जानिए NASA Rover के वो चार काम, जो मंगल पर इंसान भेजने की बनाएंगे भूमिका

जानिए NASA Rover के वो चार काम, जो मंगल पर इंसान भेजने की बनाएंगे भूमिका
नासा का पर्सिवियरेंस रोवर मंगल पर इंसान के जाने की तैयारी का हिस्सा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

नासा (NASA) मंगल (Mars) के लिए अपने रोवर (Rover) का प्रक्षेपण अगले महीने करने जा रहा है. इसके जरिए वह चार अहम प्रयोग करना चाहता है जो मंगल पर इंसान भेजने के लिए जरूरी हैं.

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इन दिनों नासा (NASA) के भावी अंतरिक्ष अभियानों (Space Missions) की खूब चर्चा है. एक ओर जहां दुनिया के देश मंगल (Mars) के लिए अंतरिक्ष यान छोड़ रहे हैं तो वहीं नासा मंगल के लिए अपने एक और रोवर (Rover) जल्दी ही प्रक्षेपित करने वाला है. यह रोवर इससे पहले भेजे गए दो रोवर से काफी अलग है और बताया जा रहा है. यह पर्सिवियरेंस रोवर (Perseverance Rover) बहुत से ऐसे प्रयोग और पड़ताल करेगा जिससे अगले दशक में नासा के मंगल पर इंसान भेजने की योजना को मूर्त रूप देने में मदद मिलेगी. इनमें चार खास काम हैं जिसमें रोवर की भूमिका होगी.

कब मंगल पर पहुंचेगा रोवर
पर्सिवियरेंस का प्रक्षेपण इस साल जुलाई अगस्त के समय होना है. पहले नासा ने जुलाई की तारीखें प्रक्षेपण के लिए तय की थीं, लेकिन अब यह अगस्त में होगा. फिलहाल नासा ने रोवर को मंगल पर उतारने की तारीख में बदलाव नहीं किया है. यह 18 फरवरी 2021 को मंगल के जजीरों क्रेटर पर उतरेगा. अन्य सभी काम के अलावा इसका एक प्रमुख काम यहां से मिट्टी के नूमने जमा करने का होगा.

चार प्रमुख काम पर निर्भर है सब कुछ
नासा के इस रोवर का एक सबसे बड़ा काम भविष्य में मंगल पर इंसान के उतरने की भूमिका तैयार करने है. इसमें चार प्रमुख अध्ययन होंगे. इनमें रोवर के उतरने वाली जगह के आसपास के इलाकों का नेविगेशन, मंगल ग्रह पर मौजूद कार्बनडाइऑक्साइड से ऑक्सीजन का निर्माण, उन सभी मौसमी और पर्यावरणीय हालातों का अध्ययन जिनका हमारे मंगल यात्री सामना करेंगे, और  चौथा भूगर्भीय अध्ययन जिससे सतह के नीचे के पानी के बारे में जानकारी मिल सके जो मंगल यात्रियों के लिए उपयोगी साबित हो.



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अभी तक मंगल पर केवल कुछ अंतरिक्ष यान ही उतरे हैं लेकिन वहां कोई इंसान नहीं गया है. . (प्रतीकात्मक तस्वीर)


आसपास के भूभाग का नेविगेशन
मंगल, या किसी भी ग्रह, उपग्रह पर सबसे अहम काम होता है सुरक्षित लैंडिंग. यानि जमीन पर सुरक्षित उतरने की प्रक्रिया. इसके लिए बहुत जरूरी है कि  इस बात की पूरी जानकारी हो कि जहां यान या रोवर उतारा जाना है वहां की जमीन इतनी ऊबड़खाबड़ न हो कि इस प्रक्रिया में बाधा आ जाए. पर्सवियरेंस रोवर का काम अपने आसपास के इलाके की पूरी जानकारी हासिल कर पृथ्वी तक पहुंचाना होगा. नासा में गाइडेंस नेविगेशन कंट्रोल सिस्टम के मैनेजर एंड्रयू जॉनसन का कहना है कि पिछले अभियान में लैंडिंग क्षेत्र की जरूरत पार्किंग लॉट की तरह थी, लेकिन इस बार आप क्रेटर में, ढाल या चढ़ाई वाले इलाके, या फिर पथरीले इलाके में भी लैंडिंग कर सकते हैं. रोवर के माध्यम से नासा यही सुनिश्चित करना चाहता है. इस बार का सिस्टम आगे से चांद और मंगल पर लैंडिंग का एक सुरक्षित सिस्टम विकसित करेगा.

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मंगल पर ऑक्सीजन का उत्पादन
रोवर का एक काम मंगल ग्रह पर ऑक्सीजन का उत्पादन करने का सफल प्रयोग करना भी होगा. मंगल पर ऑक्सीजन नहीं हैं. ऐसे में वहां पहुंचे अंतरिक्ष यात्रियों के लिए ऑक्सीजन की व्यवस्था करना एक चुनौती है. इसके लिए नासा रोवर के साथ मॉकसी (MOXIE) यानि मार्स ऑक्सीजन इनसीटू रिसोर्स यूटिलाइजेशन एक्सपेरिमेंट भी भेज रहा है. नासा पर कार्बन डाइऑक्साइड प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है. मॉकसी का काम इसे ऑक्सीजन में बदलने का होगा जो मंगल यात्रियों के लिए काम तो आएगी ही, वह ईंधन के लिए प्रोपेलेंट की तरह भी काम देगी. फिलहाल मॉक्सी केवल 10 ग्राम प्रति घंटे की रफ्तार से ऑक्सीजन बनाएगी. इसके सफल होने बाद इसे बड़ा किया जाएगा जिससे वह ज्यादा ऑक्सीजन बना सके.

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यह रोवर नासा के मंगल पर मानव भेजने के अभियान के लिए बहुत अहम माना जा रहा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


मेडा और मौसम
इसके अलावा मार्स एनवायर्नमेंटल डायनामिक्स ऐनालाइजर यानि MEDA भी रोवर के साथ जाएगा जो मंगल ग्रह के मौसम का अध्ययन कर यह जानकारी हासिल करेगा कि मंगल के हालात इंसान को कैसे प्रभावित कर सकते हैं. इसमें तापमान, वायुदाब, हवा, रेडिएशन, धूल, आदि की जानकारी और उसके प्रभावों का अध्ययन करेगा.

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और पानी की तलास में रिमफैक्स की मदद
मंगल का भूगर्भीय अध्ययन करने के लिए रिमफैक्स यानि राडार इमेजर फॉर मार्स सबसर्फेस एक्सपेरिमेंट (RIMFAX) भेजा जा रहा है जो वहां भूगर्भीय अध्ययन कर वहां जमीन के नीचे पानी की उपस्थिति की जानकारी देगा. यह अध्ययन मंगल पहुंचे इंसानों के लिए बहुत उपयोगी हो सकता है.
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