बैग पैक कर लीजिए जल्द ही मिल सकता है इस ग्रह पर रहने का मौका

बैग पैक कर लीजिए जल्द ही मिल सकता है इस ग्रह पर रहने का मौका
वैज्ञानिकों का मानना है कि इस ग्रह पर पानी मौजूद है

इस ग्रह के चारों ओर बर्फ की परत की बात सामने आई है, इससे वैज्ञानिक अनुमान लगा रहे हैं कि वहां जीवन हो सकता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 15, 2018, 8:43 PM IST
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धरती के सबसे पास के एक सौरमंडल में 'सुपर अर्थ' मिला है. हालांकि इसके सौरमंडल की बनावट हमारे सौरमंडल से काफी अलग है. साथ ही यह पृथ्वी जैसा ग्रह, पृथ्वी से बड़ा है लेकिन वरुण जैसे ग्रह से आकार में छोटा भी है. यह अपने कम चमकने वाले सूर्य से भी दूर है. वैज्ञानिकों को आशा है कि इस ग्रह के चारों ओर बर्फ की परत हो सकती है या फिर इसपर पानी हो सकता है.

लेकिन जमा हुआ यह सुपरअर्थ दूसरा ऐसा ग्रह है जो पृथ्वी के सबसे नजदीक है.  वह दिन ज्यादा दूर नहीं है जब ऐसे टेलीस्कोप विकसित कर लिए जाएंगे कि ऐसे ग्रहों की सतहों पर क्या है, उसकी आसानी से तस्वीरें ली जा सकेंगी. जब ऐसा हो जाएगा तब कोई अचंभे की बात नहीं होगी कि हम यहां पर पहली नई दुनिया के निशान देखें.

नेचर पत्रिका में बुधवार को छपी रिपोर्ट को तैयार करने में सहायक कार्नेगी अंतरिक्षविज्ञानी जोहाना टेस्के ने इस बारे में बात करते हुए कहा, "हम अब साइंस फिक्शन से साइंस रिएलिटी की ओर बढ़ रहे हैं.



इस सौरमंडल के सूर्य का नाम बर्नाड तारा है. जो कि हमारे सौरमंडल का सबसे निकटवर्ती पड़ोसी है. इससे ज्यादा पास केवल एक ही तारा है जिसका नाम ट्रिपलेट तारा है. जो अल्फा सेंचुरी सिस्टम का भाग है, जो कि दक्षिणी आसमान में दिखता है. इन तारों में से एक है प्रोक्सिमा सेंचुरी. जिसके चारों ओर छोटे-छोटे ग्रह स्थित हैं. लेकिन इससे इतनी आग और हानिकारक रेडिएशन निकलता है कि इस तारे के इर्द-गिर्द जीवन का विकास मुश्किल ही लगता है.
इस पेपर के सह लेखक पॉल बटलर इसे महान सफेद व्हेल बताते हैं. यह सूर्य से केवल 6 लाइट इयर दूर है. 1970 में एक ब्रिटिश अंतरिक्षविज्ञानी ने स्टारशिप भेजकर एलियन का पता लगाने की बात कही थी. लेकिन उस वक्त किसी ऐसे ग्रह का पता नहीं था जिसपर स्टारशिप भेजकर जीवन का पता लगाया जा सके.

रेड ड्वार्फ तारा हमारे सूरज से 10 गुना छोटा है और नंगी आंखों से देखने के मामले में यह बहुत हल्का दिखाई पड़ता है. हालांकि इसके छोटे आकार के चलते इसके अध्ययन में मदद ही मिलती है. पिछले 20 सालों में वैज्ञानिकों के इससे जुड़े 800 अध्ययनों के आधार पर ये निष्कर्ष निकाले हैं.

करीब दो दर्जन संस्थानों के 50 से ज्यादा रिसर्चर इस प्रयास में शामिल रहे लेकिन धीरे-धीरे बहुत सी बातें समझ आने लगीं. नेचर पेपर में इस लेख के प्रमुख लेखक और कैटेलोनिया, स्पेन में इंस्टीट्यूट ऑफ स्पेस स्टडीज के डायरेक्टर इग्नासी रिबास ने यह बात कही.

यह ग्रह अपने सूर्य का चक्कर 233 दिनों में पूरा कर लेता है. अभी तक बहुत कम ऐसे ग्रह पाए गए हैं, जो अपने सूर्यों से इतने दूर हैं. बर्नाड्स तारा इतना कम गर्म हैं कि इसके चारों ओर घूम रहे ग्रहों की सतह जमी हो सकती है.

यह बात इस ग्रह को रहने के लिए उपयुक्त जगह से थोड़ा बाहर रख देते हैं. लेकिन जहां जीवन के लिए उपयुक्त परिस्थितियां हैं. लेकिन उनका मानना है कि बहुत छोटे जीव इस स्थिति में भी वहां हो सकते हैं. अगर किसी ग्रह पर पानी है और अगर वहां जीवन के लिए उपयुक्त तत्व मौजूद हैं, बहुत संभव है कि बर्फ की परत के नीचे भी जीवन पल रहा हो.

हालांकि पूरी तरह से इस बात पर सहमत नहीं हैं वैज्ञानिक
फिर भी अभी बर्नाड्स तारे के बारे में बहुत कुछ अनिश्चित बना हुआ है. अंतरिक्षविज्ञानी अभी भी इस बात पर बहुत सहमत नहीं हैं कि बर्फ ही हो, उनका मानना है कि यह गैस या पत्थर जैसी चीज भी हो सकती है. जैसा वरुण ग्रह के साथ है. यह ग्रह धरती से करीब करीब तीन गुना बड़ा है. लेकिन यह और भी बड़ा हो सकता है.

वे इस बात पर भी 100 फीसदी सहमत नहीं हैं कि ग्रह वहीं होगा. हो सकता है कि ग्रहों की दूरी की गणना में होने वाली एक गलती के चलते जहां इसका अनुमान किया जा रहा है उससे थोड़ा दूर हो सकता है. ऐसे में माना जा सकता है कि यह ग्रह जीवन की संभावना के लिए एक सही कैंडिडेट है, भले ही वहां जीवन हो या नहीं.

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