कौन से हैं वे देश, जो खाने की बर्बादी में नंबर 1 हैं?

साल  2019 में अनुमानतः 93 करोड़, 10 लाख टन खाना बर्बाद हुआ- सांकेतिक फोटो (flickr)

साल 2019 में अनुमानतः 93 करोड़, 10 लाख टन खाना बर्बाद हुआ- सांकेतिक फोटो (flickr)

भारत में प्रति व्यक्ति सालाना लगभग 50 किलोग्राम खाना बर्बाद (food waste in India) जाता है, वहीं ऑस्ट्रेलिया 361 किलोग्राम के साथ इस मामले में दुनियाभर में टॉप पर है.

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कोरोना महामारी के कारण दुनिया की इकनॉमी चरमराने का सबसे बड़ा असर खाने-पीने पर पड़ा. बड़ी आबादी पहले से ही भुखमरी से जूझ रही थी. संयुक्त राष्ट्र की संस्था खाद्य एवं कृषि संगठन (UNFAO) के मुताबिक साल 2019 में 69 करोड़ लोग भुखमरी से जूझ रहे थे, जिसपर कोरोना की मार से संख्या और बढ़ी. वहीं भुखमरी के बीच खाने की बर्बादी की तस्वीरें और डरा रही हैं. साल 2019 में अनुमानतः 93 करोड़, 10 लाख टन खाना बर्बाद हुआ, जो कुल उपलब्ध खाने का लगभग 17% है. भारत भी खाना बर्बाद करने वाले देशों में शामिल है.

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) ने 4 मार्च को खाने की बर्बादी को लेकर डराने वाले आंकड़े जारी किए. इसके मुताबिक भारत में हर साल प्रति व्यक्ति 50 किलो खाने की बर्बादी हो रही है. ये खाना लगभग उतना है, जितना एक साल में पैदा हुए तिलहन, गन्ना और बागवानी का कुल उत्पादन.

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रिपोर्ट के अनुसार सबसे ज्यादा खाना लोग अपने घरों के भीतर बर्बाद करते हैं. वे जरूरत से ज्यादा खाना बनाकर फिर बचे खाने को फेंकते संकोच नहीं करते. घरों के बाद नंबर आता है रेस्त्रां और खाने-पीने के दूसरे ठियों का. इसके बाद खुदरा दुकानदार भी आते हैं, जो अनाज का ठीक से भंडारण नहीं कर पाते और खराब होने पर उसे फेंकना पड़ जाता है.
food waste
दक्षिण-एशिया में खाने की बर्बादी के मामले में कई देश भारत से आगे हैं


दक्षिण-एशिया के देशों में खाने की बर्बादी के मामले में कई देश भारत से आगे हैं, जिनमें पाकिस्तान भी शामिल है. यहां सालाना प्रति व्यक्ति लगभग 74 किलोग्राम खाना बर्बाद होता है. वैसे इस सूची में अफगानिस्तान दक्षिण एशियाई देशों में टॉप पर है, जहां सालाना प्रति व्यक्ति 82 किलो फूड वेस्ट होता है. इसके बाद क्रमशः नेपाल, श्रीलंका और फिर बांग्लादेश हैं. यानी सूची के मुताबिक अन्न की बर्बादी करने वाले देशों में भारत दक्षिण एशिया में सबसे नीचे है, जो कि बढ़िया बात है.

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खाने की बर्बादी करने वाले देशों की गणना के साल 2019 के आंकड़ों के मुताबिक यूरोपियन देश बेल्जियम में सबसे ज्यादा खाना बर्बाद चला जाता है, जबकि फिलीपींस में खाने की ज्यादा से ज्यादा बचत होती है. फूड वेस्ट पर संयुक्त राष्ट्र के अलावा कई दूसरी संस्थाओं ने भी स्टडी की. इसमें पाया गया कि ऑस्ट्रेलिया सबसे बड़ा फूड वेस्टर देश है, जहां सालाना लगभग 361 किलो खाना प्रति व्यक्ति बर्बाद जाता है. इसके बाद प्रति व्यक्ति लगभग 278 किलो के साथ अमेरिका का नंबर है.

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फिलीपींस में खाने की ज्यादा से ज्यादा बचत होती है


इस शोध में पाया गया कि विकासशील और विकसित देशों में खाने की बर्बादी के अलग-अलग कारण हैं. विकासशील देशों में जहां अन्न के सही भंडारण और फसल काटने के दौरान ही ज्यादा खाना बर्बाद होता है, वहीं विकसित देशों में रेस्त्रां में खाना बर्बाद चला जाता है. अमेरिका में साल 2019 में लगभग 60 मिलियन टन फल और सब्जियां फेंक दी गईं क्योंकि वे दिखने में अच्छी नहीं लग रही थीं, जैसे उनपर दबने के कोई धब्बा बन गया था. या फिर वे ज्यादा पक गए थे.

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इधर पड़ोसी देश चीन में भी हालात खास अच्छे नहीं. एक ओर हाल ही में वहां के राष्ट्रपति ने अपने देश को गरीबी-मुक्त बताया है, तो दूसरी ओर वहां लगातार भुखमरी की खबरें भी आती रही हैं. इस बीच चीन में ऑपरेशन 'क्लीन योर प्लेट' कैंपेन शुरू किया है. इसके तहत खाने की थाली में उतना ही लेने की बात हो रही है, जितनी भूख हो.

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अमेरिका में साल 2019 में लगभग 60 मिलियन टन फल और सब्जियां फेंक दी गईं (Photo- news18 English via Reuters)


इसके कारण चीन के पॉपुलर शो मुकबंग पर संकट आ गया है. China National Radio के मुताबिक इसमें होस्ट ढेर सारा खाना खाते हुए अकेले ही शो करता है. ये शो बाद में वेबकास्ट होता है. कई बार इसका लाइव भी होता है. इस शो की चीन में काफी लोकप्रियता है और एक होस्ट करोड़ों में कमाता है.

जिनपिंग के खाना कम खाने की अपील के बाद से स्टेट मीडिया इस शो की बुरी तरह से आलोचना कर रहा है. वो उन लोगों को लताड़ रहा है जो खुद को बड़े पेट का कहते हुए दूसरों से थोड़ा ज्यादा खाते हैं. चीनी मीडिया खुले तौर पर ऐसे लोगों को भुखमरी का दोषी कह रहा है. यही वजह है कि माना जा रहा है कि जल्द ही इस टीवी शो पर आधिकारिक तौर पर रोक लग सकती है.
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