#Gandhi150: मारे जाने से पहले इन 7 शर्तों को लेकर गांधी ने की थी भूख हड़ताल

गांधी उस दौरान दिल्ली में हो रही सांप्रदायिक हिंसा के खिलाफ अनशन कर रहे थे और वे दिल्ली के बिड़ला हाउस में ठहरे हुए थे.

Avinash Dwivedi | News18Hindi
Updated: October 2, 2018, 11:49 PM IST
#Gandhi150: मारे जाने से पहले इन 7 शर्तों को लेकर गांधी ने की थी भूख हड़ताल
महात्मा गांधी
Avinash Dwivedi | News18Hindi
Updated: October 2, 2018, 11:49 PM IST
(20वीं शताब्दी के सबसे निर्मम और हिंसक दौर में, जब विश्व दो-दो विश्वयुद्ध की त्रासदियों से गुजर रहा था. भारत में एक महात्मा ने सत्य और अहिंसा को लोगों के मन में पुन:स्थापित किया. इस महात्मा को आगे चलकर भारत ने अपना राष्ट्रपिता माना और दुनिया ने उसकी तुलना ईसामसीह और महात्मा बुद्ध से की. इस साल 2 अक्टूबर को महात्मा गांधी को इस दुनिया में आए 150वां साल होने को है. इस मौके पर हम आपको गांधी से जुड़ी तमाम जानकारियां 2 अक्टूबर तक सीरीज '#गांधी150' में दे रहे हैं. पिछली सारी कहानियों के लिए यहां क्लिक करें.)

पिछले लेख में हमने आपको बताया कि जब महात्मा गांधी ने अपनी हत्या से पहले हिंदु-मुस्लिम शांति के लिए अनशन किया तो कैसे कुछ हिंदु और सिख शरणार्थियों ने उनके लिए गांधी को मर जाने दो के नारे लगाए. आज हम आपको उस अनशन के बारे में बता रहे हैं, जिसकी घोषणा उन्होंने अपनी हत्या से करीब दो हफ्ते पहले 12 जनवरी को की थी.

12 जनवरी, 1948 को सोमवार था. उस दिन गांधी का मौनव्रत होता था तो महात्मा गांधी के एक सहयोगी ने उनकी जगह जनता को संबोधित किया. महात्मा गांधी की ओर से उन्होंने यह घोषणा कर दी कि वे अगले दिन से अनशन करेंगे. हालांकि उसी दिन शाम को वे मौलाना आजाद, पटेल और नेहरू तीनों से मिले थे लेकिन उन्होंने अपने इस अनशन की बात उन्हें नहीं बताई थी क्योंकि उन्हें डर था कि ये तीनों उन्हें ऐसा करने से मना करेंगे.

सवेरे मौलाना आजाद से मिलने के बाद गांधी ने सात शर्तें रखीं-

1. मेहरौली में हर साल होने वाले ख्वाजा बख्तियार काकी का उर्स बिल्कुल शांतिपूर्ण तरीके से होना चाहिए (यह 9 दिन में होने वाला था.)

2. सैकड़ों मस्जिदों को शरणार्थियों ने कब्जा लिया था. वे उन्हें घर बनाकर उनमें रह रहे थे. कुछ मस्जिदों को लोगों ने मंदिर भी बना दिया था. गांधी की दूसरी शर्त थी कि उन्हें फिर से मस्जिद में बदला जाये.

3. पुरानी दिल्ली में मुस्लिम फिर से आजादी से घूम सकें.
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4. जो मुसलमान फिर से पाकिस्तान से लौट आयें और अपने पुराने घरों में बसना चाहें उनसे लोगों को कोई प्रॉब्लम नहीं होनी चाहिए.

5. मुस्लिम बिना किसी खतरे के रेलगाड़ियों में सफर कर सकें.

6. किसी भी तरह से मुस्लिमों का आर्थिक बहिष्कार न किया जाए.

7. हिंदू शरणार्थियों को मुस्लिम इलाकों में, इलाके में पहले से मौजूद मुस्लिमों की इजाजत लेकर ही बसाया जाये.

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गांधी का प्रभाव धीरे-धीरे ही सही लेकिन पूरी दिल्ली पर दिखने लगा. दो लाख लोगों ने शांति के लिए एक पत्र पर हस्ताक्षर किए. इसमें लिखा था, हम हिंदू, सिख, ईसाई और दिल्ली के दूसरे नागरिक सत्यनिष्ठा से अपनी दृढ़प्रतिज्ञा दिखाते हैं कि भारत के मुस्लिम नागरिक उतने ही आज़ाद होंगे जितने कि हम बाकी लोग और उन्हें भी शांति और सुरक्षा और आत्मसम्मान के साथ भारतीय राज्य की भलाई के लिए काम करने आजादी होगी.

काफी कमजोर होने के बावजूद भी महात्मा गांधी 17 जनवरी की शाम प्रार्थना सभा में गये. जहां उन्होंने फिर जोर दिया कि यह उनका कोई राजनीतिक कदम नहीं है बल्कि यह अंतर्मन और कर्तव्य का पालन करने के लिए बुलावा है.

18 जनवरी की सुबह हिंदू, मुस्लिम और सिख नेता राजेंद्र प्रसाद के घर पर मिले. यहां पर उन्होंने मिलकर गांधी को बताया कि उन्होंने गांधी की इन सात शर्तों को पूरा करने की शपथ ली है. जिसके बाद महात्मा गांधी ने संतरे का जूस पीकर अपना अनशन खत्म कर दिया.

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First published: October 2, 2018, 4:59 PM IST
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