जर्मनी में इस जानवर के लिए तैयार की गईं सड़कें और सुरंग

जर्मनी की कई स्वयंसेवी संस्थाओं ने मेंढ़कों को बचाने का जिम्मा ले लिया- सांकेतिक फोटो (pxhere)
जर्मनी की कई स्वयंसेवी संस्थाओं ने मेंढ़कों को बचाने का जिम्मा ले लिया- सांकेतिक फोटो (pxhere)

इस यूरोपियन देश का मानना है कि मेंढ़कों के कारण वे कई खतरनाक बीमारियों जैसे जीका वायरस (Zika virus) से बचे हुए हैं. अब कोरोना के साथ वहां मेंढ़कों को बचाने की कवायद और तेज हो गई.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 18, 2020, 6:49 PM IST
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जर्मनी की पूर्व राजधानी रह चुके बॉन शहर में मेंढ़कों को सड़कों से हटाकर सुरक्षित जगह या जंगल छोड़ने जाने की मुहिम चल रही है. दरअसल ये एंफीबियन जीव गर्मी से सर्दी के दौरान माइग्रेट करते हैं ताकि तेज सर्दियां शुरू होने से पहले सेफ जगह पहुंच सकें. वे गर्मी के अपने ठिकाने से निकलते तो हैं लेकिन नए ठिकाने तक नहीं पहुंच पाते. वजह- वे सड़कों पर तेज चलती गाड़ियों के नीचे दबकर मर जाते हैं. यही वजह है कि जर्मनी की कई स्वयंसेवी संस्थाओं ने उन्हें बचाने का जिम्मा ले लिया.

क्या कहती हैं संस्थाएं 
इस बारे में वाइल्डलाइफ कनजर्वेशन (wildlife conservation) से जुड़ी एक संस्था की डायरेक्टर Monika Hachtel कहती हैं कि कई-कई बार तो ऐसा होता था कि बहुत से मेंढ़क गाड़ियों से कुचलकर मर जाते. ये देखते हुए हमने उन्हें सड़क पार करने के दौरान बचाने का जिम्मा ले लिया. अब कई संस्थाएं दशकभर से भी ज्यादा समय से इसके लिए काम कर रही हैं.

बचाने के लिए कई चरणों में काम 
जैसे एक रास्ता तो ये है कि जब कोई मेंढ़क रास्ता पार कर रहा हो तो पूरी सड़क का यातायात कुछ देर के लिए रोक दिया जाए. लेकिन प्रैक्टिकल तौर पर ऐसा होना मुमकिन नहीं.



मेंढ़क सड़कों पर तेज चलती गाड़ियों के नीचे दबकर मर जाते हैं- सांकेतिक फोटो (needpix)


बनाई जा रही हैं सुरंगें
एक और विकल्प ये है कि मेंढ़कों के लिए सड़क के लिए नीचे सुरंग बना दी जाए, जहां से ये आराम से कभी भी आ-जा सकें. पुरानी सड़कों के साथ तो ऐसा करना संभव नहीं लेकिन नई सड़कें तैयार करते वक्त इसका ध्यान रखा जा रहा है कि सड़क के नीचे खास मेंढ़कों के लिए सुरंग हो. इसके लिए मैप तैयार करते हुए टनल बनाने का भी इंतजाम रहता है.

तीसरा तरीका भी है
इसके तहत मेंढ़कों के लिए फेंसिंग बनाई गई हैं. एनजीओ और जर्मनी की सरकार ने मिलकर पूरे बॉन शहर में 800 फेंसिंग बनवाई हैं जो मेंढ़कों की सड़कों पर चलती गाड़ियों से सुरक्षा करती हैं. फेंसिंग इस तरह से लगाई जाती हैं कि मेंढ़क उनके भीतर कैद हो जाएं. रोज संस्थाओं के लोग फेंस चेक करते हैं और बंद हुए मेंढ़कों को लेकर पास के जंगल में छोड़ आते हैं.

बचाना क्यों जरूरी है
Zoological Research Museum Alexander Koenig के एक्सपर्ट Dennis Rödder के अनुसार ये प्रजाति जहरीले और नुकसान पहुंचाने वाले कीड़े-मकोड़ों को खाती है, इससे उनपर नियंत्रण रहता है. मेंढ़क मच्छर भी खाते हैं और यही वजह है कि बॉन शहर को मेंढ़कों को बचाना इतना जरूरी लगता है.

वैश्विक स्तर पर देखें तो भी मेंढ़कों की प्रजाति का जिंदा रहना जरूरी है- सांकेतिक फोटो (pxfuel)


खतरनाक वायरसों से बचाव
इसके अलावा भी मेंढ़क जिस तरह के कीड़े-मकोड़े खाते हैं, वे कई दूसरी खतरनाक बीमारियां फैला सकते हैं, जैसे जीका वायरस. मेंढ़कों के खाने पर हमारे ऊपर से ये खतरा टल जाता है. वैश्विक स्तर पर देखें तो भी मेंढ़कों की प्रजाति का जिंदा रहना जरूरी है. ये पानी में मौजूद एल्गी खाते हैं, जिससे पानी की गुणवत्ता बनी रहती है.

मेंढ़कों के नाम है सड़क
सिर्फ बॉन शहर ही नहीं, बल्कि जर्मनी के कई दूसरे शहरों में भी मेंढ़कों को बचाने पर जोर दिया जा रहा है, जैसे Sindelfingen और Böblingen शहर. यहां पर जंगल के बीच से गुजरने वाली सड़कों पर मेंढ़कों की आवाजाही रहती है. इन्हीं सड़कों से गाड़ियां भी गुजरती हैं और अक्सर मेंढ़क उनकी चपेट में आ जाते हैं. गाड़ियों के नीचे आकर मरने के अलावा मेंढ़क तेज चलती गाड़ियों के एयर फ्लो से भी मर जाते हैं. एक स्वयंसेवी संस्था में कर्मचारी Dieter R. Goettling के अनुसार 40 किलोमीटर प्रतिघंटे की स्पीड से ज्यादा स्पीड की गाड़ियों के पास से गुजरते मेंढ़कों के शरीर में आंतरिक रक्तस्त्राव होता है और मारे जाते हैं. यही वजह है कि हम जंगल से गुजरती गाड़ियों को स्पीड कंट्रोल के लिए कहते हैं. यहां तक कि एक सड़क का नाम Frog Road रख दिया गया है.
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