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पद्मश्री शख्सियत: वो डॉक्टर जो असम में कैंसर रोगियों का बेहद सस्ता इलाज करता है

News18Hindi
Updated: January 28, 2020, 4:31 PM IST
पद्मश्री शख्सियत: वो डॉक्टर जो असम में कैंसर रोगियों का बेहद सस्ता इलाज करता है
डॉ. रवि कन्नन असम के बराक घाटी के इलाके में कैंसर रोगियों का लंबे समय से इलाज कर रहे हैं.

डॉ. रवि कन्नन (Dr. Ravi Kannan) तमिलनाडु के रहने वाले हैं. वो कई वर्षों से असम में कैंसर पीड़ितों की नि:स्वार्थ भाव से सेवा कर रहे हैं. उन्हें इस साल पद्मश्री पुरस्कार (Padma Shri) से नवाजा गया है.

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  • Last Updated: January 28, 2020, 4:31 PM IST
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इस साल के पद्म पुरस्कारों की घोषणा की जा चुकी है. विभिन्न क्षेत्रों के दिग्गजों को पद्मश्री, पद्मभूषण और पद्मविभूषण पुरस्कारों से नवाजा गया है. इस बार एक ऐसे डॉक्टर को भी पद्मश्री पुरस्कार से नवाजा जाएगा जो वर्षों से शांत रहकर भारत के दूरस्थ कोने में कैंसर रोगियों की सेवा कर रहा है. इनका नाम है डॉ. रवि कन्नन.

असम की बराक घाटी
भारत और बांग्लादेश के बॉर्डर से लगा असम का एक इलाका है बराक घाटी. इस इलाके का नाम असम की मशहूर नदी बराक के नाम पर पड़ा है. ये इलाका चाय बागानों के लिए मशहूर है. ये इलाका सिल्चर घाटी के अंतर्गत आता है. इस क्षेत्र में तीन जिले पड़ते हैं-कछार, करीमगंज और हलाकांडी.

आजादी के कई दशक बाद भी ये इलाका मेडिकल की सुविधाओं से तकरीबन महरूम था. इलाज कराने के लिए राजधानी की गुवाहाटी जाना पड़ता था. राजधानी से इस इलाके की दूरी करीब 350 किलोमीटर है. इस इलाके में लोग तंबाकू उत्पादों का जमकर इस्तेमाल करते हैं. तंबाकू के इस्तेमाल से लोग कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी की चपेट में भी आ जाते हैं.

कैंसर की चपेट में ज्यादा संख्या में लोगों के आने केस को देखते हुए स्थानीय लोगों ने ही कैंसर अस्पताल की शुरुआत करने के प्रयास किए. इसमें सरकार ने भी मदद की औरल साल 1996 में यहां एक छोटे अस्पताल की शुरुआत हुई. लेकिन मुश्किलें बहुत बड़ी थीं और सबसे बड़ी मुश्किल थी फंड की. करीब 10 साल बाद इस अस्पताल में पहली रेडियेशन मशीन लग पाई. लेकिन इस अस्पताल की वास्तविक किस्मत तब खुली जब यहां 2007 डॉक्टर रवि कन्नन पहुंचे.

बराक स्थित कैंसर अस्पताल की तस्वीर.
बराक स्थित कैंसर अस्पताल की तस्वीर.


परिवारवाले नहीं थे तैयारएक वेबसाइट को दिए इंटरव्यू रवि कन्नन ने बताया था कि जब उन्हें इस अस्पताल में काम करने ऑफर मिला तब परिवार वाले तैयार नहीं थे. तब कन्नन चेन्नई के आदयार कैंसर अस्पताल में मशहूर डॉक्टर हुआ करते थे. कन्नन के मुताबिक उन्होंने अपनी पत्नी को बराक घाटी जाने के लिए मनाया और फिर वहां पहुंच गए.

इसके बाद उन्होंने अस्पताल के काम करना शुरू कर दिया. इस दौरान उनकी पत्नी और बेटी ने स्थानीय लोगों से घुलना-मिलना शुरू कर दिया जिससे लोग उनसे आसानी के साथ अपनी परेशानियां कह सकें.

आसान नहीं था शुरुआतरी सफर
शुरुआत में कन्नन और उनके परिवार के लिए इस इलाके में रचना-बसना आसान नहीं था. मूल से रूप से तमिलनाडु के रहने वाले कन्नन और उनके परिवार के यहां मौसम, भाषा, लोग बिल्कुल अलग थे. कन्नन के मुताबिक परेशानियां सिर्फ इतनी ही नहीं थी. पहले दिन से ही उन्हें अस्पताल में स्टाफ की कमी से लेकर फंड, मशीन सभी बातों के जूझना था.

लेकिन वक्त गुजरने के साथ कन्नन लगातार रहे और जिस अस्पताल में 2007 में सिर्फ 23 स्टाफ था वहां आज 200 से ज्यादा स्टाफ हैं. 25 बेड के अस्पताल से अब यह 100 बेड का अस्पताल बन चुका है.

बराक घाटी का इलाका.
बराक घाटी का इलाका.


ये सिर्फ रवि कन्नन की मेहनत का नतीजा है कि एक छोटा अस्पताल आज बड़े कैंसर हॉस्पिटल में तब्दील हो चुका है. वर्तमान समय में अस्पताल में हर साल 3000 से 14000 हजार तक मरीज आते हैं. इस अस्पताल में अब दूसरे राज्यों से मरीज भी इलाज कराने आते हैं. इसका एक कारण ये भी है कि इस अस्पताल में कैंसर का इलाज का खर्च बहुत कम है. अब अस्पताल को कई जगहों से फंड प्राप्त होता है. साल 2011 में इंडो अमेरिकन कैंसर एसोसिशन ने अस्पताल में एक नया डिपार्टमेंट खुलवाने में मदद की थी. इलाज के जरूरी दवाएं भी अस्पताल ही मुहैया कराता है. ये दवाएं बहुत कम दाम पर दी जाती हैं. कुछ स्वयंसेवी संस्थाओं की मदद से अब यहां पर एक उम्दा आईसीयू यूनिट भी शुरू की जा चुकी है. अस्पताल अब एक नया ब्लड बैंक खोलन की तैयारी भी कर रहा है. जिसकी परमिशन मिलना बाकी है.
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First published: January 28, 2020, 4:06 PM IST
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