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भारत की कोशिश से बदलेगी सूरत! अब अनुमान से कम गर्म होगी धरती, जानिए कैसे?

भारत की कोशिश से बदलेगी सूरत! अब अनुमान से कम गर्म होगी धरती, जानिए कैसे?

प्रतीकात्मक तस्वीर.

प्रतीकात्मक तस्वीर.

स्कॉटलैंड के प्रमुख शहर ग्लासगो में चल रहा वैश्विक जलवायु सम्मेलन दूसरे सप्ताह में पहुंच गया है. अब तक इस सम्मेलन में दुनिया के कई दिग्गज नेता भाग ले चुके हैं. उम्मीद की जा रही है कि इस शिखर सम्मेलन के मद्देनजर विभिन्न देशों की ओर से घोषित प्रतिबद्धताओं से दुनिया भविष्य में ग्लोबल वार्मिंग के गंभीर दुष्परिणामों को थोड़ा कम कर सकती है. इस बारे में सामने आए दो नए प्रारंभिक वैज्ञानिक विश्लेषणों में यह बात कही गई है.

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    वैश्विक जलवायु सम्मेलन के मद्देनजर दुनिया के तमाम देशों ने अपनी ओर से ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में कटौती करने की प्रतिबद्धता जताई है. इसमें भारत, ऑस्ट्रेलिया और सऊदी अरब जैसे देश प्रमुख हैं. भारत ने अपनी तरफ से 2070 तक ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन शून्य पर लाने का लक्ष्य तय किया है.

    अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी की रिपोर्ट और ऑस्ट्रेलियाई वैज्ञानिकों की एक रिपोर्ट में भविष्य के लिए आशा जताई गई है. उनका कहना है कि अगर सब सही होता है तो हाल के कदमों से भविष्य में धरती के तापमान में 0.3 से 0.5 डिग्री फारेनहाइट तक की कमी आ सकती है.

    सुधरेगी स्थिति
    विश्लेषणों में पूर्व औद्योगिक काल के बाद से 2.1 डिग्री सेल्सियस वार्मिंग के बजाय 1.8 या 1.9 डिग्री सेल्सियस वार्मिंग का अनुमान जताया गया है. हालांकि दोनों विश्लेषणों में दुनिया 1.5 डिग्री सेल्सियस की वार्मिंग से दूर है जिसका लक्ष्य 2015 के पेरिस जलवायु समझौते में तय किया गया. पृथ्वी पहले ही 1.1 डिग्री सेल्सियस तक गर्म हो गई है.

    मेलबर्न विश्वविद्यालय के जलवायु वैज्ञानिक माल्टे मेनशॉसेन ने कहा, ‘‘हमारा अब भविष्य के लिए थोड़ा और सकारात्मक रुख है.’’ उन्होंने 1.9 डिग्री सेल्सियस तक वार्मिंग का अनुमान जताया है और इसके लिए भारत तथा चीन द्वारा दीर्घकालीन प्रतिबद्धताओं को जिम्मेदार ठहराया है.

    उन्होंने एक साक्षात्कार में कहा, ‘‘यह अब भी 1.5 डिग्री से काफी दूर है. हम जानते हैं कि यह पारिस्थितिकी को नुकसान पहुंचने वाला है. यह दो डिग्री सेल्सियस से थोड़ा ही कम है, इसलिए काफी कुछ किए जाने की जरूरत है.’’

    भारत की प्रतिबद्धता को ध्यान में रखते हुए विश्लेषण
    ऊर्जा एजेंसी ने सोमवार को कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन पर अल्पकालीन कटौती और 2070 तक शून्य उत्सर्जन की भारत की प्रतिबद्धता को ध्यान में रखते हुए विश्लेषण किया है. साथ ही विश्लेषण में ग्रीनहाउस गैस मिथेन में कमी लाने के लिए मंगलवार को 100 से अधिक देशों द्वारा की गयी प्रतिबद्धताओं पर विचार किया गया है.

    अंतरसरकारी एजेंसी का कहना है कि यह पहली बार है जब अनुमान दो डिग्री सेल्सियस से कम जताया गया है. एजेंसी के प्रमुख फातिह बिरोल ने सीओपी26 में नेताओं से कहा, ‘‘अगर इन सभी प्रतिबद्धताओं को लागू किया गया तो तापमान में वृद्धि को 1.8 डिग्री सेल्सियस तक सीमित किया जा सकता है.’’

    आईएमएफ ने भारत की घोषणा की सराहना की
    अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने ग्लासगो में आयोजित हुए सीओपी26 शिखर सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए भारत द्वारा की गई घोषणा का स्वागत किया है. आईएमएफ के संचार विभाग के निदेशक गैरी राइस ने पिछले दिनों कहा, ‘‘हम 2070 तक निवल शून्य लक्ष्य के अनुकूल ढलने समेत नवीकरणीय ऊर्जा पर निर्भरता बढ़ाने और अपनी अर्थव्यवस्था पर कार्बन की महत्ता को कम करने के नए लक्ष्यों को लेकर सीओपी26 में की गई भारत की घोषणा का स्वागत करते हैं.’’

    उन्होंने कहा, ‘‘जैसा कि आप जानते हैं कि भारत इस समय दुनिया के सबसे बड़े उत्सर्जकों में से एक है. वह विद्युत उत्पादन के लिए अब भी कोयले पर अत्यधिक निर्भर है, इसलिए उसके द्वारा उठाए गए कदम अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं को भी कदम उठाने के लिए प्रेरित कर सकते हैं.’’

    भारत की कोशिश पर भरोसा
    राइस ने एक सवाल के जवाब में कहा कि नवीकरणीय और जलवायु परिवर्तन से निपटने के अनुकूल नीतियों में भारत का उल्लेखनीय निवेश संकेत देता है कि वह अपने नए लक्ष्य तक पहुंचने के लिए आगे की ओर कदम उठाने को पूरी तरह तैयार है. उन्होंने कहा कि हम वैश्विक स्तर पर न्यूनीकरण के कदमों की तत्काल आवश्यकता के मद्देनजर मौजूदा दशक में भारत के उठाए कदमों की प्रशंसा करते हैं.

    पीएम मोदी ने की थी ये घोषणा
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सीओपी20 शिखर सम्मेलन में साहसिक घोषणा करते हुए कहा था कि भारत वर्ष 2070 में कुल शून्य उत्सर्जन का लक्ष्य प्राप्त करेगा. मोदी ने राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (एनडीसी) के तहत गैर जीवाश्म ईंधन ऊर्जा क्षमता को 450 गीगा वाट से बढ़ाकर 500 गीगावाट करने की घोषणा की.

    पीएम मोदी ने कहा था कि भारत 500 गीगावाट गैर जीवाश्म ईंधन क्षमता 2030 तक हासिल करेगा. भारत 2030 तक अपनी ऊर्जा जरूरतों का 50 प्रतिशत नवीकरणीय ऊर्जा से प्राप्त करेगा. भारत अब से 2030 के बीच अनुमानित कार्बन उत्सर्जन में एक अरब टन की कटौती करेगा. भारत कार्बन की गहनता में 45 प्रतिशत तक कटौती करेगा और 2070 तक शून्य उत्सर्जन के लक्ष्य को प्राप्त करेगा.

    Tags: Climate Change, Climate change in india, Climate change report

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