ब्लैक फंगस नहीं थी कोविड-19 की दूसरी लहर के दौरान फैली बीमारी

अप्रैल मई में फैला फंगल संक्रमण म्यूकरमाइकोसिस (Mucormycosis) तो था, लेकिन ब्लैक फंगस नहीं था(प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

अप्रैल मई में फैला फंगल संक्रमण म्यूकरमाइकोसिस (Mucormycosis) तो था, लेकिन ब्लैक फंगस नहीं था(प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

कोविड-19 (Covid-19) महामारी की दूसरी लहर के दौरान फंगस के कारण फैली बीमारी म्यूकरमाइकोसिस (Mucormycosis) थी, ब्लैक फंगस (Black Fungus) नहीं थी.

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(डॉ चंद्रकांत लहरिया) यदि ब्लैक फंगस (Black Fungus) में भावनाएं होती तो वह भी बहुत दुखी होता. पिछले महीने ज्यादातर समय ब्लैक फंगस को म्यूकरमाइकोसिस (Mucormycosis) नाम की ऐसी बीमारी के लिए जिम्मेदार माना गया जो वास्तव में उसने फैलाई ही नहीं. कोविड-19 (Covid-19) की दूसरी लहर काफी नहीं थी जो मई के शुरुआत में ही नए बीमारी के लक्षण की खबरें आने लगी जिसमें बुखार, सरदर्द, खांसी, दर्द, आंखों और  नाक में लालिमा  सांस लेने में तकलीफ, नाक में कालापन, मानसिक स्थिति में बदलाव जैसे कि भ्रम या चीजों को भूलना, यहा तक कि खून की उल्टियां जैसे लक्षण शामिल थे. इन लक्षणों से बहुत से कोविड-19 मरीज पीड़ित थे.

ब्लैक फंगस नहीं था वजह

यह तय करना मुश्किल है कि क्या यह नाक के ऊपर काले रंग की वजह से था या बीमारी या उससे एजेंट की वजह  होने वाली फफूंद की कॉलोनी के बीच कल्चर मीडिया के ऊपर काले धब्बों का दिखाई देने की वजह से था. हकीकत यह है कि फफूंद का संक्रमण होने के बाद भी यह ब्लैक फंगस की वजह से नहीं हुआ था. भारत में कोविड-19 की दूसरी लहर के बीच म्यूकरमाइकोसिस है जिसे जायकोमाइकोसिस भ कहता है जो फफूंद के समूह द्वारा होता है जिसे म्यूकरमाइसिटीस कहते हैं.

  • क्या होते हैं फफूंद

    फफूंद या कवक एक तरह के सूक्ष्मजीवी होते हैं  जिसमें खमीर से लेकर मशरूम तक सभी बैठे होते हैं. जैविक वर्गीकरण के अनुसार इन्हें पौधे, जानवर, प्रोटोजोआ आदि से  अलग श्रेणी में रखा गया है. कवक बहुत ही अलग किस्म के जीव होते हैं. इनमें से ज्यादातर हानिकारक नहीं होते हैं और हमारे आसपास बहुतायत में पाए जाते हैं. एक स्वस्थ्य मानव की शरीर प्रतिरक्षा प्रणाली इन फफूंदों से पैदा होने वाली बीमारियों से लड़ने के लिए पर्याप्त रूप से सक्षम होती है.


  • ब्लैक फंगस और म्यूकरमाइसिटीस में क्या अंतर होता है.

    ब्लैक फंगस को काला खमीर भी कहता है. यह धीरे पपनता है ओर रंग पैदा करने वाला फफूंद होता है. इनसे बहुत ही कम संभावना होती है कि कोई रोग हो और ये रोग त्वचा या सांस के जरिए होते हैं. ये रोग खास तौर पर उन लोगों में होते हैं जो पहले से ही सिस्टिक फाइब्रोसिस जैसे स्थिति से गुजर रहे होते हैं. म्यूकरमाइसिटीस, कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर में एक संक्रमण का कारक फफूंद है. इनमें चेहरे और नाक में संक्रमण फैलाने की क्षमता होती है. लेकिन इसके अलावा वे पेट और दिमाग तक को संमक्रमित कर सकते हैं.


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    दूसरी लहर के शुरु में ही म्यूकरमाइकोसिस को ब्लैक फंगस (Black Fungus) कहा जाने लगा था. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)


  • म्यूकरमाइकोसिस कितनी बड़ी समस्या है

    कोविड-19 महामारी से पहले म्यूकरमाइकोसिस संक्रमण की दर हर साल एक लाख लोगों में 14 की थी. कुछ अध्ययन बताते हैं कि जुलाई 2020 से दिसंबर 2020 तक भारत में म्यूकर माइकोसिस के मरीजों की संख्या  कुछ बढ़ी थी. लेकिन दूसरी लहर में भारत में इसकी संख्या तेजी से बढ़ी और 11 हजार मामले सामने आ गए. इसके बाद म्यूकरमाइकोसिस को एक महामारी घोषित कर दिया गया.


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  • क्या हर कोविड-19 मरीज को म्यूकरमाइकोसिस का जोखिम है?

    इसे ऐसे देखें. एक अप्रैल और 31 मई के बीच में भारत में 1.6 करोड़ लोगों को कोविड हुआ. इस दौरान म्यूकरमाइकिसिस के मामले करीब 11 हजार थे. साफ है कि म्यूकरमाइकोसिस मामलों की संख्या कुल कोविड मामलों की संख्या के मुकाबले केवल एक छोटी संख्या है. लेकिन यह  बीमारी जब कोविड-19 के मरीजों में होती है तब और ज्यादा घातक होती है. जिसमें मृत्यु दर 50 प्रतिशत तक कही है. यही वजह है कि इसे महामारी घोषित किया गया है जिससे इस पर तेजी से काम हो सके. म्यूकरमाइकोसिस को गलती हे ब्लैक फंगस कहा गया है. इसने लोगों में एक खौफ पैदा कर दिया है. लेकिन हमें यह याद रखने की जरूरत है कि हर व्यक्ति जो कोविड संक्रमित है उसमें यह बहुत कम होने वाले संक्रमण के पैदा होने का जोखिम नहीं होता.


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    ब्लैक फंगस (Black Fungus) के अलावा कई और रंग के फंगस के नाम भी इससे जोड़े गए हैं. (File photo)


  • तो म्यूकरमाइकोसिस संक्रमण होने का जोखिम किसे हैं?

    कुछ चुनिंदा तरह के लोगों को यह म्यूकरमाइकोसिस संक्रमण होने का ज्यादा जोखिम है. इनमें अनियंत्रित मधुमेह हो, जिनकी प्रतिरक्षा प्रणाली बहुत ही कमजोर हो, जो एचआईवी संक्रमित हों या कैंसर थैरेपी या स्टेरॉयड थैरेपी ले रहे हों, शामिल हैं. इनके अलावा जो लंबे समय से आईसीयू में हों, जिनमें पहले से ही डायबिटीज, हाइपरटेंशन और अन्य  समस्याएं हों जिनसे प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर हो जाती है, इस तरह के लोगों को भी यह संक्रमण हो सकता है.

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    यह भी समझने की जरूरत है कि स्टेरॉयड्स कोविड-19 प्रबंधन का हिस्सा है,खास तौर पर मध्यम और गंभीर मामलों में. लेकिन उनका लंबे समय तक या ज्यादा उपयोग मरीज में फंगल या फिर दूसरे तरह के संक्रमण का जोखिम बढ़ा देता है. स्टेरॉड्स खून में शुगर को कम कर नियंत्रित करते हैं यही वजह है कि ऐसे लोगों में यह संक्रमण होने की संभावना बढ़ जाती है.

  • म्यूकरमाइकोसिस की आशंका कब की जानी चाहिए?[/q]
    यह स्थिति कोविड-19 की मध्यम और गंभीर बीमारी में आम है. ऐसे स्थिति में घबराने की जरूरत नहीं हैं और स्वस्थ्य व्यक्ति या कोविड-19 के हलके लक्षणों वाले मरीजों में यह बीमारी बहुत ही कम पाई जाती है. फिर भी तैयारी के लिहाज से हमें उन लोगों को लिए सवाधान रहना होगा जिनमें ऊपर  बताए गए जोखिम हैं. कुछ चेतावनी भरे संकतों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए.

    - आंख या/और नाक के आसपास त्वचा लाल होना या दर्द होने, बुखार होना

    -नाक में किसी तरह की रुकावट या अटकने जैसे लगना, नाक से खून या काला निकलना, गाल

    - चेहरे  के एक  हिस्से में दर्द, सूजन आना.

    -नाक के ऊपर या आसपास कालापन छाना

    - दातों में दर्द होना , उनका ढीला होना, जबड़े में भी ऐसा महसूस होना.

    -आंखों में दर्द के साथ धुंधला या दो तरह दुखना, बुखार, त्वचा पर जखम, थर्मोबॉसिस, नेक्रॉसिस होना

    -सीने में दर्द, सांस लेने में तकलीफ, खून की उल्टी, श्वसन तंत्र में खराबी होना.

    - मानसिक स्थिति में बदलाव जैसे भ्रम या चीजों को भूलने लगना

    यदि इस तरहके कोई भी लक्षण आपमें दिखाई दे रहे हैं तो फौरन डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.


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    कोविड-19 के मध्यम से गंभीर लक्षण वाले मरीजों म्यूकरमाइकोसिस (Mucormycosis) का खतरा होता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


  • म्यूकरमाइकोसिस का उपचार क्या है?

    कुछ दवाइयां हैं, विशेषतौर पर एंटिफंगल एम्फोटोरिसिन बी, जो म्यूकरमाइकोसिस के उपचार में उपयोग में लाई जाती है. गंभीर मामलों में प्रभावित जगहों की सर्जरी की जरूरत हो सकती है. फिर भी खून में शुगर लेवल नियंत्रित रखना , स्टेरॉयड्स या दूसरे इम्यूनोसप्रैसैंट दवाओं का उपयोग कम करने की जरूरत है. एंटीफंगल थैरेपी की 406 हफ्तों तक जरूरत पड़ती है और मरीज को अस्पताल की देखभाल की जरूरत हो सकती है. मरीज को घर में देखभाल के प्रयास नहीं करना चाहिए.


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  • सावधानी ही उपचार है

    चूंकि हमने म्यूकरमाइकोसिस के बारे में पिछले कुछ हफ्तों में ही जाना है तो हमें संक्रमण रोकने के सारे उपाय करने चाहिए.मास्क पहनना बहुत जरूरी है खास तौर पर जब हम धूल भरे इलाके मे जाएं. ऐसा उनके लिए बहुत ही जरूरी है जो कोविड-19 की मध्यम से गंभीर बीमारी से हाल ही में ऊबरे हैं या जिनमें ऊपर बताए लक्षण दिख रहे हैं. जूते पहने, लंबे और पूरे पैंट पहनें, लंबी बांह की शर्ट, पहनें और गार्डनिंग करते समय ग्लब्स, जरूर पहनें. ब्लड शुगर लेवल कायम रखें और उसकी नियमित जांच कराएं. यह भी जरूरी है कि ज्यादा जोखिम वाले लोगों को चेतावनी संकेतों और लक्षणों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है.


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    कोविड -19 की तरह फंगल संक्रमण (Fungal Infection) में भी सावधानी बरतने की जरूरत है.


    सफेद, नारंगी और पीला फफूंद: भूल जाएं रंग
    फफूंद बहुत से रंगों में आती है. फफूंद का रंग मायने नहीं रखता है. और इसका बीमारी से गंभीरता से कोई लेना देना नहीं है.  इसलिए जब फफूंद संक्रमण से रंगों का संबंध बताया जा रहा था उसका कोई अर्थ नहीं था.

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  • अब आगे क्या?

    हमें जनस्वास्थ्य के नजरिए से मई 2021 में म्यूकरमाइकोसिस संक्रमितों की संख्या बढ़ने की पड़ताल करनी होगी. इसके लिए वैज्ञानिक और माहामारी के लिहाज से शोध की जरूरत है कि इसके संक्रमण इतनी तेजी से कैसे बढ़े. अब जब कोविड-19 की दूसरी लहर उतार पर है .ऐसे में म्यकरमाइकोसिस के मामलों में भी कमी आएगी. हमें खुद को सही जानकारी से सशक्त करना होगा. याद रखें म्यूकरमाइकोसिस का जोखिम स्वस्थ्य लोगों में अन्य बीमारियों की तुलना में बहुत ही कम है. इसलिए घबराएं नहीं. यदि इसे जल्दी पहचान लिया जाए तो यह ठीक हो सकती है.

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