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Golden Jubilee of Statehood: कैसे बने मेघालय, मणिपुर और त्रिपुरा पूर्ण राज्य

Golden Jubilee of Statehood: कैसे बने मेघालय, मणिपुर और त्रिपुरा पूर्ण राज्य

मेघालय, मणिपुर और त्रिपुरा को पूर्ण राज्य (Full State) का दर्जा पूर्वोत्तर (पुनर्गठन) 1971 अधिनियम के तहत हुआ था. (तस्वीर: Wikimedia Commons)

मेघालय, मणिपुर और त्रिपुरा को पूर्ण राज्य (Full State) का दर्जा पूर्वोत्तर (पुनर्गठन) 1971 अधिनियम के तहत हुआ था. (तस्वीर: Wikimedia Commons)

    पांच दशक पहले भारत (India) के उत्तरपूर्व (North East) के राज्यों में एक बड़ा फेरबदल  हुआ था. 21 जनवरी 1972 को मणिपुर, त्रिपुरा और मेघालय नाम के तीन राज्यों का गठन हुआ था. आजादी के बाद इन राज्यों का भारत में विलय देश के गणतंत्र में हो चुका था. लेकिन तब ये तीनों हिस्से स्वतंत्र राज्य नहीं बने थे. लेकिन 1972 में पूर्वोत्तर (पुनर्गठन) 1971 के तहत 21 जनवरी 1972 को तीन राज्य मेघालय, मणिपुर और त्रिपुरा राज्य अस्तित्व में आए थे. ये तीनों अलग राज्य के रूप में अस्तित्व क्यों और कैसे आए इसकी अलग अलग कहानी है.

    दो जिलों का मिलन मेघालय
    मेघालय का गठन पुराने असम राज्य के दो जिलों को मिला कर किया गया था. एक जिला खासी पहाड़ों और जयंतिया पहाड़ों से मिल कर बना था तो वहीं दूसरा जिला गारो पहाड़ों से बना था. इन्हें मिला कर ही मेघालय का गठना 21 जनवरी 1972 को हुआ था. इसका क्षेत्रफल 22430 वर्ग किलोमीटर है. इसकी सीमा ऊपर में असम और नीचे बांग्लादेश से मिलती है.

    असम का हिस्सा रहा
    मेघालय आजादी से काफी समय पहले से ही असम का हिस्सा था. मेघालय  की खासी गारो और जयंतिया जनजातियों के अपने राज्य हुआ करते थे. 19वीं सदी में ये तीनों ब्रिटिश प्रशासन के अंतर्गत आ गए. 1905 में बंगाल विभाजन के बाद मेघालय पूर्वी बंगाल और असम का हिस्सा हो गया 1912 में यह विभाजन खत्म हो गया और मेघालय असम में आ गया था.

    आदोलन चला था इसके लिए
    आजादी के बाद भी मेघालय असम का हिस्सा रहा, लेकिन 1960 से इसके अलग राज्य की मांग उठी. 1969 में यह अलग राज्य तो बना, लेकिन अपनी खुद की विधान सभा वाला संपूर्ण राज्य 1972 में ही बन सका. आज भारत मे सबसे ज्यादा बारिश होने वाली जगहें मेघालय में ही हैं.

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    मेघालय (Meghalaya) में पर्वतों पर अक्सर बादल छाए रहते हैं. (तस्वीर: Wikimedia Commons)

    मणिपुर की अहमियत
    20वीं सदी में 1940 के दशक में मणिपुर और उसकी राजधानी इम्फाल की बहुत अहमियत रही. द्वितीय विश्व युद्ध में मणिपुर और खासतौर से इंफाल की बहुत ज्यादा रणनीतिक अहमियत थी. जापानियों ने सबसे पहले इसे ही अपने कब्जे में लेने का प्रयास किया था. उनकी यहां नाकामी ही द्वितीय विश्व युद्ध में एशिया के लिए निर्णायक मोड़ साबित हुई थी. आजादी के बाद मणिपुर भारत से जुड़ा रहा, लेकिन इसका भारत में पूर्ण विलय 1949 में हुआ.

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    म्यांमार से सड़क संपर्क
    मणिपुर को 1956 में केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया. उत्तर में नागालैंड, दक्षिण में मिजोरम और पश्चिम में असम और पूर्व में म्यांमार से सीमा साझा करने वाला मणिपुर का क्षेत्रफल 22.347 वर्ग किलोमीटर है. यहां मीतई जनजाति के लोग ज्यादा हैं जो घाटयों में रहते हैं. इनकी मेइतिलोन भाषा को ही मणिपुरी भाषा कहते हैं. मणिपुर से ही एक सड़क म्यांमार तक जाती है.

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    मणिपुर की राजधानी इम्फाल (Imphal) द्वितीय विश्व युद्ध के समय से एकअहम शहर रहा है. (तस्वीर: Wikimedia Commons)

    त्रिपुरा भारत का तीसरा सबसे छोटा राज्य
    केवल 10491 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल वाला त्रिपुरा भारत का तीसरा सबसे छोटा राज्य है. यह उत्तर, पश्चिम और दक्षिण तीनों ओर से बांग्लादेश से घिरा है. पूर्व में असम और मिजोरम से इसकी सीमा लगती है. 1808 में अंग्रेजों ने इसे जीता था, लेकिन यह स्वाशासित राज्य बना रहा. 1949 में यह भारत की सी स्टेट बन गया.

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    1956 में त्रिपुरा भारत का बिना विधानसभा वाला संघ शासित प्रदेश बन गया. और अंततः 1972 में यह पूर्ण राज्य का दर्जा हासिल कर सका. त्रिपुरा उन राज्यों में से ही जिसे भारत पाकिस्तान के विभाजन का सबसे बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ा. आज यहां से कोलकाता बहुत घूम कर जाना होता है. यहां रेल कीअनुपस्थिति ने समस्या को गंभीर ही किया. साल 2008 में यहां रेल लाइन ने काम करना शुरू किया जो 2016के बारे मीटर गेज में बदल गई.

    Tags: India, North East, Research

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