कितनी सही हैं जलवायु आपातकाल में हवा को ठंडा करने की अमेरिकी एकेडमी की तकनीकें

ग्लोबल वार्मिंग (Global warming) के कारण गर्म हो रहे वायुमडंल को ठंडा करने प्रयास जोखिम भरे हो सकते हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

ग्लोबल वार्मिंग (Global warming) के कारण गर्म हो रहे वायुमडंल को ठंडा करने प्रयास जोखिम भरे हो सकते हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

अमेरिका की नेशनल साइंस एकेडमी (National Science Academy) ने जलवायु आपातकाल (Climate Emergency) से निपटने के लिए कुछ जियोइंजीनियरिंग (Geoengineering) के जोखिम भरे उपायों पर विचार करने की अनुशंसा की है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 28, 2021, 1:00 PM IST
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ग्लोबल वार्मिंग ( Global Warming) और जलवायु परिवर्तन के नुकसान से पूरी दुनिया के वैज्ञानिक चिंचित हैं. आए दिन शोध और रिपोर्ट में इन खतरों के असर के बारे में कोई ना कोई नई जानकारी मिलती रहती है. अब अमेरिका का नेशनल एकेडमी ऑफ साइंस (National Academy of Sciences) का सुझाव है कि अमेरिका को अब वायुमंडल (Atmosphere) को ठंडा करने के बारे में गंभीरता से विचार करना चाहिए.

ग्रह की मरम्मत

एकेडमी का कहना है कि अमेरिका को इस तरह के शोधों में तेजी लानी चाहिए कि इंसानों को कैसे हमारे नीले ग्रह की मरम्मत करनी चाहिए. यह एकेडमी अमेरिका के पहले राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन ने स्थापित की थी. इसका काम सरकार को विशेषज्ञ सलाह देना है. एकेडमी की रिपोर्ट यह अनुशंसा नहीं करती कि सौर जियोइंजिनियरिंग का उपयोग कर सूर्य से आने वाली किरणों को प्रतिबिंबित कर दिया जाए.

जलवायु आपातकाल के लिए
एकेडमी का कहना है कि आपातकालीन योजनाओं पर विचार करना जरूरी है. क्योंकि जलवायु परिवर्तन के कारण चरमता की ओर बढ़ते मौसमों और खराब होते जा रहे हैं. ऐकेडमी ऐसा तभी से देख रही है जब से 2015 में उसने इस विषय को अपने हाथ में लिया है. वायुमंडल की हवा में सुधारने की तकनीक पर काम करने के लिए समन्वयात्मक शोध की जरूरत होगी. क्योंकि इसके बुरे असर भी देखने को मिल सकते हैं.

ये तीन तरीके

रिपोर्ट के मुताबिक हवा को ठंडी करने के तीन तरीके हो सकते हैं. एक तो समतापमंडल में ऊष्मा प्रतिबिंबित करने वाले कणों को डाल दिया जाए, दूसरे तरीके में समुद्री बादलों की चमक कम कर दी जाए और तीसरे तरीके में ऊंचे बादलों को ही पतला कर दिया जाए.



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वर्तमान जलवायु परिवर्तन (Climate Change) को देखते हुए लग रहा है कि जलवायु आपातकाल दूर नहीं हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


कुछ नहीं से बेहतर

इस रिपोर्ट के सहलेखक और और क्रिप्स इंस्टीट्यूट ऑफ ओसियानोग्राफी के एटमॉस्फियरिक केमिस्ट लिन रसेल का कहना है कि क्लाइमेट इंजीनियरिंग अच्छा विचार नहीं हैं, लेकिन यह इस समय कुछ नहीं करने से या फिर जो हम कर रहे हैं उसे करते रहने से बुरा नहीं है. इसमें बहुत ज्यादा जोखिम है और उन्हें जितना हम समझ सकेंगे उतना अच्छा होगा.

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नतीजे सुनिश्चित नहीं

पैनल का अनुशंसा है कि अमेरिका को एक साल में 4 करोड़ डॉलर शोधकार्य पर खर्च करना चाहिए. इसमें वे अध्ययन भी शामिल होंगे जिनके शोध में अप्रत्याशित लेकिन अस्वीकार्य जोखिम पता लगेगा. इस कमेटी के चेयरमैन और स्टैनफोर्ट यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक क्रिस फील्ड का कहा, “मैं वाकई नहीं जानता कि क्या ये वास्तव में नतीजे देंगे भी या नहीं.”

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जिस तरह से पृथ्वी (Earth) गर्म हो रही है वह दूर नहीं कि हमें जोखिम भरे कदम उठाने ही होंगे. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


इन विचारों का विरोध भी

ऐसा नहीं है कि एकेडमी के इन सुझावों की आलोचना नहीं हो रही है. ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के रेमंड पियरेहैमबर्ट इस पर चिंता जताते हुए कहते हैं कि कार्बन प्रदूषण में कटौती करने के बजाए ये विचार आकर्षित करते लगते हैं. जियोइंजीनियरिंग शब्द यह भ्रम फैलाता लगता है कि इंसानों का ऊष्मा पर इस हद तक कोई नियंत्रण हो सकता है.

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वहीं टेक्सासय एएंडएम यूनिवर्सीट के एंड्रयू डेसलर जियोइंजीनियरिंग को भविष्य में ग्रह सुरक्षा के हिस्से के तौर पर देखते हैं. उनका मानना है ये बिलकुल कारों के एयरबैग के जैसे हैं जिनकी कोई उपयोगिता नहीं दिखती. वहीं गौर करने वाली बात यह भी है कि ऐसे बहुत सारे प्रयोग हो रहे हैं. इसके अलावा खतरों को देखते हुए जोखिम भरे विचारों पर शोध जरूरी भी माना जा रहा है.
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