Gene में बदलाव कर वैज्ञानिकों ने बनाई सुपर डैड मवेशी, जानिए क्या हैं ये

Gene में बदलाव कर वैज्ञानिकों ने बनाई सुपर डैड मवेशी, जानिए क्या हैं ये
मवेशियों (Cattles) में इंजेक्शन (Injections) के जरिए ऐसे नर (males) बनाए जा सकेंगे जो कभी (Sterile) अनुर्वर नहीं होगें. (तस्वीर: Pixabay)

जीन एडिंटिंग (Gene Editing) तकनीक की मदद से अब केवल इंजेक्शन (Injection) के जरिए ही अनुर्वर (Infertile) नर (Male) मवेशियों (Cattle) में स्पर्म (Sperm) बनाने की क्षमता पैदा की जा सकती है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 17, 2020, 6:57 AM IST
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मवेशी (Cattles) और अन्य पालतू जानवर (animals)  जैसे बकरी, सुअर, चूहे ऐसे स्पर्म बनाते हैं जिनमें डोनर जानवर (Doner animal) के जेनेटिक पदार्थ (Genetic materials) आ सकते हैं. शोधकर्ताओं ने एक जीन एडिटिंग टूल (Editing tool)  का उपयोग किया और जानवर के भ्रूण (Embryo) में ही नर उर्वरता (Male Fertility)  की जीन की पहचान कर ली है. इससे जिन जानवरों में उर्वरता नहीं थी वे भी स्पर्म (Sperm) बनाने वाले सेल (Cells) के इंजेक्शन लगने के बाद स्पर्म पैदा करने लगे.

क्या हुआ प्रयोग
सेरोगेट प्रजननकर्ताओं में सक्रिय दानदाता स्पर्म की पुष्टि हुई थी और चूहों ने स्वस्थ्य बच्चों को जन्म दिया जिनमें स्पर्म दानदाता के जीन्स मौजूद थे. फिलहाल यह प्रयोग बड़े जानवरों पर नहीं हुआ है.  लेकिन शोधकर्ताओं का कहना है कि यह अध्ययन अवधारणा के तौर पर एक शक्तिशाली प्रमाण है.

बड़ी सफलता
यह तकनीक एक बड़ी सफलता के तौर पर देखी जा रही है. बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका और यूके के शोधकर्ताओं की टीम ने बताया कि इससे सरोगेट्स नर के जरिए बच्चों में ऐसे जेन्टिक पादर्थ पहुचाए जा सकते हैं जो खास किस्म के जानवरों में ही होते हैं. इससे मवेशियों और अन्य जानवरों के उत्पादन में भी मदद मिल सकेगी.



पूरी दुनिया पर होगा असर
वॉशिंगटन स्टेट यूनिवर्सिटी के वेटर्निटी मेडिसिन के प्रोफेसर जोन ओटले का कहना है कि इससे आहार असुरक्षा से जुड़ी समस्याओं पर असर पड़ेगा और यह बड़ा असर पूरी दुनिया मे हो सकता है. इससे जानवरों में कई तरह के अनुवांशिकी समस्याओं का समाधान हो सकेगा.

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जीन एडिटिंग (Gene Editing) का यह टूल अनुवांशिकी (genetics) के क्षेत्र में बहुत बड़ा बदलाव ला सकती है.


तकनीक बड़े काम की
शोधकर्ताओं ने कहा कि इससे दुनिया को पता चलेगा कि यह तकनीक वास्तविक है  और इसका उपयोग किया जा सकता है. अब बस इस बारे में काम करते हुए इस सर्वश्रेष्ठ उपयोग करने की जरूरत है. इससे बढ़ती जनसंख्या की खाद्य समस्या को हल करने में भी मदद मिलेगी.

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खत्म हो रही प्रजातियों को बचा सकते हैं
शोधकर्ताओं के मुताबिक यह तकनीक विलुप्त होने की कगार पर पहुंच चुकी प्रजातियों के बचाने में भी काम आ सकती है. हो सकता है कि खत्म होने का खतरा झेल रहे गेंडों की स्पर्म को जमा कर रखा जाए जिससे इस प्रजाति को फिर से खड़ा किया जा सके.

सब कुछ नीति निर्माताओं पर
इसके साथ ही शोधकर्ताओं ने यह भी कहा कि यह विज्ञान कितनी जल्दी क्रियान्वित किया जाएगा यह सब नीतिनिर्माताओं पर निर्भर करेगा. जीन संपादित मवेशियों और अन्य जानवर जिन्हें खाने के लिए पाला जाता है, के उपयोग के लिए स्वीकृति की जरूरत होगी. इसमें सुरक्षा, आचार नीति और पशु कल्याण जैसे मुद्दे भी आ जाएंगे.

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इससे जुड़ी तकनीक में डीएनए (DNA) के स्तर पर जाकर बदलाव किया जाता है. (तस्वीर: Pixabay)


 आखिर क्या है जीन एडिटिंग
जीन एडिटिंग यानि जीन संपादन में मुख्यतया भ्रूण में ही जीन कोडिंग को खत्म करने या बदलने की प्रक्रिया होती है.  इससे संबंधित एक तकनीक वर्तमान में उपयोग में लाई जा रही है जिसे CRISPR कहा जाता है. यह के जैविक व्यवस्था (Biological System) है जिसमें डीएनए में बदलाव किया जा सकता है.

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क्या होता है इसमें
इस तकनीक की खोज साल 2012 में हुई थी. CRISPR जीनोम को स्कैन कर कुछ खास जीन की स्थितियों की पहचान करता है और आणविक कैंची (molecular scissors) के उपयोग के जरिए डीएनए में काट-छांट करता है. यह प्रक्रिया लैब में तो प्रभावी है, लेकिन वास्तव में यह प्रक्रिया सटीक नहीं है और इससे डीएनए में ज्यादा ही काट-छांट हो सकती है. इससे अन्य जरूरी जीन्स में भी खत्म हो सकते है या उनमें अवांछनीय बदलाव हो सकता है.
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