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Russia Ukraine War: यूक्रेन के टैंक देने में क्यों हिचक रहा है जर्मनी?

जर्मनी (Germany) की यूरोप को हथियारों की मदद के पीछे आनाकानी के पीछे उसकी पुरानी विदेश नीति है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

जर्मनी (Germany) की यूरोप को हथियारों की मदद के पीछे आनाकानी के पीछे उसकी पुरानी विदेश नीति है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

जर्मनी (Germany) पर दबाव बढ़ता जा रहा है कि वह यूक्रेन (Ukraine) के लैपर्ट 2 बैटल टैंक की आपूर्ति करे. वहीं जर्मनी ने ...अधिक पढ़ें

हाइलाइट्स

जर्मनी यूरोपीय संघ का हिस्सा होने के नाते यूक्रेन की मदद करने की लिए बाध्य है.
जर्मनी की सत्तारूढ़ सोशल डेमोक्रैट पार्टी की विदेश नीति इसमें भ्रम की स्थिति बना रही है.
यही वजह है कि जर्मनी यूक्रेन को हथियारों की आपूर्ति में संकोच कर रहा है.

रूस यूक्रेन युद्ध (Russia Ukraine War) मे अमेरिका और पश्चिमी देश सीधी भागीदारी से तो बच रह हैं. लेकिन अमेरिका और कई यूरोपीय देश खुल कर यूक्रेन को हथियारों की आपूर्ति (Provision of Arms to Ukraine) भी कर रहे हैं. लेकिन जर्मनी (Germany support for Ukraine) ऐसा नहीं कर रहा है. वह शुरू से ही यूक्रेन को तुरंत हथियार मुहैया कराने से बच रहा है. पहले भी ऐसा हो चुका और यूक्रेन ने भी जर्मनी पर पहले आरोप लगाया था कि ऐसा करके वह अप्रत्यक्ष रूप से रूस की मदद कर रहा है. इसके बाद ही जर्मनी ने धीरे धीरे यूक्रेन को हथियारों की आपूर्ति की शुरू की थी. जर्मनी के इस ढुलमुल रवैये की पीछे उसकी ही नीतियां हैं.

जर्मनी के सिद्धांत
स्कोल्ज आसानी से बदलने वालों में से नहीं है. ऐसा ही यूक्रेन के मामले में भी हो रहा है. इस मामले में वे जर्मन सिद्धांतों का हवाला देते है. जिसमें जर्मन सरकार टिकी हुई है. सबसे पहले तो यह कि यूक्रेन को जितना समर्थन दिया जा सकता है मिलना चाहिए. दूसरा नाटो और रूस के बीच सीधी टक्कर से बचना बहुत जरूरी है.

एक अहम बात
लेकिन जर्मनी का तीसरा सिद्धांत यहां बड़ा अहम हो जाता है जिसके मुताबिक जर्मनी को किसी भी एक समर्थित देश के प्रति एकतरफा कार्रवाई से बचना चाहिए. पिछले सप्ताहांत में भी स्कोल्ज ने इन्हीं सिद्धांतों को दोहराते हुए कहा था कि जो भी फैसला लिया जाएगा उसे केवल अपने दोस्तों और साथियों से सहयोग और सलाह के साथ ही लिया जाना चाहिए.

विदेश नीति में संकेत
यूक्रेन के लैपोर्ड 2 टैंक की आपूर्ति करने के पीछे के कुछ संकेत हाल ही में सोशल डेमोक्रैट पार्टी के विदेश नीति पत्र के प्रस्तुतिकरण में दिखाई दी थी. इसमें मांग की गई है कि जर्मनी को अब दुनिया की मजबूती से अगुआई करना चाहिए. ‘टर्निंग टाइम्स (जेइटेनवेन्डे) फॉर अवर फॉरेन पॉलिसी- सोशल डेमोक्रैटिक आन्सर्स टू द वर्ल्ड इन अपहीवल’ नाम के इस 23 पन्नों के नीतिपत्र में जर्मनी के इस रवैये के कारण देखे जा सकते हैं.

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जर्मनी ने चांसलर ओलाफ स्कोल्ज (Olaft Scholz) का कहना है कि उनका देश जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं करेगा. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

विदेश नीति में संकेत
यूक्रेन के लैपोर्ड 2 टैंक की आपूर्ति करने के पीछे के कुछ संकेत हाल ही में सोशल डेमोक्रैट पार्टी के विदेश नीति पत्र के प्रस्तुतिकरण में दिखाई दी थी. इसमें मांग की गई है कि जर्मनी को अब दुनिया की मजबूती से अगुआई करना चाहिए. ‘टर्निंग टाइम्स (जेइटेनवेन्डे) फॉर अवर फॉरेन पॉलिसी- सोशल डेमोक्रैटिक आन्सर्स टू द वर्ल्ड इन अपहीवल’ नाम के इस 23 पन्नों के नीतिपत्र में जर्मनी के इस रवैये के कारण देखे जा सकते हैं.

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जर्मनी के लिए कुछ जरूरी सवाल
इस प्रस्तुतिकरण के दौरान रूस के यूक्रेन पर हमले की आलोचना पर कहा गया कि पार्टी को कुछ मूलभूत प्रश्नों के उत्तर देने होंगे जैसे इस ऐतिहासिक बदालव का पार्टी के नजरिए लिहाज से क्या मतलब है. नए हालातों में रूस, चीन और अमेरिका से संबंधों को कैसे परिभाषित करना चाहिए. आत्मनिर्भर और संप्रभु यूरोप खुद को कैसे परिभाषित करता है और तेजी से बदलती दुनिया में जर्मनी की क्या भूमिका है?

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जर्मनी (Germany) की सत्तारूढ़ पार्टी नए वैश्विक हालात में देश की भूमिका को परिभाषित करने पर जोर दे रही है.. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

चर्चा का आपूर्ति से संबंध नहीं
शोधरपत्र में माना गया कि जर्मनी को अब अपने दुनिया का नेतृत्व करने का संकोच छोड़ देना चाहिए और नई हालात में जिम्मेदारियां लेने से बचना नहीं चाहिए. नीतिपत्र में चर्चा के दौरान यह भी स्पष्ट किया गया कि इसका वर्तमान में यूक्रेन की हथियारों की आपूर्ति के सवाल से कोई लेना देना नहीं है.

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