गूगल ने डूडल के जरिए महान मराठी लेखक पीएल देशपांडे को किया याद

पुरुषोत्तम लक्ष्मण देशपांडे नाम का ये शख्स मराठी लेखक और संगीतकार है (Photo-goodle doodle)
पुरुषोत्तम लक्ष्मण देशपांडे नाम का ये शख्स मराठी लेखक और संगीतकार है (Photo-goodle doodle)

सर्च इंजन गूगल (Google) पर आज एक शख्स हारमोनियम बजाने में रमा दिख रहा है. वाद्ययंत्र पर 'पुल' लिखा हुआ है. पुरुषोत्तम लक्ष्मण देशपांडे (Purushottam Laxman Deshpande) नाम का ये शख्स मराठी लेखक और संगीतकार है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 8, 2020, 11:16 AM IST
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आज 8 नवंबर का गूगल डूडल पुरुषोत्तम लक्ष्मण देशपांडे (google doodle on Purushottam Laxman Deshpande) के नाम किया गया है. 101वीं वर्षगांठ पर समर्पित इस डूडल के जरिए मराठी के महान लेखक, संगीतकार और निर्देशक को याद किया गया. डूडल में वे हारमोनियम बजाते हुए दिख रहे हैं. साथ ही हारमोनियम पर पुल लिखा हुआ है. बता दें कि वे अपने नाम को पु ल देशपांडे लिखा करते थे. जानिए, कौन हैं ये शख्स.

कला और संस्कृति के लिए उर्वर जमीन महाराष्ट्र ने कई जाने-माने लेखकों और कलाकारों को जन्म दिया. पु ल देशपांडे भी उनमें से एक हैं. वे मराठी में जनमानस की व्यथा और उनके संघर्षों को शब्द दिया करते थे. साथ ही साथ संगीत और निर्देशन जैसी कलाओं पर भी उनका समान अधिकार रहा. मराठी के अलावा वे अंग्रेजी और कन्नड़ के भी ज्ञाता थे और अक्सर अलग-अलग तरह की संस्कृतियों का मेल उनके लेखन या निर्देशन में दिखता था.

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नवंबर 8, 1919 को मुंबई में जन्मे पुरुषोत्तम लक्ष्मण देशपांडे को साहित्य विरासत में मिला. उनके दादा ने रवींद्रनाथ टैगोर की काव्य कृति गीतांजलि का मराठी में अनुवाद किया था, ताकि वो जनमानस तक पहुंच सके. यहां बता दें कि गीतांजलि को साहित्य के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था.
पुरुषोत्तम लक्ष्मण देशपांडे को साहित्य विरासत में मिला


साहित्य के माहौल में पलते-बढ़ते हुए ही पु ल देशपांडे में अपनी पढ़ाई-लिखाई की. उन्होंने हालांकि एलएलबी की भी पढ़ाई की लेकिन वकालत की कभी शुरुआत नहीं की. इसकी बजाए वे जल्दी ही लेखन और संगीत में रमने लगे. उनकी नजरें काफी पारखी थीं इसलिए वे जहां भी जाते, अपने लिए लिखने का कोई न कोई विषय खोज लेते थे. ये खासियत उनके लेखन में भी झलकती है.

दूसरे लेखकों से अलग उनका लेखन बहुआयामी था, यानी कई विधाओं में वे एक साथ लिखा करते थे, जैसे उन्होंने मराठी उपन्यास भी लिखे, निबंध भी और नाटक भी. यहां तक कि पु ल देशपांडे ने मराठी में बच्चों के लिए कविताएं भी लिखीं. इनमें से एक कविता- नाच रे मोर, आज भी महाराष्ट्र में काफी लोकप्रिय है. इसके अलावा एक पत्रकार की तरह उन्होंने देश के पूर्व प्रधानमंत्री पं जवाहरलाल नेहरू का साक्षात्कार भी लिया था.

लेखन के साथ ही साथ वे हारमोनियम के भी अच्छे-खासे जानकार थे. यही वजह है कि वे अपने समय के जाने-माने गायकों को संगत दिया करते थे. साथ ही साथ उनकी अपनी रिकॉर्डिंग्स भी काफी हिट रहीं.

लेखन के साथ ही साथ वे हारमोनियम के भी अच्छे-खासे जानकार थे


वैसे पु ल देशपांडे की निजी जिंदगी काफी उतार-चढ़ाव से भरी रही. 1940 की शुरुआत में उनकी पत्नी की निधन हो गया. इससे वे काफी समय तक परेशान रहे थे. इसका जिक्र उन्होंने अपने मित्रों से पत्रों में भी किया था. इस तकलीफ से उन्हें उनकी कला ने ही बाहर निकाला. वे नाटकों की प्रैक्टिस में रम गए. इसी दौरान उनकी मुलाकात मराठी रंगमंच की शानदार कलाकार सुनीता ठाकुर से हुई. जल्दी ही वे दोनों शादी के बंधन में बंध गए.

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इसके साथ ही देशपांडे एक बार फिर पूरी ताकत से रचनात्मक लेखन और फिल्म निर्माण में लग गए. मराठी फिल्मों कुबेर, भाग्यरेषा, वंदे मातरम काफी हिट फिल्में रहीं. साथ ही उन्होंने कई फिल्मों के लिए कहानी लेखन और संवाद लेखन का काम भी किया. लगातार कला के क्षेत्र में योगदान के लिए उन्हें कई पुरस्कार मिले. कालिदास सम्मान, महाराष्ट्र भूषण अवार्ड, संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार और पद्म भूषण भी उन्हें मिल चुका है.

12 जून साल 2000 को पुणे में इस बेहद लोकप्रिय रचनाकार का निधन हो गया. इस दौरान वे राज्य में हर वर्ग के बीच इतने लोकप्रिय हो चुके थे कि उन्हें महाराष्ट्र का लाडला भी बोला जाने लगा.
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