कौन हैं सचिन वाजे जिन्हें महाराष्ट्र पुलिस में 16 साल बाद किया गया बहाल?

कौन हैं सचिन वाजे जिन्हें महाराष्ट्र पुलिस में 16 साल बाद किया गया बहाल?
ख्वाजा युनुस की फाइल फोटो

सहायक पुलिस निरीक्षक सचिन वाजे (Sachin Vaze) की सेवा मुंबई पुलिस ने शुक्रवार को बहाल कर दी. उन पर ख्वाजा यूनुस की कस्टोडियल डेथ में विभिन्न आरोप लगे थे.

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मुंबई. महाराष्ट्र (Maharashtra) में घाटकोपर धमाका मामले (Ghatkopar Blast) के संदिग्ध ख्वाजा यूनुस (Khawaja Yunus) की पुलिस हिरासत में हुई कथित हत्या के मामले में 16 साल पहले निलंबित किए गए एक सहायक पुलिस निरीक्षक और तीन कांस्टेबल को मुंबई पुलिस (Mumbai Police) ने फिर से सेवा में बहाल कर दिया है. एक अधिकारी ने रविवार को यह जानकारी दी.

चारों पुलिसकर्मियों को 2004 में निलंबित किया गया था और उन पर यूनुस मामले में हत्या और सबूतों को मिटाने सहित अनेक आरोपों में मामले चल रहे हैं. एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि शुक्रवार को सेवा में बहाल होने के बाद सहायक पुलिस निरीक्षक सचिन वाजे (Sachin Vaze) ,कांस्टेबल राजेन्द्र तिवारी (Rajendra Tiwari), सुनील देसाई (Sunil Desai) ने स्थानीय हथियार इकाई में शनिवार को काम संभाल लिया वहीं कांस्टेबल राजाराम निकम (Rajaram Nikam) को मोटर वाहन विभाग में तैनाती दी गई है.

तथ्यों को छिपाने के संबंध में मामले में आरोप पत्र दाखिल
वाजे 1990 बैच के पुलिस अधिकारी और एनकाउंटर स्पेशलिस्ट हैं उन्हें 2004 में गिरफ्तार किया गया था और उनके खिलाफ तथ्यों को छिपाने के संबंध में मामले में आरोप पत्र दाखिल किया गया था.
अधिकारी ने बताया कि उन्होंने नवंबर 2007 में पुलिस बल से इस्तीफा दे दिया था, लेकिन उनके खिलाफ जांच लंबित होने के कारण उनका इस्तीफा मंजूर नहीं किया गया था. महाराष्ट्र के परभणी का रहने वाला 27 वर्षीय ख्वाजा यूनुस एक इंजीनियर था और दुबई में काम करता था. उसे दिसंबर 2002 के घाटकोपर बम विस्फोट मामले के तुरंत बाद हिरासत में ले लिया गया था.



ख्वाजा पर क्या था पुलिस का दावा?
पुलिस ने दावा किया था कि यूनुस को जब पूछताछ के लिए औरंगाबाद ले जाया जा रहा था, तब वह फरार हो गया था लेकिन बम्बई हाईकोर्ट (Bombay Highcourt) के आदेश पर अपराध जांच विभाग (CID) द्वारा की गई जांच में उसने कहा कि पुलिस हिरासत में ख्वाजा की मौत हो गई थी.

जांच में 14 पुलिसकर्मियों को दोषी ठहराया गया था, लेकिन सरकार ने वाजे, तिवारी, निकम और देसाई केवल चार पर ही मुकदमा चलाने की मंजूरी दी. अभियोजन पक्ष के एक गवाह ने पहले यहां एक सत्र अदालत को बताया था कि यूनुस को लॉकअप में कपड़े उतार कर बेल्ट से छाती और पेट पर पीटा गया था.

इतने साल वाजे ने क्या किया?
अंग्रेजी इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार 
एक अधिकारी ने कहा '2004 में  ख्वाजा यूनुस मामले में वाजे की कथित भूमिका के कारण, उन्हें निलंबित कर दिया गया था और बाद में 2007 में अपना इस्तीफा सौंप दिया था. हालांकि इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया था और इसलिए उन्हें फिर से बहाल किया जा सकता था.'  इस्तीफा देने के बाद वाजे साल 2008 में शिवसेना में शामिल हो गए. उनके वकील ने कहा कि वह कुछ समय के लिए शिवसेना में थे.   


वाजे ने  शीना बोरा हत्या मामले में और डेविड हेडली पर किताब भी लिखी, रिपोर्ट के अनुसार एक अधिकारी ने कहा, जब वाजे सस्पेंड थे तब कुछ जांच एजेंसियों द्वारा भी  उनकी सेवाओं ली गई. वह कई समाचार चैनलों पर एक 'विशेषज्ञ' के रूप में भी आए.

 सॉफ्टवेयर डेवलपर भी हैं वाजे!
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि वाजे ने करियर की शुरुआत ठाणे में की थी. जहां उन्होंने अन्य अधिकारियों के साथ मिलकर इलाके में सक्रिय सुरेश मांचेकर गिरोह पर काबू पाने में भूमिका निभाई थी. जब ठाणे का एक आईपीएस अधिकारी मुंबई चला गया, तो उसके साथ वाजे भी चले गए. यहां वह क्राइम ब्रांच सीआईयू के साथ तैनात था, जहां वह 'एनकाउंटर स्पेशलिस्ट' प्रदीप शर्मा के साथ थे.

टेक्नोलॉजी पर अच्छी पकड़ के चलते उन्होंने साल 2010 में लाल बिहारी नाम की नेटवर्किंग साइट भी शुरू की. वाजे ने कथित तौर पर सॉफ्टवेयर भी डेवलप किया है.
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