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#Gandhi150: मुस्लिम लड़की से शादी करना चाहता था गांधीजी का बेटा, पर पिता को नहीं था गवारा...

गांधी जी की 150वीं जयंती है.
गांधी जी की 150वीं जयंती है.

महात्मा गांधी अंतर धार्मिक या अंतर जातीय शादी के खिलाफ थे. लेकिन उनके दूसरे बेटे मणिलाल को एक मुस्लिम लड़की से प्यार हो गया था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 2, 2018, 7:52 AM IST
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(20वीं शताब्दी के सबसे निर्मम और हिंसक दौर में जब विश्व दो-दो विश्वयुद्ध की त्रासदियों से गुजर रहा था, भारत में एक महात्मा ने सत्य और अहिंसा को लोगों के मन में पुन:स्थापित किया. इस महात्मा को आगे चलकर भारत ने अपना राष्ट्रपिता माना और दुनिया ने उसकी तुलना ईसा मसीह और महात्मा बुद्ध से की. इस साल 2 अक्टूबर को महात्मा गांधी को इस दुनिया में आए 150वां साल होने को है. इस मौके पर हम आपको गांधी से जुड़ी तमाम जानकारियां 'गांधी@150' सीरीज में दे रहे हैं. पिछली सारी कहानियों के लिए यहां क्लिक करें.)

महात्मा गांधी अंतर धार्मिक या अंतर जातीय शादी के खिलाफ थे. लेकिन उनके दूसरे बेटे मणिलाल को एक मुस्लिम लड़की से प्यार हो गया था. दोनों का प्रेम करीब 14 सालों तक चला. वो इस लड़की से शादी करना चाहते थे. जब उन्होंने गांधीजी से अनुमति मांगी तो उन्होंने कई तर्क देते हुए इस शादी से साफ मना कर दिया. फिर तुरंत उनकी शादी अपनी जाति में करा दी.

गांधीजी शुरुआती दौर में अंतर धार्मिक ही नहीं बल्कि अंतर जातीय शादियों के खिलाफ थे. उनका मानना था कि ये उचित नहीं हैं. इससे सामाजिक संरचना और धार्मिक सदभावना को ठेस लगेगी, लिहाजा हिंदू धर्म में अंतर जातीय और अंतर धार्मिक शादियों पर प्रतिबंध उचित है. हालांकि 1930 के दशक में उन्होंने अपनी ये धारणा बदल ली.



मणिलाल को गांधीजी के दक्षिण अफ्रीका में विश्वस्त सहयोगी युसुफ गुल की बेटी फातिमा से प्यार हो गया था. वे लोग बचपन से साथ रहे थे. काफी समय साथ गुजरता था, लिहाजा समय के साथ करीब आ गए. चूंकि बचपन से ही गांधीजी ने अपने बेटों को सिखाया था कि सभी धर्म समान हैं, हमें घुलमिलकर रहना चाहिए, लिहाजा बच्चों के दिमाग में कभी आया ही नहीं धर्म की भी एक दीवार हो सकती है.
शुरुआत में अंतर धार्मिक और अंतर जातीय विवाह के खिलाफ थे गांधी
बर्मिंघम यूनिवर्सिटी में रिसर्च स्कॉलर निकोल क्रिस्टी नॉली ने अपनी रिसर्च पेपर में इस विषय पर विस्तार से लिखा है. केआर. प्रभु और यूआर राव ने महात्मा गांधी के विचारों की एक रिकार्डिंग "द माइंड ऑफ महात्मा गांधी" के नाम से की. उसमें गांधीजी कहते हैं, "विवाह जीवन का वो प्राकृतिक तत्व है, जिसमें अगर आप कोई गलत कदम उठाएंगे तो ये खराब स्थिति में आ जाएगी."

इसी बातचीत में उन्होंने अंतर धार्मिक विवाह को लेकर अपनी असहमति भी जाहिर की. इस पूरे वाकये पर दक्षिण अफ्रीका की यूनिवर्सिटी ऑफ केप की सीनियर हिस्ट्री फैकल्टी उमा धूपेलिया मिस्त्री (गांधीजी की पड़पोती) ने विस्तार से लिखा है.

मणिलाल को भरोसा था कि पिता फातिमा से उनकी शादी पर मान जाएंगे लेकिन ऐसा हुआ नहीं (फाइल फोटो)


मणिलाल को भरोसा था पिता मान जाएंगे
मणिलाल को भरोसा था कि वो टिम्मी (फातिमा) से शादी कर लेंगे. हालांकि उन्हें धीरे-धीरे लगने लगा कि इसमें कई बाधाएं थीं. कस्तूरबा दूसरे धर्म में शादी की सख्त विरोधी थीं. धर्म क्या वो दूसरी जाति में विवाह के पक्ष में नहीं थीं. वह ये बात कतई पचा नहीं सकती थीं कि उनकी बहू दूसरे धर्म और जाति की हो.

मणिलाल और फातिमा का प्यार चलता रहा
मणि 1915 में गांधीजी के साथ भारत भी आए, लेकिन 1917 में वापस दक्षिण अफ्रीका चले गए ताकि फीनिक्स आश्रम का काम देख सकें. शायद वजह ये ज्यादा थी कि वो फातिमा का वियोग बर्दाश्त नहीं कर पा रहे थे. फातिमा से उनकी फ्रेंडशिप 1914 में हुई और 1926 तक चलती रही.

मैं टिम्मी (फातिमा) से शादी करना चाहता हूं
मणिलाल ने 1926 में अपने से छोटे भाई रामदास के जरिए पिता को संदेश भेजा कि वो टिम्मी से शादी करना चाहते हैं. टिम्मी ही नहीं उसके भाई बहन और परिवार का गांधीजी के परिवार से दक्षिण अफ्रीका में रहने के दौरान बहुत आत्मीय रिश्ता था. लिहाजा मणि को उम्मीद थी कि पिता मान जाएंगे, लेकिन पिता ने जवाबी तौर पर जो पत्र भेजा, वो किसी धमाके से कम नहीं था. हालांकि गांधीजी का कहना था कि वो मणि को ये पत्र एक दोस्त से तौर पर लिख रहे हैं.

गांधीजी ने बेटे को पत्र में लिखा, जिस शादी के बारे में वो सोच रहा है, वो धर्म नहीं बल्कि अधर्म है (फाइल फोटो)


गांधीजी के पत्र ने बिखेर दिए सपने
पत्र ने मणि के सारे सपने को ध्वस्त कर दिया. उसमें लिखा, "अगर तुम हिंदू हो और तुमने फातिमा से शादी कर ली और शादी के बाद भी वो मुस्लिम ही रही तो ये एक ही म्यान में दो तलवारों जैसा हो जाएगा. तब तुम अपनी आस्था से हाथ खो बैठोगे. जरा ये भी सोचो कि जो बच्चे पैदा होंगे, वो किस धर्म और आस्था के प्रभाव में होंगे."

ये धर्म नहीं अधर्म होगा
फिर उन्होंने आगे लिखा, "ये धर्म नहीं अधर्म होगा, अगर फातिमा केवल शादी के लिए अपने धर्म को बदलना भी चाहे तो भी ठीक नहीं होगा. आस्था कोई कपड़ा नहीं, जो आप इसे कपड़े की तरह बदल लें. अगर कोई ऐसा करता है तो धर्म और घर से बहिष्कृत कर दिया जाएगा. ये कतई उचित नहीं. ये रिश्ता बनाना समाज के लिए भी हितकर. ये हिंदू मुस्लिमों पर अच्छा असर नहीं डालेगी. अंतर धार्मिक शादी करने के बाद ना तो तुम देश की सेवा के लायक रह जाओगे और ना ही फीनिक्स आश्रम में रहकर इंडियन ओपिनियन वीकली निकाल सकोगे. तुम्हारे लिए भारत आना मुश्किल हो जाएगा. मैं बा से तो इस बारे में कह भी नहीं सकता, वो तो इसकी अनुमति देने से रहीं." 

असल में गांधीजी भारत में इस शादी की प्रतिक्रिया को लेकर चिंतित थे. पत्र में बेटे को इतनी खुराक देने के बाद आगे और तगड़ा डोज दिया, "तुम क्षणिक सुख के लिए ही ऐसी शादी के बारे में सोच रहे हो, जबकि तुम्हे मालूम नहीं कि वास्तविक सुख क्या है."

महात्मा गांधी की पड़पोती उमा धूपेलिया ने मणिलाल पर किताब लिखकर इस पूरे वाकये का जिक्र किया है (फाइल फोटो)


मणि ने तोड़ लिए फातिमा से रिश्ते
नतीजा ये हुआ कि मणि बहुत निराश हुए. वो समझ गए कि पिता से इसकी अनुमति नहीं मिलने वाली. अाज्ञाकारी बेटे की तरह उन्होंने फातिमा से शादी के लिए मना कर दिया. लेकिन गांधी के लिए इस व्यवहार के लिए मणि उन्हें जीवनभर माफ नहीं कर पाए, बल्कि गांधी के दो ग्रेैंड चिल्ड्रंस राजमोहन गांधी (Mohandas: A True Story of a Man, His People, and an Empire) और उमा धूपेलिया (Gandhi's Prisoner?: The Life of Gandhi's Son Manilal ) में इस काम के लिए उनकी आलोचना भी की.

मणिलाल तो फातिमा से शादी नहीं कर पाए, लेकिन इसके ठीक एक दशक बाद उनके बड़े भाई हरिलाल ने मुस्लिम धर्म स्वीकार कर लिया था. हालांकि एक महीने बाद ही वो वापस हिंदू बन गए.

गुजराती बनिया की बेटी से की शादी
मणिलाल को पत्र भेजने के बाद गांधीजी ने अपने विश्वस्त सहयोगी जमनालाल बजाज से इस बारे में बात की. तुरंत उनकी शादी महाराष्ट्र के अकोला में रहने वाले एक समृद्ध गुजराती बनिया व्यापारी की 19 साल की बेटी सुशीला से कर दी गई. शादी से पहले गांधीजी ने बेटे से कहा कि वो अपनी बीवी को बता दे कि उसका एक अफेयर था, जो अब खत्म हो गया है.

महात्मा गांधी के बाद इस परिवार की पांचवीं पीढी आ चुकी है. इस परिवार के लोगों ने तमाम दूसरे धर्मों में शादी की, लेकिन अब तक किसी ने भी मुस्लिम धर्म में शादी नहीं की.
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