नॉर्मल मैटर का बहुत सा हिस्सा था अनजान, वैज्ञानिकों ने FRB की मदद से ढूंढा उसे

नॉर्मल मैटर का बहुत सा हिस्सा था अनजान, वैज्ञानिकों ने FRB की मदद से ढूंढा उसे
एक समय ऐसा भी था कि अंतरिक्ष में एक भी तारा नहीं था. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

बहुत से लोगों को लगता है कि केवल डार्क मैटर (Dark Matter) ही वैज्ञानिकों के लिए रहस्य है, लेकिन हाल ही में वैज्ञानिकों ने FRB की मदद से लुप्त सामान्य पदार्थ (Missing Normal Matter)को ढूंढने में सफलता पाई है.

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नई दिल्ली: अभी तक वैज्ञानिक के मुताबिक पूरे ब्रह्माण्ड के पदार्थ का 15 प्रतिशत हिस्सा ही सामान्य पदार्थ (Normal Matter) से बना है. लेकिन बहुत ही कम लोग यह जानते हैं कि अभी तक वैज्ञानिक उस 15 प्रतिशत सामान्य हिस्से का आधा भी पता नहीं लगा सके थे. लेकिन हाल ही में तीव्र रेडियो प्रस्फोट (fast radio bursts) यानि एफआरबी (FRB) की मदद से वे इस लुप्त पदार्थ (missing matter) बारे में पता लगाने में कामयाब हो गए है.

लंबे समय से खोजा जा रहा था इसे
हाल ही में नेचर में प्रकाशित एक शोध में इस बारे में विस्तार से जानकारी दी है. इसके मुताबिक शोधकर्ताओं ने तारों और गैलेक्सी के बीच स्थित सभी प्रकार के सामान्य पदार्थ के बारे में पता कर लिया है. शोधकर्ता लंबे  समय से खोए हुए पदार्थ के रहस्य पर काम कर रहे थे.

एफआरबी का किया उपयोग



इस खोज के लिए शोधकर्ताओं ने रहस्मयी तीव्र रेडियो प्रस्फोट (fast radio bursts)  का उपयोग किया. इस शोध के प्रमुख लेखक और इंटरनेशनल सेंटर फॉर रेडियो एस्ट्रोनॉमी रिसर्च की कर्टिन यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर जीन पियरे मैक्कार्ट का कहना है कि खगोलविद इस लुप्त पदार्थ की खोज पिछले 30 सालों से कर रहे थे.



क्या थी शर्मिंदगी
मैक्कार्टने कहा, “बिगबैंग के आंकड़ों से हम जानते थे कि ब्रह्माण्ड की शुरुआत से कितना पदार्थ था, लेकिन जब हमने वर्तमान ब्रह्माण्ड को देखा तो जितना होना चाहिए था, हम उसका आधा भी नहीं पता कर पाए. यह एक तरह की शर्मिंदगी थी. गैलेक्सी के बीज की जगह काफी कम और बिखरी है. यह बिलकुल वैसे ही है जैसे एक ऑफिस के औसत आकार के कमरे में एक दो अणुओं को होना. इसलिए परंपरागत टेलीस्कोप और तकनीक से इसके बारे में पता लगाना बहुत मुश्किल था.

Space
अंतरिक्ष में बहुत ही कम समय के लिए होने वाली घटना है FRB (प्रतीकात्मक फोटो)


क्या होती हैं ये एफआरबी
शोधकर्ताओं ने  इस लुप्त पदार्थ (missing matter) का पता एक परिघटना के जरिए लगाया जिसे तीव्र रेडियो प्रस्फोट (Fast Radio Burst) या FRB कहते हैं. एफआरबी एक ऊर्जा की छोटी से चमक है जो आसमान से अलग-अलग दिशाओं से लेकिन केवल कुछ ही मिलीसेकंड के लिए आती है. वैज्ञानिकों को यह तो नहीं पता है कि ये कैसे पैदा होती हैं, लेकिन इतना पता है कि इनमें बहुत ही ज्यादा मात्रा में ऊर्जा की भूमिका होती है, जितनी की 80 साल तक एक सूर्य ऊर्जा देता है. इन्हें पकड़ पाना बहुत मुश्किल है क्योंकि खगोलविद नहीं जानते कि ये कब और कहां मिल सकती हैं.

कैसे किया एफआरबी का इस्तेमाल
प्रोफेसर माक्कार्ट का कहना है कि उनकी टीम ने तीव्र रेडियो प्रस्फोट को वजन तौलने वाले एक कॉस्मिक स्टेशन की तरह इस्तेमाल किया. तीव्र रोडियो प्रस्फोट से निकलने वाली किरणें किसी लुप्त पदार्थ से टकराकर उसकी तरह बिखरती हैं जिसतरह से सूर्य से आने वाला प्रकाश प्रिज्म से फैलता है. शोधकर्ता यह पता लगाने में सफल रहे हैं कि उन्हें ब्रह्माण्ड के धनत्व को मापने के लिए कितने एफआरबी की दूरी नापनी होगी. उन्हें लुप्त पदार्थ पता करने के लिए केवल छह एफआरबी चाहिए होंगे.

यह डार्क मैटर से अलग है


डार्कमैटर से अलग है पदार्थ
यहां जिस लुप्त पदार्थ की बात हो रही है. वह सामान्य पदार्थ है जैसे की प्रोटॉन्स और न्यूट्रॉन्स जिनसे तारे, ग्रह और इंसान बनते हैं. यह डार्क मैटर से पूरी तरह से अलग है जो अब भी पहेली है और पूरी ब्रह्माण्ड का 85 प्रतिशत पदार्थ है. यूसी सांता क्रूज के प्रोफेसर जे जेवियर प्रोचाश्का का कहना है कि अब तक विशालतम टेलीस्कोप से भी इस लुप्त पदार्थ को खोजने के वैज्ञानिकों के 20 साल के प्रयास विफल रहे थे. लेकिन एफबीआर की खोज और उनका सुदूर गैलेक्सियों में होना इस रहस्य को सुलझाने में मददगार रहा.

इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने CISRO के ऑस्ट्रलियन स्क्वायर किलोमीटर ऐरे पाथफाइंडर (ASKAP) रेडियो टेलीस्कोप की मदद ली जिसमें चांद से 60 गुना ज्यादा आकार के इलाके को देखने की क्षमता के साथ ही हाई रिजोल्यूशन तस्वीर लेने की भी क्षमता है. यानि यह बहुत ही सटीकता से उस गैलेक्सी की पहचान कर सकता है जहां से ये एफआरबी आ रही हैं. यह टेलीस्कोप एफआरबी को आसानी से रिकॉर्ड कर सकता है. टीम यह भी पता लगाने में सफल हुई कि यह एफआरबी कितनी दूर था और कैसे ब्रह्माण्ड में फैला.

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