देश में इस रूट से हर साल होती है बड़े पैमाने पर गोल्ड स्मगलिंग

भारत के कई राज्यों और कई जगहों पर सोने की खदान मिलने की अपार संभवनाएं हैं.

भारत के कई राज्यों और कई जगहों पर सोने की खदान मिलने की अपार संभवनाएं हैं.

सोने के दाम अब तक के अपने सर्वोच्च बिंदू पर पहुंच गए हैं. सोमवार को दिल्ली सर्राफा बाजार में सोने का भाव 41,010 रुपये से बढ़कर 41,730 रुपये हो गया. सोना मंहगा होने के बाद इसकी तस्करी की आशंका फिर बढ़ गई है. जानते हैं कि भारत में अब भी कैसे गोल्ड की स्मगल होकर आ रहा है.

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भारत में सोने की कीमते रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई है. इसके बाद सोने की तस्करी (Gold Smuggling in India) की आशंका भी बढ़ गई है. ये कोई नई बात नहीं है लेकिन ये इतने बड़े पैमाने पर होती है कि आप हैरान हो सकते हैं. अप्रैल से जून 2019 के बीच भारतीय कस्टम विभाग (Customs Department) ने करीब 1198 किलोग्राम सोना पकड़ने का जारी किया. ये पिछले साल के इसी समय के हिसाब से 23.2 फीसदी ज़्यादा है. आखिर देश में सोने की तस्करी का कारोबार (Smuggling Statistics) कितना बड़ा है और कैसे होता है.

सोने के कारोबारियों (Gold Business) के हवाले से ​खबरें हैं कि सोने के मामले में दुनिया के दूसरे सबसे बड़े उपभोक्ता भारत में सोने के आयात (Gold Import) पर 12.5 से 15.5 फीसदी तक टैक्स देना पड़ता है, इसलिए सोने की तस्करी को बढ़ावा मिला है. वहीं, कस्टम और डीआरआई (DRI) की मानें तो मध्य पूर्व से सोने की तस्करी के मामले ज़्यादा हैं क्योंकि मध्य पूर्व (Middle East) और भारत में सोने की कीमतों में अंतर है, जिससे तस्करों को सीधा मुनाफा होता है. आइए, पूरी कहानी सिलसिलेवार जानिए.

कितना बड़ा है सोने की स्मगलिंग का कारोबार?

2018-19 के वित्तीय वर्ष में आधिकारिक आंकड़ों के हिसाब से तस्करी किया जा रहा कुल 4 टन सोना देश भर में पकड़ा गया, जो पिछली साल करीब सवा तीन टन पकड़ा गया था, जिसकी कीमत 974 करोड़ रुपये बताई गई थी. ये तो है तस्करी किए जा रहे उस सोने की बात जो पकड़ा गया लेकिन भारत में कितना बड़ा है सोने की तस्करी का कारोबार, ये कैसे पता चलेगा?
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करीब 35 से 40 हज़ार करोड़ रुपये तक तस्करी का सालाना कारोबार नामुमकिन नहीं है. फाइल फोटो.

डीआरआई के हवाले से इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट में लिखा गया कि ज़ब्त सोना कुल तस्करी का ज़्यादा से ज़्यादा 10 फीसदी तक होता है. यानी 9 हज़ार करोड़ रुपये की कीमत के करीब 33 टन सोने की तस्करी का अनुमान 2017-18 के वित्तीय वर्ष में था. वहीं, न्यूज़18 की खबर में वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के हवाले से दर्ज है कि 2018 में भारत में 95 टन सोने की तस्करी हुई. गोल्ड रिफाइनरी व मिंट्स की भारतीय संस्था के आंकड़ों के मुताबिक इससे दोगुनी तस्करी हुई. यानी कोई पुष्ट आंकड़ा नहीं है, लेकिन एक अनुमान लगाया जाए तो करीब 35 से 40 हज़ार करोड़ रुपये तक तस्करी का सालाना कारोबार नामुमकिन नहीं है.



कैसे होती है तस्करी?

सोना की तस्करी आमतौर से बिस्किट के रूप में ही होती रही है, लेकिन समय के साथ कई तरकीबें अपनाई गई हैं. कम क्वांटिटी में तस्करी के लिए कैरियर सोने के बिस्किट निगलने की ट्रिक अपना चुके हैं. हिंदू की एक रिपोर्ट के मुताबिक सोने का अन्य रसायनों के साथ एक लेप शरीर पर लगाकर भी तस्करी की कोशिश की जा चुकी है. दूसरी बात है रूट या नेटवर्क. ताज़ा ट्रेंड्स बताते हैं कि मध्य पूर्व और भारत के बीच सोने की तस्करी काफी बढ़ी है क्योंकि मध्य पूर्व में सोने की कीमतें भारत की तुलना में 4 हज़ार रुपये तोला तक कम हैं. तस्करी के कैरियर को प्रति तोला 1 हज़ार रुपये देने के बाद भी 3 हज़ार रुपये प्रति तोला तस्कर को सीधा मुनाफा होता है.

म्यांमार का क्लासिक तस्करी रूट

उत्तर पूर्व के चार राज्यों से म्यांमार की सीमा सटी है, जिस पर बड़े इलाके में कोई खास चौकसी का इंतज़ाम भी नहीं है. ईटी की रिपोर्ट की मानें तो म्यांमार में भी सोने की कीमत प्रति तोला 5 हज़ार रुपये तक भारत की तुलना में कम है. इसलिए यहां से तस्करी लंबे समय से हो रही है. कस्टम और डीआरआई के अफसरों के हवाले से खबर के मुताबिक म्यांमार के मोरेह से तस्करी शुरू होती है और सोना पहले इम्फाल पहुंचता है. कई हाथों से होकर पहुंचे इस सोने को इम्फाल से नागालैंड के दीमापुर और असम के सिलचर भेजा जाता है. इसके बाद रेल या स्थानीय हवाई यात्राओं के ज़रिए ये दिल्ली, कलकत्ता जैसे शहरों तक डिलीवर किया जाता है.

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म्यांमार के रास्ते से आने वाले सोने को सबसे ज़्यादा 99.76फीसदी तक शुद्ध बताया जाता है. फाइल फोटो.

गोल्ड स्मगलिंग के और आंकड़े

- दुनिया में जिन चीज़ों की सबसे ज़्यादा तस्करी होती है, सोना उनमें पांचवे नंबर पर है.

- 2013 में एक रिपोर्ट में कहा गया था कि भारत में हर दिन 700 किग्रा सोने की तस्करी होती है. 2013 के मुकाबले अब तस्करी के आंकड़े करीब 10 गुना बढ़ चुके हैं.

- भारत में सोने की तस्करी नेपाल, भूटान, बांग्लादेश के साथ ही मध्य पूर्व से जुड़ने वाले पश्चिमी मार्गों के ज़रिए होती है.

- म्यांमार के रास्ते से आने वाले सोने को सबसे ज़्यादा 99.76फीसदी तक शुद्ध बताया जाता है. टीओआई की रिपोर्ट की मानें तो भारत से मध्य पूर्व जो सोना निर्यात किया जाता है, वो ज़्यादातर म्यांमार से तस्करी हुआ सोना ही होता है.

म्यांमार क्यों बन गया तस्करी का रूट?

लंबे समय से उत्तर पूर्व भारत के राज्यों में सशस्त्र बलों और उग्रवादियों के बीच जंग का माहौल था, लेकिन पिछले करीब 10 सालों में यहां हालात बदले. एक तरह से हथियारों की तस्करी कम होते होते लगभग ठप हो गई, लेकिन तस्करी के वो रूट्स बचे रहे. कस्टम, डीआरआई और इं​टेलिजेंस के ​जानकार मानते हैं कि इन रूट्स से ही सोने की तस्करी बढ़ गई है. दूसरी बात ये कि भौगोलिक स्थिति के लिहाज़ से म्यांमार थाईलैंड, चीन के साथ ही पूर्वी एशिया के साथ भी जुड़ता है इसलिए ये तस्करी का काफी मुफीद इलाका बन चुका है, जो सिर्फ सोना ही नहीं बल्कि ड्रग्स की तस्करी के लिए भी कुख्यात हो रहा है.

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