जानिए सेवाग्राम में हाथ जोड़कर सरकार से कौन सा निवेदन कर रहे हैं गांधी के वशंज

जानिए सेवाग्राम में हाथ जोड़कर सरकार से कौन सा निवेदन कर रहे हैं गांधी के वशंज
वर्धा (Wardha) के इस सेवाग्राम (Sevgram) में गांधी जी ने आखिरी 12 साल गुजारे थे और उनके लगवाए पेड़ ही काटे जा रहे हैं. (फाइल फोटो)

महाराष्ट्र के वर्धा (Wardha) में गांधी जी (Gandhiji) के सेवाग्राम आश्रम (Sevagram Ashram) से वर्धा तक की सड़क के पास गांधी जी के लगवाए पेड़ (Trees) काटे जा रहे हैं जिसका विरोध गांधी जी के वंशज कर रहे हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 10, 2020, 6:56 AM IST
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इस समय पूरा देश महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) की 150 वां जन्म दिवस मनाने की तैयारी कर रहा है. गांधी जी का पर्यावरण संरक्षण (Conservation of Environment) के प्रति संकल्प जगजाहिर था लोग आज भी उनके पर्यावरण, वन और पेड़ों के संरक्षण के लिए किए प्रयासों को एक मिसाल मानते हैं. लेकिन महाराष्ट्र (Maharashtra) के वर्धा (Wardha) के सेवाग्राम आश्रम (Sevagram Ashram) में जहां गांधी जी ने अपने जीवन के अंतिम 12 साल गुजारे थे. वहीं के पेड़  (Trees) काटे जा रहे हैं.

बापू के वंशज लगा रहे गुहार
कोविड-19 के दौर में इस कार्य को रोकने के लिए कोई भी आवाज उठाने की स्थिति में न हो, लेकिन बुधवार को बापू के वंशजों सरकार से गुजारिश की है कि वर्धा-सेवाग्राम आश्रम रोड़ को पर्यटन के लिए चौड़ा करने के नाम पर वहां बचे हुए पेड़ न काटे जाएं.

किस-किसने की है अपील
जिन लोगों ने सरकार से अपील की है उसमें गांधी जी के पोते और पश्चिम बंगाल के पूरर्व गवर्नर गोपालकृष्ण गांधी, इतिहासकार राजमोहन गांधी, शांति कार्यकर्ता इला गांधी, सामाजिक राजनैतिक कार्यकर्ता अरुण गांधी और बापू के पड़पोते तुषार गांधी शामिल हैं.



गुरूवार को कांग्रेस नेता जयराम नरेश ने ट्विटर पर यह जानकारी शेयर की और शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे से इस मामले में दखल देने की अपील की.



हजारों गांववाले कर रहे थे विरोध
वर्धा और सेवाग्राम के लोगों ने उस सड़क के आसपास लेग 235 पेड़ों को बचाने के लिए सड़क पर उतर आए जिस सड़क से महात्मा गांधी मेगनवाड़ी में वर्धा से सेवाग्राम तक गए थे. लोग इस सड़क का नाम शांति पथ रखना चाहते हैं. करीब चार हजार ग्रामीणों और आश्रम के लोगों ने वर्धा कलेक्टर को एक हस्ताक्षरित पत्र दिया है जिसमें उन्होंने प्रशासन के इस कदम के खिलाफ कदम उठाने के लिए विरोध दर्ज कराया है. रक्षाबंधन के दिन महिलाओं ने इन पेड़ों को कटने से बचाने के लिए उन्हें राखी भी बांधी थी.

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केवल इतने काम से बच जाते पेड़
पेड़ बचाने वालों के लिए प्रयासरत लोगों का कहना है कि सड़क की चौड़ाई केवल एक ही मीटर कम करने से सभी पेड़ बच जाएंगे  जिन्हें गांधी और कस्तूरबा के निर्देश पर आश्रमवासियों ने लगाया था और उन्हें सींच कर बड़ा किया था. यह तब की घटना है जब गांधी और कस्तूरबा विदर्भ में पानी की कमी के दौरान सेवाग्राम आश्रम आए थे. गांधी इस सेवाग्राम में 1936 से 1948 तक रहे थे. उस समय अंग्रेजों के खिलाफ स्वतंत्रता संग्राम के दौरान सभी बड़े नेता, यहां तक कि विदेशी हस्तियां भी गांधी जी से मिलने इसी सेवाग्राम में आया करते थे.

कोई नियम पालन नहीं और काट दिए पेड़
बताया जा रहा है कि इस मामले में किसी तरह के नियमों का पालन नहीं हुआ. पंचायतों के साथ मीटिंग, चार प्रभावित गांवों से एनओसी भी नहीं लिया. जब हजारों लोग विरोध करने उतरने तो सिवाय वादों के कुछ नहीं मिला. बल्कि कोविड-19 केदौर में  सैकड़ों भरे परे काट दिए गए.

Forest
वनों की कटाई (Deforestation) भारत में बढ़ती जा रही है जो एक बड़ी समस्या बन रही है.
(प्रतीकात्मक तस्वीर)


इन संगठनों ने भी की कोशिश
इस विरासत को बचाने में कई संगठन आए थे जिसमें सेवाग्राम आश्रम, गांधी स्मारक निधि, वृक्ष बचाओ नागरिक समिति मेगन संग्रहालय समिति, अब गांधी जी के वशंज, भी विरोध में शामिल हो चुके हैं. इन सबने महाराष्ट्र के मुख्य मंत्री, केंद्रीय परिवहन मंत्री, पीडब्ल्यूडी, पर्वायवरण मंत्री आदि को अर्जी भेजीं लेकिन नजीता शून्य ही रहा.

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इस तीन किलोमीटर लंब सड़क पर गांधी जी और उनके साथी कार्यकर्ताओं ने पेड़ लगाए  जिनमें चरखा सिंह, आन्नासाहेब सहस्रबुद्धे, अरण्यकामजी, प्रभाकरजी जैसी बड़ी हस्तियां शामिल थीं. वर्धा निसर्ग मंडल ने भी 150 पेड़ स्वतंत्रता सेनानियों की श्रद्धांजलि के तौर पर लगाए थे. इसी लिए इन पेड़ों के साथ पर्यावरण के अलावा ऐतिहसिक और भावनात्मक महत्व भी जुड़ा हुआ है. वहीं तुषार गांधी का कहना है कि यहां के स्थानीय लोगों ने इन पेड़ों को बड़ी श्रद्धा से इस सूखे इलाके में दूर दूर से पानी लाकर सींचा और पाला है
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