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मेलोनी वो दक्षिणपंथी नेता जो मुसोलिनी के बाद बनेंगी इटली की पीएम

इटली की नई प्रधानमंत्री बन सकती हैं मेलोनी (विकी कामंस)

इटली की नई प्रधानमंत्री बन सकती हैं मेलोनी (विकी कामंस)

दूसरे विश्व युद्ध के दिनों में बेनितो मुसोलिनी इटली के प्रधानमंत्री थे. उनकी पार्टी का नाम ही द रिपब्लिकन फासिस्ट पार्ट ...अधिक पढ़ें

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हाइलाइट्स

मेलोनी नाजीवाद की समर्थक हैं और युवावय से ही नियो नाजी राजनीति करती रही हैं
बचपन अभावपूर्ण तरीके से गुजरा, पिता परिवार छोड़कर कहीं चले गए
बारटेंडर से लेकर छोटे मोटे बहुत से काम किए, संघर्ष करके आगे बढ़ीं

इटली में एक जमाने में कुख्यात मुसोलिनी जब राष्ट्रप्रमुख बने थे, तब इटली में उनकी पार्टी द रिपब्लिकन फासिस्ट पार्टी धुर दक्षिणपंथी थी. उसके बाद 75 साल बाद अब वहां फिर एक धुर दक्षिणपंथी गठबंदन सत्ता में आ रहा है. जिसकी नेता एक महिला हैं जियोर्जिया मेलोनी. वह इटली की पहली महिला प्रधानमंत्री बनने वाली हैं.

वह मुसोलिनी के बाद ये पद संभालने वाली पहली धुर दक्षिणपंथी नेता होंगी.मेलोनी 45 साल की हैं. उन्होंने खुद एक पार्टी ब्रदर्स ऑफ इटली बनाई. उसके जरिए युवा राजनीति में पहचान बनाई. 29 साल की उम्र में वह इटली की संसद की सदस्य बन गईं. जल्दी ही सिल्वियो बर्लुस्कोनी की सरकार में युवा मामलों की मंत्री बनाई गईं.

फिलहाल वह इटली के धुर दक्षिणपंथी गठबंधन यूरोपीयन कंजरवेटिव्स एंड रिफॉर्मेसिस्ट पार्टी की नेता हैं और यही गठबंधन चुनाव में जीत हासिल करके सत्ता में आने जा रहा है. मेलिना खुद पत्रकार रही हैं. शादी नहीं की है लेकिन दांपत्य में हैं. उनके पार्टनर एंड्रयू गियामब्रूनो भी टीवी पत्रकार हैं. इस दंपत्ति की एक बेटी भी है.

जीतने जा रहा है मेलोनी का गठबंधन
एग्जिट पोल के मुताबिक इटली में रविवार को हुए संसदीय चुनाव में राष्ट्रवादी नेता जियोर्जिया मेलोनी के नेतृत्व वाले धुर दक्षिणपंथी गठबंधन ने बहुमत हासिल कर लिया है. हालांकि मेलोनी के प्रधानमंत्री बनने की खबर बहुत से इटली वालों के लिए अच्छी नहीं है. क्योंकि मेलोनी अब कई तरह के कड़े कानूनों को लागू कर सकती हैं और कई रियायतें खत्म कर सकती हैं.अर्से से वह ये बात करती भी रही हैं.

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चुनावी रैली में भाषण देती हुई मेलिना (विकी कामंस)

पार्टी का नाम ब्रदर्स ऑफ इटली
एग्जिट पोल में मेलोनी के ब्रदर्स ऑफ इटली पार्टी के नेतृत्व वाले गठबंधन को लगभग 45 फीसदी वोट हासिल करते हुए दिखाया. मेलोनी की अपनी पार्टी खुद का 26 फीसदी वोट हासिल करती दिखी, जो चुनावों में सबसे मजबूत समूह बना.अब तक इटली की सत्ता में डेमोक्रेटिक पार्टी की अगुवाई वाला गठबंधन था

चुनाव में इटली के गर्व और ईसाईयत तो मुद्दा बनाया
मेलोनी और उनकी पार्टी ब्रदर्स ऑफ इटली ने चुनाव प्रचार के दौरान एजेंडा ऑफ गॉड के साथ मातृभूमि और ईसाई पहचान को मुद्दा बनाया. उन्हें इस बात की आलोचना भी झेलनी पड़ती है कि वो खुद की पहचान नव फासीवादी आंदोलन के तौर पर जताती हैं, जिसकी हमदर्दी अब भी बदनाम मुसोलिनी से है.

आइए जानते हैं उनके बारे में

मेलोनी ने किशोरवय में ही घऱ छोड़ दिया और राजनीतिक एक्विस्ट बन गईं. दरअसल उनका बचपन खराब रहा. मां को बहुत संघर्ष करना पड़ा. पिता अचानक घर छोड़कर चले गए. कहीं और बस गए. इसके बाद मेलोनी ने उन्हें कभी पिता के तौर पर स्वीकार नहीं किया. बचपन में उन्हें बारटेंडर से लेकर देश के फेमस पाइपर क्लब में बेबी सिटर का काम करना पड़ा.
वह रोम प्रांत में 1998 में पहली बार काउंसलर के तौर पर चुनी गईं. इसके बाद वह यूथ एक्शन नाम के दल में प्रेसीडेंट बन गईं. 2006 में वह इटली में सांसद बन गईं
2008 में वह प्रधानमंत्री बर्लुस्कोनी के मंत्रिमंडल में सबसे युवा मंत्री के तौर पर युवा मामलों की मंत्री बनीं. वर्ष 2011 तक वह इस पद पर बनीं रहीं.
वर्ष 2012 में उन्होंने फ्रेटली द इतालिया (ब्रदर्स ऑफ इटली) नाम की पार्टी बनाई और 2014 में इसकी अध्यक्ष बनीं लेकिन आगे की राह इतनी आसान नहीं थी. वर्ष 2018 के आमचुनावों में उनकी पार्टी को केवल 04 फीसदी वोट मिले लेकिन 04 सालों में ही इस पार्टी का वोट प्रतिशत 24 तक पहुंच गया
चुनावों में सबसे दमदार पार्टी के तौर पर उभरने से पहले उनकी पार्टी करीब डेढ़ सालों से देश की सबसे मजबूत विपक्षी पार्टी थी.
वह यूक्रेन युद्ध के कारण रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने के पक्ष में हैं और ये भी चाहती हैं कि यूरो को एक मुद्रा के तौर पर नहीं बनी रहे.साथ ही वह देश में सख्त एंटी ड्रग और एंटी एबार्शन चाहती हैं.
मेलोनी लगातार कहती रहीं कि उनका फोकस देश के राष्ट्रीय हितों की ओर है. यूरोपीय यूनियन की प्रखर आलोचक के तौर पर भी उनको जाना जाता है.
कोविड के समय उनके बयानों को लेकर वह काफी विवादों में रहीं, क्योंकि उन्होंने अपनी बेटी को ये कहकर वैक्सीन लगवाने से मना कर दिया कि 01 साल से 19 साल तक लोगों को कोविड से मरने की आशंका उतनी ही है, जितनी किसी की तड़ित से होने वाली मौत.
वह इटली में ईसाइत का दौर लौटाने के फेवर में हैं. चाहती हैं इटली के लोग अपने रोमन अतीत पर गर्व करें और उसको जानें. शरणार्थियों को लेकर उनके विचार काफी उग्र हैं. वह बिल्कुल नहीं चाहतीं कि शरणार्थियों को देश में आसानी से जगह मिले.
हालांकि उनके दक्षिण पंथी विचारों और ईसाईत की पैरोकारी के कारण देश के बहुत से लोग इस बात को लेकर डर रहे हैं कि इटली में कहीं मुसोलिनी युग जैसा कट्टर धार्मिक माहौल ना बनने लगे.

Tags: Italy, Prime minister

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