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लोकसभा चुनाव परिणामः एक कार्यकर्ता से दूसरी बार प्रधानमंत्री बनने तक का सफर

News18Hindi
Updated: May 23, 2019, 6:20 PM IST
लोकसभा चुनाव परिणामः एक कार्यकर्ता से दूसरी बार प्रधानमंत्री बनने तक का सफर
2019 आम चुनाव परिणामः 17 साल की उम्र में संघ की सदस्यता ली, फिर मेहनत और चातुर्य से आगे बढ़ते गए.

2019 आम चुनाव परिणामः 17 साल की उम्र में संघ की सदस्यता ली, फिर मेहनत और चातुर्य से आगे बढ़ते गए.

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नरेंद्र मोदी ने फिर साबित कर दिया पिछले कुछ दशकों में उभरने वाले वो भारत के सबसे ताकतवर नेता हैं, ऐसे नेता जिसे देश की जनता खासा पसंद करती है. जिस पर जनता का जबरदस्त भरोसा है. इसमें कोई शक नहीं कि देश का कोई नेता उनके कद के आसपास नहीं. मोदी का गजब का सियासी सफर एक साधारण से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता से दो बार प्रधानमंत्री बनने का है.

उन्होंने लोकसभा 2019 के चुनाव में जो मुद्दे उठाए, जो बातें रखीं, विकास का 2022 तक का जो रोडमैप दिखाया, उस पर जनता ने पुख्ता तौर पर मुहर लगा दी है. पिछले पांच सालों में उन्होंने साबित कर दिया कि वो देश के मजबूत प्रधानमंत्री हैं. उन्होंने अपने पिछले पांच साल के कार्यकाल में देश की सुरक्षा के साथ कई ऐसी नीतियां बनाईं, जिसका लाभ आमलोगों तक पहुंचा. यही नहीं दुनिया में उन्होंने देश की इमेज को भी पूरा तरह बदल दिया.

पांच साल पहले नरेंद्र मोदी ने प्रचंड बहुमत से बीजेपी की अगुवाई वाली एनडीए को जीत दिलाई थी. अब 2019 के चुनावों में उन्होंने ये जादू फिर दोहराया है.

साधारण परिवार में जन्म

1950 में गुजरात के वडनगर में उनका जन्म एक साधारण परिवार में हुआ था. छह बच्चों में वो सबसे बड़े थे. बाधाओं के बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की. किशोर के रूप में वो अपने भाई के साथ अहमदाबाद में एक रेलवे स्टेशन के पास चाय स्टॉल लगाया करते थे.



मोदी ने वडनगर से स्कूली शिक्षा हासिल की. फिर गुजरात विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में मास्टर की डिग्री ली. उन्होंने 17 वर्ष की उम्र में मोदी ने घर छोड़ दिया. फिर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सदस्यता ली. पहले वो संघ के साधारण कार्यकर्ता रहे फिर कई बरसों तक संघ के प्रचारक के रूप में काम किया.सारे विपक्षी दल साथ भी आ जाते तो भी... ‘आता तो मोदी ही’

संघ के कार्यकर्ता बने और फिर बीजेपी में पहुंचे
80 के दशक में मोदी गुजरात की भाजपा ईकाई में शामिल हुए. उन्होंने 1990 में लाल कृष्ण आडवाणी की सोमनाथ-अयोध्या रथ यात्रा में अहम भूमिका अदा की थी. इसके बाद वो भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें कई राज्यों का प्रभारी बनाया. हर जगह अपनी मेहनत और बढिया काम से वो पार्टी का भरोसा जीतते गए.



गुजरात में केशुभाई की जगह सीएम बने
2001 में जब गुजरात में बीजेपी ने केशुभाई पटेल को मुख्यमंत्री पद से हटाकर नरेंद्र मोदी को राज्य की कमान सौंपी, तब ये जिंदगी का घुमाव था, जिसने आने वाले सालों में उन्हें देश की शीर्ष सत्ता तक पहुंचा दिया. वो राज्य की सत्ता में लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहते हुए राष्ट्रीय राजनीति पर मजबूती से उभरते गए. हालांकि इस दौरान उन पर आरोप भी लगे.



पार्टी का विजयी चेहरा बनकर उभरे
गुजरात राज्य विधानसभा चुनावों में उनकी डेढ़ दशकों से ज्यादा समय जीत ने उन्हें पार्टी का ऐसा चेहरा बना दिया, जिसके बल पर वो 2014 के लोकसभा चुनावों में सबसे बड़ी चुनौती पेश कर सकती थी. फिर पूरे देश ने देखा कि किस तरह 2014 के चुनावों में उनकी लहर चली. किस तरह इस लहर के सामने सत्ताधारी कांग्रेस और सहयोगी दल उखड़ गए.

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लोकप्रिय प्रधानमंत्री बने
नरेंद्र मोदी तब पहली बार प्रधानमंत्री बने. अगले पांच सालों तक उन्होंने बखूबी एनडीए की सरकार चलाई. इस दौैरान ना केवल उनकी सरकार ने आम जनता और देश के विकास के लिए कई योजनाएं बनाईं बल्कि सरकार पर भ्रष्टाचार का एक दाग भी नहीं लगने दिया.



फिर अब भारी भरकम जीत
अब पांच साल तक केंद्र में सत्ता संभालने के बाद जब वो वर्ष 2019 के चुनाव में कूदे तो फिर मिली भारी भरकम जीत ने साबित कर दिया कि उनकी सरकार के कामकाज और नीतियों को देश ने पसंद किया है. सबसे बड़ी ये भी है कि बीजेपी ने इस बार पुराने गढ़ बरकरार रखते हुए नए गढ़ भी बनाए हैं. बंगाल जैसे राज्य में भी जमीन को मजूबत कर ली है.
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First published: May 23, 2019, 6:20 PM IST
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