Birthday KB Hedgewar : कांग्रेस में शामिल हुए थे हेडगेवार फिर क्यों उससे किया किनारा

केबी हेडगेवार पेशे से डॉक्टर थे लेकिन उन्होंने ऐसा संगठन खड़ा किया, जिसकी जड़ें आज भारत में बहुत मजबूत हैं.

केबी हेडगेवार पेशे से डॉक्टर थे लेकिन उन्होंने ऐसा संगठन खड़ा किया, जिसकी जड़ें आज भारत में बहुत मजबूत हैं.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना करने वाले डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार (Keshav Baliram Hedgewar) का आज जन्मदिन है. आखिर क्यों कांग्रेस में शामिल होने के बाद उनका उससे मोहभंग हो गया. जिसके बाद उन्होंने आरएसएस जैसे बड़े संगठन की नींव रखी.

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (Rashtriya Swayamsevak Sangh) की नींव रखने वाले डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार (Keshav Baliram Hedgewar) का आज 01 अप्रैल को जन्मदिन है. स्कूल में उन्हें वंदेमातरम गाने के कारण निकाल दिया गया था. आजादी के संघर्ष के दौरान वो पहले कांग्रेस में शामिल हुए. कांग्रेसी पदाधिकारी के तौर पर गिरफ्तारी भी दी. फिर उनका कांग्रेस से मोहभंग हो गया. तब उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की नींव रखी.

डॉ. हेडगेवार का जन्म नागपुर के ब्राह्मण परिवार में हुआ था. शुरुआती पढ़ाई नागपुर के नील सिटी हाईस्कूल में हुई. लेकिन जब नागपुर के स्कूल में वंदेमातरम गाने के कारण उन्हें निकाल दिया गया तो घरवालों ने पढ़ाई के लिए यवतमाल और पुणे भेजा. मैट्रिक के बाद हिंदू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी एस मूंजे ने उन्हें मेडिकल की पढ़ाई के लिए कोलकाता भेजा.

कांग्रेस में सक्रिय हुए 

डॉ. हेडगेवार जब कोलकाता में डॉक्टरी की पढ़ाई कर रहे थे, उन्हीं दिनों वो वहां देश की नामी क्रांतिकारी संस्था अनुशीलन समिति से जुड़ गये.  1915 में नागपुर लौटने पर वह कांग्रेस में सक्रिय हो गए. कुछ समय में विदर्भ प्रांतीय कांग्रेस के सचिव भी बन गए. हालांकि इस दौरान वो लगातार हिंदू महासभा में भी शामिल रहे.
असहयोग आंदोलन में गिरफ्तारी दी

1920 में जब नागपुर में कांग्रेस का राष्ट्रीय अधिवेशन हुआ तो उन्होंने कांग्रेस में पहली बार पूर्ण स्वतंत्रता को लक्ष्य बनाने के बारे में प्रस्ताव पेश किया, जो तब पारित नहीं हुआ.  1921 में कांग्रेस के असहयोग आन्दोलन में वो भी सत्याग्रहियों में थे, जिन्होंने गिरफ्तारी दी. उन्हें एक वर्ष की जेल हुई.

कांग्रेस से मोहभंग और हिंदुत्व की राह पर चल पड़े



इसके बाद भारत में शुरू हुए धार्मिक-राजनीतिक खिलाफत आंदोलन के चलते उनका कांग्रेस से मन खिन्न हो गया. 1923 में सांप्रदायिक दंगों में उनकी राह पूरी तरह हिंदुत्व की ओर चल पड़ी.

वह हिंदू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी एस मुंजे के संपर्क में शुरू से थे. मुंजे के अलावा हेडगेवार के व्यक्तित्व पर बाल गंगाधर तिलक और विनायक दामोदर सावरकर का बड़ा प्रभाव था.

दशहरा के दिन रखी संघ की नींव

हिंदू राष्ट्र की परिकल्पना को साकार करने के लिए 1925 में विजय दशमी के दिन डॉ. हेडगेवार ने संघ की नींव रखी. वह संघ के पहले सरसंघचालक बने. हेडगेवार ने शुरू से ही संघ को सक्रिय राजनीति से दूर सिर्फ सामाजिक-धार्मिक गतिविधियों तक सीमित रखा.

हेडगेवार का मानना था कि संगठन का प्राथमिक काम हिंदुओं को एक धागे में पिरो कर एक ताकतवर समूह के तौर पर विकसित करना है. हर रोज सुबह लगने वाली शाखा में कुछ खास नियमों का पालन होता था.

डॉ. हेडगेवार का निधन 21 जून, 1940 को हुआ. उनके बाद सरसंघचालक की जिम्मेदारी माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर को सौंप दी गई.
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