Mysterious Fossil: ‘सबसे छोटा डायनासोर’ नहीं है म्यांमार में मिला ये जीवाश्म

म्यांमार में मिला रहस्यमयी जीवाश्म (Mysterious Fossil) दरअसल एक छिपकली का है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

म्यांमार (Myanmar) में मिले एक जीवाश्म (Fossil) को शोधकर्ताओं ने दुनिया का सबसे छोटा डायनासोर (Dinosaur) बताया था, लेकिन नए अध्ययन ने इस दावे को खारिज किया है.

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    दुनिया में लोगो को डायनासोर (Dinosaur) के बारे में जानने की बहुत जिज्ञासा होती है. यह जीव दुनिया में 6.6 करोड़ साल पहले तक ही पाए जाते थे जिनके अब केवल जीवाश्म (Fossils) ही मिलते हैं. हाल ही में म्यांमार (Myanmar) में एक  बहुत छोटा जीवाश्म मिला जिसे शोधकर्ताओं ने दुनिया के सबसे छोटे डायनासोर का जीवाश्म कहा था, लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं है. यह एक रहस्यमयी छिपकली का जीवाश्म है जिसे दुनिया के सबसे छोटे डायनासोर का जीवाश्म समझ लिया गया. नए अध्ययन में  बताया गया है कि यह एक विलुप्त प्रजाति की छिपकली थी.

    पहले दावे को चुनौती
    मार्च 2020 में शोधकर्ताओं के एक समूह ने एक जीवाश्म को उत्तरी म्यांमार से खोजा था जिसे 9.9 करोड़ साल पहले का दुनिया का सबसे छोटा डायनासोर कहा गया. यह अध्ययन नेचर जर्नल में प्रकाशित हुआ था,  लेकिन तभी से यह शोध विवादों में घिर गया है.अब करेंट बायोलॉजी में प्रकाशित इस अध्ययन में दलील दी गई है कि यह जीवाश्म कभी डायनासोर था ही नहीं.

    इस प्रजाति की छिपकली
    इस शोध में दावा किया गया है कि यह नई ओक्यूलूडेंटिवास प्रजाति का है जो छिपकली वंशज के जीव थे. इस सरीसृप की हड्डियों के ढांचा से इस जीव की बड़ी आंखे, पूरी खोपड़ी और कई ऊतकों की जानकारी मिली है. शोधकर्ताओं का कहना है कि यह प्रजाति अब विलुप्त हो चुकी है. इसे ओक्यूलूडेंटिवास नागा प्रजाति नाम दिया गया है.

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    छोटे डायनासोर (Dinosaurs) और छिपकलियों में काफी समानताएं पाई जाती हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)


    नागा शब्द का रहस्य
    नेचर ने इस शोधपत्र को हटा लिया है जिसमें इस जीवाश्म की पहचान हैमिंगबर्ड के आकार के डायनासोर के तौर पर की गई थी. वहीं ओक्यूलूडेंटिवास नागा नाम में नागा शब्द म्यांमार में रहने वाली आदिवासियों के सम्मान में जोड़ा गया है. यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि छिपकलियों और डायनासोर में काफी समानताएं होती हैं लेकिन उनके आकार में बहुत बड़ा फर्क होता है.

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    कैसे निकाला नतीजा
    यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिस्टल में स्कूल ऑफ अर्थ साइंस के अर्नायू बोलेट की अगुआई में शोधकर्ताओं ने ऑस्ट्रेलियन सेंटर फॉर न्यूट्रॉन स्कैटरिंग एंड हाई रिजोल्यूशन और ऑस्टिन की टेक्सास यूनिवर्सिटी की रे कंप्यूटेड टोमोग्राफी फैसिलिटी में इस जीवाश्म का सीटी स्कैन किया. शोधकर्ताओं ने दोनों ही प्रजातियों की हर हड्डी की तुलना की और दोनों में काफी भौतिक समानताएं पाई लेकिन इस नतीजे पर पहुंचे कि यह जीवाश्म छिपकली का ही है.

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    इस जमाने में छिपकलियों (Lizards) और अन्य सरीसृपों की भरमार हुआ करती थी. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


    दोनों जीवों में समानताएं
    इसके अलावा जीवाश्मविज्ञानियों ने बाहरी त्वचा की मौजूदगी, आंखों की संरचना और कंधे की हड्डियों में समानता पाई जो सरीसृपों में पाई जाती है.  क्रिटेशियस काल में कीरब 12.5 से लेकर 6.6 करोड़ साल पहले इस तरह की छिपकलियों और सृपों की भरमार हुआ करती थी, फिर भी इनके बारे में पता लगाना बहुत ही मुश्किल काम है.

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    यह जीवाश्म पेड़ की जीवाश्म राल में पाया गया था जो एडोल्प पेरेटी नाम के रत्नविशेषज्ञ ने खोजा था. शोधकर्ताओं ने अपने शोध मे किए गए सीटी स्कैन और अन्य जानकारी को लोगों के लिए उपलब्ध कराया है जिससे नए शोध और पड़तालों में मदद मिल सके.

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