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Florence Nightingale B’day: फ्लोरेन्स नाइटिंगेल कैसे बनी ‘द लेडी विद द लैम्प’

फ्लोरेंस नाइटेंगल (Florence Nightingale) ने नर्सिंग को एक उच्च कोटि का दर्जा दिला कर उसे आधुनिक स्वरूप प्रदान किया. (तस्वीर: Wikimedia Commons)

फ्लोरेंस नाइटेंगल (Florence Nightingale) ने नर्सिंग को एक उच्च कोटि का दर्जा दिला कर उसे आधुनिक स्वरूप प्रदान किया. (तस्वीर: Wikimedia Commons)

फ्लोरेंस नाइटेंगल (Florence Nightingale) ने दुनिया में आधुनिक नर्सिंग (Modern Nursing) को एक नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया. संयोग की बात है उन्होंने दुनिया को बदलने का काम किया तब भी रूस युद्ध में उलझा हुआ था और आज भी रूस एक युद्ध में उलझा है. नर्सों की प्रशिक्षिका के तौर काम रही फ्लोरेंस नाइटेंगल रात को भी लालटेन लेकर घायल सैनिकों की देखभाल के लिए निकल जाती थीं. जिसके कारण उन्होंने द लेडी विद द लैम्प (The lady with the Lamp) कहा जाने लगा.

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    आज से 178 साल पुरानी कहानी है. रूस के क्रिमिया में युद्ध चल रहा था. इस युद्ध में एक अंग्रेजी महिला एक प्रबंधक और नर्सों की प्रशिक्षिका के तौर पर युद्ध के इलाके में आई थी. उन्होंने अपने सेवाभाव से घायल सैनिकों की सेवा में दिन रात एक कर दिया. रात को वे लालटेन लेकर घायलों की देखभाल के लिए निकल जाती थीं. सैनिकों ने उन्हें लेडी विद द लैम्प (The lady with the Lamp) कहना शुरू कर दिया. बाद में इसी नामसे विख्यात यह महिला कोई और नहीं फ्लोरेंस नाइटेंगल (Florence Nightingale) थीं. जिन्होंने आधुनिक नर्सिंग को एक क्रांतिकारी रूप दिया था. 12 मई को उनका जन्मदिन इंटरनेशनल नर्सेस डे (International Nurses Day) को रूप में मनाया जाता है.

    युद्ध से निकली मानवता की दास्तान
    इस युद्ध में रूस के खिलाफ फ्रांस, ब्रिटेन, सर्डीनिया और ऑटोमन साम्राज्य, ने जंग लड़ी थी.करीब दो साल चले इस युद्ध के बारे में कहा जाता है कि बहुत खून खराबे के बाद भी नतीजा कुछ नहीं निकला था. लेकिन इस युद्ध से जो फ्लोरेंस नाइटेंगल की कहानी निकली थी वह मानवता के करीब थी जिसने इतिहास रच दिया था.

    समृद्ध परिवार के जन्म
    फ्लोरेंस नाइटेंगल का जन्म 12 मई 1820 को इंग्लैंड के समृद्ध परिवार में इटली के फ्लोरेंस शहर में हुआ था. उसी शहर के नाम पर उनका नाम भी रख दिया गया है. बाद में उनका परिवार इंग्लैंड वापस आ गया था. उनकी शिक्षा हैम्पशायर और डर्बीशायर मे हुई थी. कुलीन परिवार में जन्म लेने के बाद भी उन्होंने लोगों की सेवा का मार्च चुना. इसके लिए उन्होंने परिवार के विरोध का भी सामना करना पड़ा था.

    तुर्की में घायल सैनिकों की सेवा
    लेकिन जल्दी ही उनके घरवालों को उनके संकल्प के आगे झुकना पड़ा. 1851में जर्मनी  गईं और दो साल बाद उन्होंने लंदन में महिलाओं के लिए अस्पताल खोला. इसी साल जब क्रीमिया में युद्ध की शुरुआत हुई तो फ्लोरेंस 38 नर्सों को साथ लेकर तुर्की के एक सैनिक अस्पताल में घायल सैनिकों की सेवा के लिए पहुंच गईं.

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    फ्लोरेंस नाइटेंगल (Florence Nightingale) को द लेडी विद द लैम्प का नाम सैनिकों ने दिया था. (तस्वीर: Wikimedia Commons)

    अद्भुत सेवाभाव और समर्पण
    यहां उन्होंने सेवाभाव और समर्पण की अद्भुत मिसाल पेश की. अस्पताल की साफ सफाई का ख्याल रखते हुए उन्होंने घायल सैनिकों की सेवा में अपने दिन रात लगा दिए. रात को भी वे हाथ में लालटेन लेकर सैनिकों का हाल पूछने निकल जाती थीं. इस वजह से सैनिक उन्हें द लेडी विद द लैंप कहा करते थे. बाद में यही नाम उनकी पहचान बन गया.

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    असहयोग भी झेलना पड़ा
    विपरीत परिस्थितियों और महिला होने के  कारण विरोध झेलने के बाद भी फ्लोरेंस की सेवा में कमी नहीं आई.  वे खुद सैनिकों के लिए खाना बनाती थीं जबकि उनके लिए कोई कमरा भी नहीं था. सैनिक अधिकारी भी उनके महिला होने के कारण उन्हें सहयोग देने कतराते थे. लेकिन फ्लोरेंस ने सभी के नजरिए को बदला और सैन्य अस्पतालों की स्थिति में सुधार के लिए जरूरी बदलाव तक कराए.

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    फ्लोरेंस नाइटेंगल (Florence Nightingale) बहुत ही विपरीत और असहयोग के माहौल में सैनिकों की सेवा की थी. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

    युद्ध के बाद भी
    लेकिन युद्ध के बाद जब फ्लोरेंस वापस लौटी तो उन्होंने सैनिक अस्पतालों के लिए काम करना जारी रखा. उन्हें ब्रिटेन की महारानी और शाही परिवार से भी सराहना मिली. 1860 में उन्हें आर्मी मेडिकल स्कूल खोलने में सफलता मिली और इसी साल उन्होंने नर्सों के लिए नाइटेंगल ट्र्रेनिंग स्कूल भी खोला और नोट्स ऑन नर्सिंग नाम की पुस्तक का प्रकाशन भी किया.

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    मरीजों और दीनदुखियों की सेवाकरते करते वे खुद भी बीमार हो गई थीं लेकिन उन्होंने अपना सेवाकार्य नहीं छोड़ा. उन्होंने नर्सों के काम को एक सम्मानजक कार्य का दर्जा दिलाया. नर्सों को बाकायदा प्रशिक्षण की परंपरा उन्होंने ही शुरू किया उन्होंने नर्सिंग के कार्य को एक सम्मानजनक व्यवासाय में बदला आज दुनिया भर में उनके जन्मदिन पर अंतरराष्ट्रीय नर्सिंग दिवस मनाया जाता है.

    Tags: Nurse, Research, Russia, World

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