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वे 4 एक्सपर्ट, जिन्होंने चीन से कोरोना वायरस को लगभग खत्म कर दिया

News18Hindi
Updated: April 4, 2020, 5:45 PM IST
वे 4 एक्सपर्ट, जिन्होंने चीन से कोरोना वायरस को लगभग खत्म कर दिया
कोविड-19 (COVID-19) से मुकाबले में चीन की सरकार ने काफी आक्रामक रवैया रखा (सांकेतिक फोटो)

चीन के वुहान (Wuhan) से फैला कोरोना वायरस (coronavirus) अब दुनिया से तमाम देशों को संक्रमित कर चुका है. वहीं चीन में अब पिछले हफ्तों के मुकाबले नहीं के बराबर मामले दर्ज हो रहे हैं. माना जा रहा है कि इस घातक वायरस से जंग में 4 चीनी विशेषज्ञों ने बड़े फैसले किए.

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दुनिया में कोरोना पॉजिटिव लोगों का आंकड़ा 11 लाख पार कर चुका है. रोज हर देश में मामले बढ़ रहे हैं जबकि चीन में 3 अप्रैल को 19 नए मरीज आए. मौत की दर भी यहां दूसरे विकसित देशों के मुकाबले कम है. कोविड-19 (COVID-19) से मुकाबले में चीन की सरकार ने तो काफी आक्रामक रवैया रखा ही, साथ ही इसमें 4 हेल्थ एक्सपर्ट्स के कामों को भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

इनमें सबसे पहला नाम चोंग नानशान (Zhong Nanshan) का आ रहा है. 84 साल के चोंग pulmonologist यानी फेफड़ों की बीमारियों के विशेषज्ञ हैं. उन्हें 18 जनवरी की रात वुहान पहुंचने को कहा गया. बताया गया कि वुहान में एक दिन में ही निमोनिया के मरीजों की संख्या लगभग 60 हो गई है. ये संख्या अपने-आप में चौंकाने वाली थी. वुहान पहुंचने के 1 दिन बाद ही इस एक्सपर्ट ने Xinhua News Agency (सिन्हुआ न्यूज एजेंसी) से बातचीत में सुझाव दिया कि शायद ये निमोनिया न होकर कोई वायरस से पैदा होने वाली बीमारी है. अगर ऐसा है तो वुहान से बाहर जाने और भीतर आने वाले परिवहन के सारे साधनों को रोक देना चाहिए. इसके बाद से रेल्वे स्टेशन, हवाई अड्डों को बंद करने के आदेश जारी हुए. चोंग ने ये भी कहा कि सर्दी से पीड़ित कोई भी मरीज आए तो तुरंत उसका फीवर भी जांचा जाए. अगर तापमान बढ़ा हुआ है तो उसे अलग रखकर इलाज दिया जाए. इससे पहले सार्स के कहर के दौरान भी इस एक्सपर्ट ने काफी काम किया था, यही अनुभव दोबारा काम आया.

सार्स के कहर के दौरान किया गया काम इस दौरान काफी मददगार रहा




ली लेलज्वेन(Li Lanjuan) भी प्रमुख नाम हैं. वे चीनी इंजीनियरिंग अकादमी की सदस्य और च च्यांग यूनिवर्सिटी के तहत काम करने वाले अस्पताल में संक्रामक बीमारियों के निदान में विभाग डायरेक्टर हैं. 18 जनवरी को वे विशेषज्ञों की टीम के साथ वुहान पहुंची. बीमारी की पड़ताल के बाद वे और टीम इस नतीजे पर पहुंचे कि वुहान को तुरंत देश और दुनिया से सभी हिस्सों से काटना होगा वरना बीमारी तेजी से फैलेगी. 23 जनवरी को केंद्र सरकार ने वुहान में लॉकडाउन घोषित करते हुए पूरे हुबई प्रांत को सील कर दिया.



चीनी इंजीनियरिंग अकादमी के उपाध्यक्ष Wang Chen भी लंग्स से जुड़ी बीमारियों के विशेषज्ञ रहे हैं. वुहान में तेजी से आ रहे मरीजों की जांच के दौरान वांग ने कहा कि मरीजों को तुरंत बाकी मरीजों से अलग रखा जाए और इनपर नजर रखने के लिए अलग डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ हो. वांग ही वो शख्स हैं, जिन्हें अंदाजा हो गया था कि ये बीमारी तेजी से बढ़ सकती है. इसलिए उन्होंने जल्दी से जल्दी मेकशिफ्ट अस्पताल बनवाने की सलाह दी, जहां कम गंभीर मरीजों को रखा जा सके. इसके बाद चीन की सरकार ने 2 ही हफ्तों के भीतर स्टेडियम और जिम जैसी जगहों को अस्थाई अस्पतालों में बदल दिया.

जल्दी से जल्दी मेकशिफ्ट अस्पताल तैयार हुए और मास्क बांटे जाने लगे


रातोंरात वुहान पहुंचे विशेषज्ञों की टीम में से एक नाम है चांग पोली. चीनी इंजीनियरिंग अकादमी का सदस्य होने के अलावा वे थ्येन चिन परंपरागत चिकित्सा विश्वविद्यालय के डायरेक्टर भी हैं. इन्होंने मरीजों को देखने के बाद कहा कि चूंकि ये नई बीमारी है और टीका या इलाज कुछ भी नहीं. ऐसे में अपेक्षाकृत बेहतर सेहत वाले मरीजों को पश्चिमी इलाज से साथ ही साथ चीन की परंपरागत चिकित्सा भी दी जा सकती है. उनकी ये सलाह फौरन मान ली गई और माना जाता है कि इससे काफी मरीजों को लक्षणों में बहुत राहत भी मिली.

बता दें कि इस बीच चीन का हुबई प्रांत वापस सामान्य जिंदगी में लौट चुका है, जबकि वुहान 8 अप्रैल को पूरी तरह से खुलेगा. इसके बाद भी वहां केवल नही लोग यात्रा कर सकेंगे या बाहर मेलजोल कर सकेंगे, जिनके QR कोड का रंग हरा है यानी जो पूरी तरह से सेहतमंद हैं. लाल या पीले रंग के कोड वाले लोगों पर फिलहाल उसी तरह के कड़े प्रतिबंध लागू रहेंगे.

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First published: April 4, 2020, 5:44 PM IST
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