उदार यूरोपीय देश France अब मुस्लिमों को लेकर कौन सी सख्ती करने जा रहा है?

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इस्लामिक कट्टर पंथ से लड़ने की बात की
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इस्लामिक कट्टर पंथ से लड़ने की बात की

फ्रांस में इस्लामिक अलगाववाद (Islamic separatism in France) और कट्टरता के निपटने के लिए एक बिल आ रहा है. इसके तहत स्कूलों की पढ़ाई तक पर नजर रखी जाएगी ताकि बच्चों का ब्रेनवॉश न हो.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 3, 2020, 4:16 PM IST
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एक के बाद एक लगातार आतंकी हमले झेल रहा फ्रांस (terrorist attacks in France) अब सख्त हो रहा है. हाल ही में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों (French president Emmanuel Macron) ने इस्लामिक कट्टरपंथ से लड़ने की बात की. इसके लिए वे एक कानून लाने की बात कर रहे हैं, जो फ्रेंच इस्लाम (French Islam) के तौर पर देखा जा रहा है. यानी इस्लाम का फ्रांसीसीकरण. जानिए, क्या होगा इस बिल में और फ्रांस के मुस्लिम इससे किस तरह प्रभावित होंगे.

क्या करेगा ये बिल
राष्ट्रपति मैक्रों का कहना है कि कानून अगर बन जाए तो इसके कई फायदे होंगे. इसे सेपरेटिज्म बिल (Separatism bill) कहा जा रहा है. बिल की आउटलाइन फिलहाल जनता के सामने नहीं आई है लेकिन कई मुख्य बिंदुओं को लेकर फ्रांस का मुस्लिम समुदाय भड़का हुआ है. जैसे टीआरटी वर्ल्ड के मुताबिक इसके तहत फ्रांस में फ्रेंच इमाम ही होंगे और विदेश से सीखकर आने वाले या विदेशी लोगों को इमाम नहीं बनाया जा सकेगा, चाहे वो कितना ही जानकार क्यों न हो.

बच्चों के लिए समान शिक्षा
साथ ही इसके तहत उन स्कूल और शिक्षण संस्थानों को बंद करवाया जा सकेगा, जो शिक्षा के बहाने ब्रेनवॉश करते हैं. साथ ही साथ नए कानून के तहत होम-स्कूलिंग पर कड़े प्रतिबंध लगेंगे ताकि ऐसे स्कूलों में बच्चों का दाखिल न किया जाए जो नेशनल करिकुलम से अलग हो.



राष्ट्रपति मैक्रों का कहना है कि कानून बन जाए तो इसके कई फायदे होंगे


धार्मिक फंडों पर निगरानी
इसके अलावा फ्रांस में दूसरे देशों से धार्मिक संगठनों के लिए आने वाले फंड पर नजर रखी जा सकेगी. इससे आतंक पर काफी हद तक लगाम कसेगी. मैक्रों खुद कहते हैं कि हमें ये देखना होगा कि पैसे कहां से आते हैं, किसे मिलते हैं और क्यों दिए जाते हैं.

बिल को लेकर उत्साहित हैं मंत्री
द वॉल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक बिल अगले साल की शुरुआत में संसद में पेश किया जा सकता है. बीते 7 सितंबर को फ्रेंच मंत्रिमंडल के कई सदस्यों ने इस खबर की पुष्टि की थी कि बिल पर फाइनल काम जारी है और जल्द ही ये पूरा हो जाएगा. इस बिल में महिलाओं के साथ हिंसा पर भी काफी काम दिख सकता है. जैसे फ्रांस में ही एक खास समुदाय में शादी से पहले महिलाओं को वर्जिनिटी सर्टिफिकेट दिखाना होता है. बिल में इसपर कड़े कानून होंगे.

भाषा के जरिए धर्म प्रचार पर पाबंदी
इसके अलावा फ्रांस में विदेशी भाषाओं की पढ़ाई पर भी नजर रखी जाएगी. बता दें कि फ्रांस में ELCO प्रोग्राम के तहत विदेशी भाषा में पढ़ाई करवाई जाती है, जो अधिकतर किसी खास धर्म से संबंधित होती है. ये ठीक वैसा ही है, जैसे चीन अपने कन्फ्यूशियस संस्थानों के जरिए अलग-अलग देशों में अपनी पैठ जमा रहा है. तो अब फ्रांस ऐसे शिक्षण पर भी नजर रखेगा.

इसी साल की शुरुआत में फ्रांस ने विदेशी इमामों के आने पर रोक लगा दी


विदेशी इमामों के आने पर रोक
बिल के आने से पहले ही कई कदम उठाए जा रहे हैं. मिसाल के तौर पर इसी साल की शुरुआत में फ्रांस ने विदेशी इमामों के आने पर रोक लगा दी. मैक्रों ने प्रेस वार्ता कर कहा कि हमने 2020 के बाद अपने देश में किसी भी दूसरे देश से आने वाले मुस्लिम इमामों पर रोक लगा दी है. बता दें कि फ्रांस में हर साल करीब 300 इमाम दुनियाभर के देशों से आते हैं. इसकी वजह है कि फ्रांस में बड़ी मुस्लिम आबादी होना. यूरोप में सबसे ज़्यादा मुसलमान फ्रांस में रहते हैं. साल 2017 के प्यू रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार फ्रेंच मुस्लिम आबादी देश की कुल आबादी का लगभग 8.8% हिस्सा है, जो सबसे बड़ूी माइनोरिटी है.

शार्ली एब्दो पर हमला
लगभग दशकभर से फ्रांस में आतंकी हमले दिख रहे हैं. यही वजह है कि सरकार इस्लामिक कट्टरता को लेकर सख्त हो रही है. फ्रांस में व्यंग्य पत्रिका शार्ली एब्दो पर साल 2015 में आतंकी हमला हुआ था. हमले में एक पुलिसकर्मी समेत 12 लोग मारे गए थे, जिनमें फ्रांस के कई प्रमुख कार्टूनिस्ट शामिल थे. हमले की वजह ये थी कि पत्रिका ने पैगंबर मोहम्मद का एक कार्टून प्रकाशित किया था.

फ्रांस में व्यंग्य पत्रिका शार्ली एब्दो पर साल 2015 में आतंकी हमला हुआ था


उसी साल नवंबर 2015 में पेरिस पर हुए हमले ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया था. इसमें आतंकियों ने बड़े पैमाने पर गोलीबारी, आत्मघाती बम विस्फोट, और लोगों को बंधक बनाया था. हमले में 130 से ज्यादा लोग मारे गए. बाद में हमलों के हमलों के मास्टरमाइंड संदिग्ध मार गिराए गए. इन हमलों को ISIS ने अंजाम दिया था.

कई यूरोपियन देश साथ आ रहे
फ्रांस अकेला नहीं, जो इस्लामिक कट्टरता के खिलाफ बोल रहा है. स्कैंडिनेवियाई देशों में भी यही हाल है. डेनमार्क की ही बात लें तो Religion.dk ने साल 2018 में कहा था कि देश में 3 लाख 6 हजार मुस्लिम हैं. इस तरह से वे वहां की सबसे बड़ी माइनोरिटी आबादी है. इसमें से अधिकतर लोग मिडिल ईस्ट के आतंक से बचते हुए आए हैं. लेकिन अब वहां तेजी से मस्जिदें बन रही हैं और स्थानीय लोग भी नए धर्म को स्वीकार कर रहे हैं. यहां तक कि धर्मनिरपेक्ष डेनमार्क में मुस्लिमों के लिए अलग कानून की मांग हो रही है. अब ये देश परेशान हैं कि कैसे इस्लामोफोबिया का शिकार हुए बगैर वो धार्मिक हिंसा को रोकें.
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