पुराना है इस देश में बाढ़ का इतिहास, बचने के लिए बना डाली कृत्रिम लहर

नीदरलैंड्स में बाढ़ का 1000 साल से भी पुराना इतिहास रहा है (Photo-pikist)

नीदरलैंड्स में बाढ़ का 1000 साल से भी पुराना इतिहास रहा है (Photo-pikist)

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बाढ़ से देश के कई सूबों की हालत खराब है लेकिन सबसे ज्यादा बुरा हाल फिलहाल असम का है. यहां पानी के उफान के कारण 80 से ज्यादा जानें जा चुकी हैं. इधर बिहार और उत्तर प्रदेश में भी तबाही की शुरुआत हो चुकी है. ये ऐसे क्षेत्र हैं, जहां हर साल बारिश के मौसम में बाढ़ आती ही है. तो फिर क्या इसका स्थायी समाधान नहीं निकल सकता? या फिर हम नीदरलैंड्स जैसे देश से भी सीख सकते हैं, जिसका बाढ़ का 1000 साल से भी पुराना इतिहास रहा है. अब डच पानी की आपदा से जूझने में इतने माहिर हो चुके हैं कि दुनियाभर के देश वॉटर मैनेजमेंट के लिए उससे सीख ले रहे हैं.

बाढ़ में गई हजारों जानें

हरदम बाढ़ के खतरे में रहने वाले इस देश में वैसे तो इससे बचाव के लिए पहले से कोशिश होती रही लेकिन साल 1953 के बाद ये तेज हो गई. उस साल की बारिश में 600 स्क्वैयर मील हिस्सा पानी में पूरी तरह से डूब गया जिससे लगभग 2000 लोगों की जानें गईं. साथ ही हजारों लोग बेघर हो गए. इसके बाद भी वहां फ्लड-डिफेंस सिस्टम पर काम में तेजी आई. वैज्ञानिकों के साथ-साथ वहां आम लोग भी अपनी तरफ से कोशिश करने लगे कि बाढ़ का खतरा कैसे कम हो सके.

साल 1953 की बाढ़ में यहां 2000 से ज्यादा जानें गई थीं

बेहद संवेदनशील है ये देश

बता दें कि नीदरलैंड्स का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा समुद्र तल से नीचे की ओर है, जहां देश की 20 प्रतिशत से ज्यादा आबादी बसी हुई है. इतना ही नहीं, इस देश का आधा हिस्सा समुद्र तल से महज कुछ मीटर ऊंचा है. ऐसे में यहां हरदम बाढ़ का खतरा बना रहता है. इसे रोकने के लिए देश में समुद्र किनारे तटबंध बनाए गए. यहां के शहर रॉतेरडैम में समुद्र पर एक विशाल गेट बना हुआ है. ये समुद्र के पानी को रोकने का काम करता है. यहां जमा पानी से वॉटर स्पोर्ट्स का आयोजन भी होता रहता है. जैसे साल 2016 में यहां पर वर्ल्ड रोविंग चैंपियनशिप का आयोजन हुआ था. इससे वहां सैलानियों को आकर्षित करने का भी मौका मिलता है.

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ऐसे होती है पानी की निकासी

नीदरलैंड का ड्रेनेज सिस्टम भी काफी बढ़िया है. ये 17वीं सदी का बना हुआ है, जिसका लगातार रखरखाव होता रहता है. पानी की निकासी की ये व्यवस्था स्थानीय निकायों यानी म्यूनिसिपैलिटी के पास है ताकि उसके खराब होने पर नजर रहे और मरम्मत की जा सके. बारिश के मौसम से पहले ही ये एक्टिव हो चुके होते हैं और देखभाल शुरू कर देते हैं. शहर में अगर पानी भरे तो उसे निकालने के लिए पंपिंग सिस्टम है. पवन चक्की के जैसे दिखने वाले ये पंपिंग सिस्टम शहर से अतिरिक्त पानी निकालते हुए उसे नदी-नहरों तक पहुंचाते हैं ताकि खेती का काम हो.

अब यहां जमा पानी से वॉटर स्पोर्ट्स का आयोजन भी होता रहता है (Photo-youtube)


आर्टिफिशयल लहर तैयार

समुद्री लहरें बारिश के दौरान तूफानी हो जाती हैं. इसे नियंत्रित करने के लिए नीदरलैंड्स में एक अनोखा प्रयोग हुआ. यहां दुनिया की सबसे बड़ी आर्टिफिशयल लहर तैयार की गई. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक लहर पैदा करने की इस तकनीक को Delta Flume कहते हैं. इसका इस्तेमाल विशालकाय लहरों को कंट्रोल करने के लिए होता है. हाइड्रोलिक तकनीक पर काम करने वाली मशीन में 9 मिलियन लीटर पानी को समेट सकने की क्षमता होती है. तूफान शांत होने के बाद बचे पानी को किसी बांध के ज़रिये इस्तेमाल कर लिया जाता है.

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घरों में पेड़-पौधे

तकनीकों के अलावा देश की सरकार निजी स्तर पर भी लोगों को फ्लड कंट्रोल उपाय आजमाने की अपील करती रही है. यही वजह है कि यहां हर घर में और आसपास झेर सारे पेड़-पौधे हैं. इससे बाढ़ आने पर जमीन के पानी अवशोषित करने की क्षमता बढ़ जाती है. साथ ही नीदरलैंड्स में पानी में तैरने वाले घर भी बने हैं. लकड़ी से बने ये घर आपको वहां एम्सटर्डम से लागोस तक मिल जाएंगे.

नीदरलैंड्स में पानी में तैरने वाले घर भी बने हैं (Photo-pixabay)


तैरने वाले घर बनाए जा रहे

बिजनेस इनसाइडर की रिपोर्ट के मुताबिक इसमें बेस सीमेंट का होता है लेकिन उसके अंदर स्टीरोफोम भरा होता है, ताकि वे पानी में डूबे नहीं. इसके अलावा बाढ़ के लिए संवेदनशील इलाकों में रहने वालों के लिए सरकार ऊपर की तरफ आने का विकल्प भी देती है. लेकिन चूंकि देश का आधा हिस्सा ही बाढ़ के लिए संवेदनशील है और समुद्र तल के ऊपर ज्यादा विकल्प नहीं है इसलिए लोग जहां हैं, वहीं रहते हुए बाढ़ से बचने के लिए उपाय करते रहे.

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दूसरे देश में हैं आगे

वैसे नीदरलैंड्स के अलावा कई और भी पश्चिमी देश इस मामले में बेहतरीन काम कर रहे हैं. जैसे जापान में टोक्यो के शोवा और कासूकाबे, साइतामा के बीच दुनिया की सबसे बड़ी अंडरग्राउंड फ्लड वाटर डाइवर्जन फैसिलिटी तैयार की गई. इससे हर सेकंड लगभग 200 टन वजन का पानी निकाला जा सकता है. इसी तरह से लंदन के थेम्स नदी पर मेकेनिकल बैरियर बना हुआ है जो शहर में पानी भरने से बचाए रखता है. फ्रांस में पानी के लिए ढेर सारे जलाशय तैयार कर दिए गए. इससे सौंदर्यीकरण तो हुआ ही, पानी से बचाव भी हो सका. .
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