अमेरिका का 'भुतहा शहर' जहां सड़कें और घर की सलाखें रातोंरात पिघलने लगीं

अमेरिका का 'भुतहा शहर' जहां सड़कें और घर की सलाखें रातोंरात पिघलने लगीं
पेनसिल्वेनिया के शहर सेंट्रेलिया (Centralia) को भुतहा शहर के नाम से जाना जाता है

आज से लगभग 70 साल पहले पेनसिल्वेनिया (Pennsylvania) का ये शहर और दुकानों से रोशन था लेकिन एकाएक शहर की सड़कों से धुआं उठने लगा और रातोंरात ये भुतहा शहर (ghost town) बन गया. अमेरिका की घनी आबादी से घिरे इस सुनसान शहर में आज भी लोग जाने से घबराते हैं.

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पेनसिल्वेनिया के शहर सेंट्रेलिया (Centralia) को भुतहा शहर के नाम से जाना जाता है. यहां सड़कों पर दरारें पड़ी हुई हैं और सुनसान घरों में बहुत सी चीजें जली हुई दिखती हैं. विदेशी सैलानी यहां घूमने आते रहते हैं लेकिन शहर में जगह-जगह बोर्ड लगे हुए हैं जो खतरनाक जगहों से लोगों को आगाह करते हैं. एक समय में चहल-पहल से भरे इस शहर के भुतहा होने की वजह साल 1962 की एक घटना है, जिसने पूरे शहर को जलाकर खाक कर दिया.

साल 1850 में सेंट्रेलिया शहर में कोयले की खदानों का पता चला और जल्दी ही यहां पर 2700 लोग रहने लगे. इनमें से अधिकतर खदानकर्मी और उनके परिवार थे. साल 1930 में आए ग्रेट डिप्रेशन का असर सबसे ज्यादा कोयले की खदानों पर पड़ा, इसके बाद भी शहर आराम से चलता रहा. बाद में शहर के नीचे भयंकर आग लगी, जिसने इस रौनक भरे शहर को उजाड़ दिया.

आग लगने का असल कारण आज तक पता नहीं लग सका. इतिहासकार इसके पीछे कई वजहें बताते हैं. जैसे कोयले के खनन के बाद बने गड्ढों में तब सिटी काउंसिल के लोग कचरा जमा कर देते थे और भर जाने पर उसमें आग लगा देते. साल 1962 में भी हमेशा की तरह गड्ढों में भरे कचरे में आग लगा दी गई. हालांकि कुछ गड्ढों के नीचे कोयला अब भी भरा हुआ था. आग कचरे से होते हुए जमीन के नीचे के कोयले को दहकाने लगी और धीरे-धीरे ये आग जमीन के भीतर ही फैलने लगी.



आग कचरे से होते हुए जमीन के नीचे के कोयले को दहकाने लगी और धीरे-धीरे ये आग जमीन के भीतर ही फैलने लगी




जमीन के नीचे सुलगती इस आग का जिक्र डेविड डेकॉक की किताब Fire Underground: The Ongoing Tragedy of the Centralia Mine Fire में भी है. इसमें बताया गया है कि कैसे आग जमीन के अंदर कोयले की खदानों तक पहुंच गई और वहां भी कार्बन मोनाऑक्साइड भरने लगी.

आग बुझाने की सारी कोशिशें हुई लेकिन कुछ भी कामयाब नहीं रहा. जमीन के नीचे कोयले की खदानें ही और खदानों के लिए बनाई गई सुरंगें गर्म होने लगीं. जमीन एकाएक बीच से फटने लगी. तापमान इतना बढ़ गया कि शहर के कई इलाके 900 डिग्री फैरनहाइट से भी ज्यादा गर्म हो गए. लोग गंभीर रूप से बीमार पड़ने लगे. हालत इतनी खराब थी कि शहर में बने घरों का आकार भी बदलने लगा. वे गर्मी के असर से टेढ़े-मेढ़े होने लगे. खिड़कियों के रॉड पिघलने लगे. विशेषज्ञों की मानें तो सेंट्रालिया में जमीन के नीचे अभी भी इतना कोयला मौजूद है कि ये जगह करीब 250 साल तक लगातार जलती रहेगी.

शहर का पिन कोड भी नष्ट कर दिया गया, ताकि गलती से भी वहां कोई भटकता हुआ न चला जाए (Photo- flickr)


आखिरकार कई दुर्घटनाओं के बाद साल 1992 में शहर के लोगों को तत्कालीन सरकार ने बाहर बसाया. इससे पहले सरकार ने पूरा हिसाब लगाया कि आग बुझाने की पूरी कोशिश की जाए तो कितने पैसे खर्च हो सकते हैं. ये आंकड़ा खरबों में था. लिहाजा सरकार ने वहां के लोगों को आसपास के स्थानों में बसा दिया.

शहर का पिन कोड भी नष्ट कर दिया गया, ताकि गलती से भी वहां कोई भटकता हुआ न चला जाए. इस दौरान सेंट्रेलिया के कई लोगों ने अपनी प्रॉपर्टी बेचने की कोशिश की लेकिन कोर्ट ने इसपर सख्ती से रोक लगा दी, ये कहते हुए कि ऐसा करना मौत को दावत देने जैसा है.

वैसे जमीन के नीचे जलते इस शहर में आज भी 7 लोग रहते हैं. ये वे लोग हैं, जिन्होंने किसी भी हाल में अपना घर छोड़ने से मना कर दिया. इसपर भी भारी मुकदमे चले. अंत में कोर्ट ने तय किया कि वे सातों अपनी जिंदगी वहीं बिताएं लेकिन उनकी मौत के बाद उनके घरों का अधिकार सरकार के पास चला जाएगा.

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First published: June 6, 2020, 4:53 PM IST
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