#FullProof: क्या गोमूत्र पीने से सच में खत्म हो जाता है कैंसर?

भारत में कैंसर के इलाज को लेकर काफी समय से एक चर्चा सुनने में आती है. दावा किया जाता है कि कैंसर जैसी भयावह बीमारी का इलाज गो-मूत्र में छिपा है.

News18India
Updated: July 22, 2019, 3:48 PM IST
#FullProof: क्या गोमूत्र पीने से सच में खत्म हो जाता है कैंसर?
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Updated: July 22, 2019, 3:48 PM IST
कैंसर. यह शब्द सुनते ही आपके जेहन में क्या तस्वीर बनती है. एक खतरनाक और जानलेवा बीमारी, जिसका इलाज मुश्किल और मंहगा है. कैंसर कितनी खतरनाक बीमारी है इसका अंदाजा डब्लूएचओ की कैंसर से जुड़ी रिपोर्ट से लगा सकते हैं. इस रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया की हर छठी मौत कैंसर से होती है. साल 2018 में 9.6 मिलियन लोगों की मौत की वजह कैंसर बना.

रिपोर्ट से साफ है कि एक वक्त तक लाइलाज बीमारी रहा कैंसर आज भी इलाज के बावजूद जानलेवा है. भारत में कैंसर के इलाज को लेकर काफी समय से एक चर्चा सुनने में आती है. दावा किया जाता है कि कैंसर जैसी भयावह बीमारी का इलाज गो-मूत्र में छिपा है. सोशल मीडिया गो-मूत्र से कैंसर के इलाज के दावों से अटा पड़ा है. जब हर रोज कैंसर से निदान के लिए दुनियाभर में नई- नई रिसर्च सामने आ रही हैं. ऐसे में गोमूत्र के जरिये कैंसर के इलाज के दावे में क्या सच्चाई है. एक्सपर्ट इस दावे के बारे में क्या कहते हैं, आइये जानते हैं.

क्या है एक्सपर्ट की राय
मेडिकल एंड पीडियाट्रिक ऑन्कॉलजी के एसोसिएट प्रोफेसर वेंकटरमन राधाकृष्णन ने इस दावे के बारे में बहुत कुछ साफ किया. Quora में इस सवाल से जुड़े पोस्ट में उन्होंने इसका जवाब दिया. उन्होंने इस पोस्ट में कहा कि गोमूत्र पीने से कैंसर का इलाज संभव नहीं है. मैंने और मेरे साथी ऑन्कॉलजिस्ट ने अभी तक एक भी ऐसा मरीज़ नहीं देखा जिसने सिर्फ गोमूत्र पिया हो और उसे कैंसर जैसी बीमारी से निदान मिल गया हो.

इंसानों के मूत्र जैसा ही होता है गोमूत्र
राधाकृष्णन ने लिखा कि गोमूत्र में ऐसा कोई तत्व नहीं होता जो कैंसर को खत्म कर सके. गोमूत्र आदमी के मूत्र से अलग नहीं है. इसमें 95 फीसदी पानी के अलावा पोटेशियम, सोडियम, फास्फोरस और क्रेटिनिन जैसे खनिज होते हैं. इनमें से कोई भी कैंसर-रोधी तत्व नहीं है. गोमूत्र खेतों में डालने वाली चीज है ताकि उन्हें उपजाऊ बनाया जा सके, न कि इसे बोतल में भरकर कैंसर की दवा के रूप में बेचना चाहिए.

दिल्ली में ऑन्कॉल्जिस्ट डॉ. अमित अग्रवाल ने कहा कि बिना प्रयोग और उसकी सफलता के किसी चीज़ को कैंसर का इलाज नहीं माना जा सकता. कैंसर का इलाज अभी कीमोथिरैपी ही है.
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मेडिकल के क्षेत्र में 20 साल का अनुभव रखने वाले डॉ. अमित का कहना है कि मेरे साथी डॉक्टर भी कैंसर जैसे इलाज के लिए किसी वैकल्पिक इलाज का प्रयोग करने से बचते हैं क्योंकि इसमें काफी खतरा होता है.

क्या कहती है सरकारी संस्था नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट (NCI)
आपको बता दें कि कैंसर पर रिसर्च करने वाली सरकारी संस्था नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट (NCI) कहती है कि हर्बल चीजों से कैंसर ठीक होने की धारणा गलत है . कई बार हर्बल चीजों की वजह से ही कैंसर और भी बिगड़ सकता है, क्योंकि वह रेडियोथेरेपी और कीमोथैरेपी  पर असर डाल सकती है.

साध्वी प्रज्ञा ने भी गोमूत्र से कैंसर ठीक होने का किया था दावा
लोकसभा चुनावों के बीच साध्वी प्रज्ञा ने भी गोमूत्र से खुद का कैंसर ठीक होने का दावा किया था. उस वक्त उनके बयान ने काफी सुर्खियां बटोरी थीं. मशहूर वरिष्ठ ब्रेस्ट ऑन्को सर्जन और मुंबई स्थित टाटा मेमोरियल सेंटर के डायरेक्टर डॉ. राजेंद्र बाडवे ने साध्वी को खारिज किया था. उन्होंने कहा था कि ऐसा कोई प्रमाण नहीं है कि गोमूत्र या इस तरह की दूसरी चीजों से कैंसर का इलाज संभव है. प्रज्ञा ने दावा किया था कि 2010 में उन्हें ब्रेस्ट कैंसर हुआ था जब वह महाराष्ट्र एटीएस की कस्टडी में थीं. जेजे अस्पताल में तत्कालीन डीन डॉ. जेपी लहाने ने मुंबई मिरर से बातचीत में कहा है कि इस बात के कोई प्रमाण नहीं हैं कि प्रज्ञा को कैंसर था.

पिछले साल गोमूत्र से कैंसर के इलाज का दावा जूनागढ़ विश्वविद्यालय के बायोटेक्नॉलॉजी वैज्ञानिकों ने भी किया था. उनका दावा था कि वो गोमूत्र से कैंसर का इलाज करने में सफल हो गए हैं. हालांकि उनके इस दावे की पुष्टि वास्तविक वैज्ञानिक जांच से अब तक नहीं हुई है.

जानिए क्या है कैंसर पीड़ित मैरी लोपेज की कहानी
कुछ अरसे पहले यू ट्यूब पर मैरी लोपेज नाम की महिला ने शाकाहार के जरिये कैंसर के इलाज का दावा किया था. मैरी लोपेज अपने वीडियो में कहती रहती थीं शाकाहार अपना कर ब्रेस्ट कैंसर को खत्म कर देंगी. जब उनको सबसे ज्यादा कीमोथेरेपी की जरूरत थी, तब उन्होंने शाकाहार से कैंसर खत्म करने की धारणा पर यकीन किया. नतीजा ये हुआ कि कैंसर के चलते उनकी मौत हो गई. मैरी लोपेज को जब अहसास हुआ कि कैंसर अब उनकी जान ले लेगा तब उन्होंने यू-ट्यूब से शाकाहार से कैंसर के इलाज के दावे वाले खुद के वीडियो को हटाने की बात कही थी. इस कहानी का सबक ये है कि मैरी लोपेज की बेशकीमती जान बच सकती थीं, अगर वह मिथकों पर विश्वास करने के बजाय कैंसर का इलाज करतीं.

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First published: July 22, 2019, 3:19 PM IST
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