अब बाह्यग्रहों के पड़ताल नई तकनीक से होगी आसान, मिल सकेंगे जीवन के संकेत

अभी तक बाह्यग्रहों (Exoplanets) में जीवन की अनुकूलता केवल उनके तारों से दूरी के आधार पर आंकी जाती थी.  (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

अभी तक बाह्यग्रहों (Exoplanets) में जीवन की अनुकूलता केवल उनके तारों से दूरी के आधार पर आंकी जाती थी. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

बाह्यग्रहों (Explanet) में जीवन के अनुकूल होने वाले ग्रहों (Habitable Planet) की खोज में भूविज्ञान (Geology) बहुत कारगर तरीके मदद कर सकता है. ग्रह का केवल आवासीय क्षेत्र में होना काफी नहीं है.

  • Share this:

खगोलविदों की हमारे सौरमंडल से बाहर बाह्यग्रहों (Exoplanets) में विशेष रुचि है. उनका मानना है कि ब्रह्माण्ड में ऐसे ग्रह जरूर हो सकते हैं जहां जीवन के अनुकूल परिस्थितियां (Habitability) तो हो ही सकती हैं. हमारे सौरमंडल से बहुत दूर इन ग्रहों को खोजना और उनकी जानकारी पता करना बहुत मुश्किल काम होता है. लेकिन फिर भी हमारे वैज्ञानिक पूरे धैर्य के साथ वे जानकारी निकाल लेते हैं.  लेकिन अब शोधकर्ताओं ने भूगर्भविज्ञान (Geology) की सहायता से यह पता लगाने की तकनीक निकाली है जिससे बाह्यग्रह की जीवन की अनुकूलता के बारे में पता लग सकेगा.

जीवन की अनुकूलता खोजना होगा आसान

अब तक खगोलविदों ने करीब 4 हजार ऐसे ग्रहों की पुष्टि की है जो अपने किसी सूर्य का चक्कर लगा रहे हैं लेकिन उनमें से कुछ ही में जीवन के अनुकूल होने की संभावना है. अब यूनिर्सिटी ऑफ ब्रिटिश कोलंबिया के ओकानागान कैम्पस के नए शोध में नए बनते हुए ग्रहों के भूगर्भविज्ञान का उपयोग कर यह जानकारी जुटाई जा सकेगी कि क्या वे जीवन का समर्थन करने में सक्षम होंगे या नहीं.

पृथ्वी जैसे ग्रहों में दिलचस्पी
इस अध्ययन के प्रमुख लेखक और इर्विंग के बार्बर फैकल्टी ऑफ साइंस में जियोलॉजी के एसिस्टेंट प्रोफेसर ब्रेंडन डाइक का कहना है कि किसी भी ग्रह की खोज बहुत उत्साहजनक होती है. लेकिन हर कोई यहा जानना चाहता है कि क्या कोई लोहे के क्रोड़ वाला पृथ्वी जैसा ग्रह है या नहीं. हम भी इस तरह के ग्रहों की खोज की उम्मीद उन क्षेत्रों में करते हैं जिन्हें गोल्डीलॉक्स या आवासीय इलाके कहा जाता है जहां  ग्रहों की तारे से दूरी ऐसी होती है जिससे वहां की सतह पर तरल पानी कायम रह सके.

ऐसे ग्रहों को छांटने की चुनौती

डाइक का कहना है कि हालांकि आवासीय क्षेत्र में ग्रहों को छांटने में बहुत मदद मिलती है, यह दावा नहीं किया जा सकता है कि ग्रह वास्तव में ही आवासीय है. केवल पथरीले ग्रह में पानी हो सकता है, इसका मतलब यह नहीं कि वहां पानी मौजूद है. हमारे सौरमंडल में मंगल ग्रह ही को लें. कभी वहां तरल पानी रहा करता था. लेकिन अब वह लंबे समय से सूखा ग्रह है.



, Space, Solar System, Exoplanet, Planet, Habitable Planet, Habitability, Core of planet, Mantle of Planet, formation of planet,
बाह्यग्रहों (Exoplanets) में पृथ्वी जैसे ग्रह खोजने में भूविज्ञान बहुत कारगर तरह मददगार हो सकता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

भूविज्ञान और ग्रह निर्माण की जानकारी

हाल ही में यह अध्ययन एस्ट्रोफिजिकल जर्नल लैटर्स में प्रकाशित हुआ है. डाइक के मुताबिक यहीं भूविज्ञान की अहम भूमिका हो सकती है. भूविज्ञान और इन पथरीले ग्रहों का निर्माण की जानकारी से इन ग्रहों के खोज में काफी मदद मिल सकती है. डाइक कहते हैं कि अगर हमें किसी ग्रह के मैंटल में लौहे की मौजूदगी की मात्रा के बारे में बता सकें उससे हम पर्पटी की मोटाई बता सकते हैं जिससे सतह पर पानी और वायुमंडल की मौजूदगी के बारे में पता चल सकता है.

नासा के हबल ने पकड़ा, गुरु के आकार का ग्रह खा रहा है तारे की सामग्री

ज्यादा सटीक तरीका

डॉ डाइक का मानना है यह पृथ्वी जैसी दुनिया को पहचानने का ज्यादा कारगर और सटीक तरीका है. यह केवल आवासीय क्षेत्र में ग्रह की मौजूदगी से ही उसकी आवासयोग्यता जानने से बेहतर तरीका है. डॉ डाइक  बताते हैं कि किसी भी ग्रहों के तंत्र में छोटे पथरीले ग्रहों में एक चीज समान होती है. उनमें कुछ मात्रा में उस तारे का लोहा होता है जिसका वे चक्कर लगाते हैं.

, Space, Solar System, Exoplanet, Planet, Habitable Planet, Habitability, Core of planet, Mantle of Planet, formation of planet,
अब यह जानना आसान हो सकेगा कि कोई पथरीला बाह्यग्रह (Exoplanet) पृथ्वी की तरह जीवन के हालातों का समर्थन कर सकता है या नहीं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

लोहे की मात्रा

खास अंतर यही होता है कि इन ग्रहों के मैंटल और उनके क्रोड़ में कितना लोहा मौजूद होता है. जब ग्रह का निर्माण होता है, तब बड़े क्रोड़ की पतली पर्पटी होती है जगह छोट क्रोड़ मोटी लेकिन ज्यादा लोहे वाली पर्पटी बनाते हैं जैसा मंगल के साथ हुआ था. पर्पटी की मोटाई यह तय करती है कि ग्रह टेक्टोनिक प्लेट का समर्थन करता है या नहीं और उसकी सतह पर कितना पानी होगा और वायुमंडल की मौजूदगी हो सकती है या नहीं.

वैज्ञानिकों खोजा लावा से भी ज्यादा गर्म ‘नर्क’ ग्रह, धातु तक बन जाती है भाप

डाइक का कहना है कि भूविज्ञान यह बता सकता है कि क्या कोई ग्रह सतह पर पानी की मौजूदगी होने दे सकता है या नहीं और यह हम अपने भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों की योजनाएं बनाने से पहले ही पता कर सकते हैं.

अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज