 को इतिहास का एक और सबसे बड़ा ब्लैकआउट हुआ था. भारत से बिजली आयात करने वाले पावर स्टेशन में फेलियर के कारण पूरे बांग्लोदश में पावर सप्लाई बाधित हो गए थी. 12 घंटों के बाद बिजली काफी हद तक बहाल की जा सकी थी और इस दौरान करीब 15 करोड़ लोग अंधेरे में डूबे रहे थे.

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    साल 2007 में बांग्लादेश में सिद्र तूफान की वजह से नेशनल ग्रिड फेल होने के बाद से यह भारत के पड़ोसी मुल्क में बड़े पैमाने का ब्लैक आउट था. रात हो जाने तक बिजली ठप रहने से शहरों में लोग मोमबत्तियां तलाशते रहे थे. खबरें ये भी थीं कि इस दौरान ईंधन की बिक्री भी काफी बढ़ गई थी. बड़े अस्पताल और हवाई अड्डे जनरेटर से चल रहे थे, लेकिन बाकी पूरा देश तकरीबन ठप था.

    5. जब आतंकी हमले के बाद 80% पाकिस्तान में गई बिजली
    पाकिस्तान का 80% हिस्से में तब बिजली गुल हो गई थी, जब 26 जनवरी 2015 को एक आतंकवादी हमला हुआ था. दक्षिण पश्चिम बलूचिस्तान में अलगाववादियों ने जो बम धमाका किया था, उससे नेशनल ग्रिड से जुड़ी लाइन नष्ट हो गई थी. 13 दिनों के भीतर आतंकियों ने बिजली लाइनों पर यह तीसरा हमला किया था. नतीजा यह हुआ था कि कुछ ही मिनटों में पाकिस्तान के पावर प्लांट ट्रिप हो गए थे.

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    अंधेरे में डूबा शहर.


    स्थिति यह थी कि जहां 9000 मेगावाट बिजली उत्पादन होता था, वहां 600 मेगावाट ही हो पा रहा था. आतंकी हमले में नोटाल इलाके में दो ट्रांसमिशन टावर भी उड़ा दिए गए थे. तत्कालीन पीएम नवाज़ शरीफ ने जांच के आदेश दिए थे लेकिन उस वक्त ब्लैक आउट के चलते पाकिस्तान की करीब 14 करोड़ की आबादी कई घंटों के लिए बिजली की राह तकती रही थी.

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    इनके अलावा, 2019 में जावा और 2005 में जावा व बाली में जो ब्लैकआउट हुए थे, उनमें भी 10 करोड़ से ज़्यादा की आबादी के प्रभावित होने की खबरें थीं. ये इतिहास के सबसे बड़े ब्लैक आउट रहे हैं, जिनमें से ज़्यादातर तकनीकी खामियों के चलते होते रहे और यह भी इत्तेफाक की बात है कि तीन बार ऐसा जनवरी के महीने में ही हुआ.

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