अरुण जेटली का आपातकाल में नजरबंद रहने से लेकर वित्‍त मंत्री बनने तक का सफर

अरुण जेटली (Arun Jaitley) तब राजनीति में आए, जब वो दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढाई कर रहे थे. इसके बाद वो अगर वकील के तौर पर कद बड़ा करते गए तो सियासी मैदान में भी उनका ग्राफ ऊपर चढ़ता गया..

News18Hindi
Updated: August 24, 2019, 1:19 PM IST
अरुण जेटली का आपातकाल में नजरबंद रहने से लेकर वित्‍त मंत्री बनने तक का सफर
अरुण जेटली (Arun Jaitley) तब राजनीति में आए, जब वो दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढाई कर रहे थे. इसके बाद वो अगर वकील के तौर पर कद बड़ा करते गए तो सियासी मैदान में भी उनका ग्राफ ऊपर चढ़ता गया..
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Updated: August 24, 2019, 1:19 PM IST
पूर्व वित्त मंत्री और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता अरुण जेटली (Arun Jaitley) का निधन हो गया है. पिछले कुछ दिनों से वो भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में भर्ती थे, जहां उनकी हालत काफी नाजुक थी. जेटली का सियासी सफर लंबा और बेदाग था. तमाम मुद्दों पर उनकी समझ तो बेहतरीन थी ही साथ ही जिस तरह वो किसी भी बात को पेश करते थे, उससे अपने विरोधियों पर भी असर छोड़ते थे.

जेटली का जन्‍म 28 दिसंबर 1952 को नई दिल्‍ली के नारायणा विहार इलाके के मशहूर वकील महाराज किशन जेटली के घर हुआ. उन्‍होंने नई दिल्‍ली के सेंट जेवियर स्‍कूल से प्रारंभिक शिक्षा ग्रहण की. श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से जेटली ने वर्ष 1973 में स्‍नातक की पढ़ाई की. उन्‍होंने कॉमर्स के बाद यहीं से लॉ की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान जेटली छात्र राजनीति में रहे. 1974 में वो दिल्‍ली यूनिवर्सिटी के छात्र संघ अध्‍यक्ष चुने गए.

19 महीने तक नजरबंद और जेपी आंदोलन में भी रहे सक्रिय
अरुण जेटली ने राजनीति की शुरुआत राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ के छात्र विंग अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से की. 1975 में उन्‍होंने आपातकाल का विरोध किया था, जिसके बाद उन्‍हें 19 महीने तक वो नजरबंद रहे. 1973 में जयप्रकाश नारायण और राजनारायण द्वारा चलाए गए आंदोलन में भी उन्‍होंने सक्रिय भूमिका निभाई थी. आपातकाल के बाद 1977 में उन्‍होंने हाईकोर्ट में वकालत करनी शुरू की.

देश के सबसे महंगे वकीलों में से
अरुण जेटली की गिनती देश के महंगे वकीलों में होती है. 1990 में अरुण जेटली सुप्रीम कोर्ट में बतौर वरिष्‍ठ वकील काम करने लगे. 1989 में वीपी सिंह की सरकार में उन्‍हें अतिरिक्‍त सॉलिसिटर जनरल नियुक्‍त किया गया. जेटली ने बोफोर्स घोटाले की जांच में पेपरवर्क किया था.

बनाए गए थे बीजेपी के प्रवक्‍ता
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जेटली ने वर्ष 1991 में बीजेपी की सदस्‍यता ली. हिंदी और अंग्रेजी में अच्‍छी पकड़ और प्रखर वक्‍ता होने के कारण उन्‍हें 1999 में बीजेपी का प्रवक्‍ता बनाया गया. अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में उन्‍हें सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का स्‍वतंत्र प्रभार सौंपा गया था. इसके बाद जेटली को विनिवेश का स्‍वतंत्र राज्‍यमंत्री बनाया गया था.

भाजपा में अरुण जेटली ने तेजी से तरक्की की सीढियां चढ़ीं. उन्होंने पहले अटल बिहारी वाजपेयी और फिर मोदी सरकार में अहम मंत्रालयों का कामकाज संभाला


जब राम जेठमलानी ने कानून, न्‍याय और कंपनी अफेयर मंत्रालय से त्‍याग पत्र दिया था, उस वक्‍त जेटली को इस मंत्रालय का अतिरिक्‍त कार्यभार सौंपा गया था. वर्ष 2000 लोकसभा चुनाव के बाद जेटली को कानून, न्‍याय, कंपनी अफेयर और शिपिंग मंत्री बनाया गया था.

पीएम मोदी ने जताया सबसे ज्‍यादा विश्‍वास
वर्ष 2000 के बाद लगातार दो लोकसभा चुनाव हारने के बाद 2009 में जेटली को राज्‍यसभा में विपक्ष का नेता बनाया गया था. वहीं 2009 लोकसभा चुनाव में जेटली बीजेपी प्रचार अभियान समिति के प्रमुख थे. वर्ष 2014 में जब नरेंद्र मोदी को बीजेपी प्रचार अभियान समिति का प्रमुख बनाया गया, तब उन्‍होंने अरुण जेटली पर सबसे ज्‍यादा विश्‍वास जताया.

पार्टी ने उन्‍हें पंजाब के अमृतसर से चुनाव लड़ाया. हालांकि कैप्‍टन अमरिंदर सिंह से उन्‍हें हार का सामना करना पड़ा. फिर अरुण जेटली को देश का वित्‍त मंत्री बनाया गया. अस्‍वस्‍थ रहने के कारण उन्होंने यूपीए-2 में मंत्री पद स्वीकार नहीं किया था. इसके बाद उन्होंने अपना सरकार बंगला खाली कर दिया. वो अपने निजी आवाज में चले गए. पिछले कुछ समय उनकी तबीयत लगातार खराब बताई जा रही है.

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First published: August 24, 2019, 12:50 PM IST
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