लाइव टीवी

गूगल डूडल : बर्लिन की दीवार क्यों खड़ी हुई और फिर गिराई गई

News18Hindi
Updated: November 9, 2019, 10:22 AM IST
गूगल डूडल : बर्लिन की दीवार क्यों खड़ी हुई और फिर गिराई गई
30 साल पहले बर्लिन की जो दीवार गिराई गई थी, उस पर गूगल ने डूडल बनाया है

दूसरे विश्व युद्ध के बाद जब जर्मनी दो देशों में बंट गया तो राजधानी बर्लिन के बीचों बीच एक दीवार खड़ी कर दी गई ताकि कोई भी एक देश से दूसरे देश में नहीं जा पाए. जब ये दीवार टूटी तो लोगों ने बहुत खुशियां मनाईं

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 9, 2019, 10:22 AM IST
  • Share this:
09 नवंबर के दिन बर्लिन की दीवार अचानक गिर गई. ये जर्मनी ही नहीं दुनियाभर के लिए एक ऐतिहासिक दिन था. गूगल ने इसकी याद में आज एक खास गूगल डूडल बनाया है. इस दीवार ने 28 सालों तक बर्लिन शहर को पश्चिम और पूर्व में बांटा था. इसे गिरे अब तीस साल बीत चुके हैं.

बर्लिन शहर को दो हिस्सों में बांटने वाली दीवार 13 अगस्त 1961 को खड़ी की गई. 09 नवंबर 1989 को ये गिरा दी गई. दरअसल दूसरे विश्व युद्ध के बाद जर्मनी दो देशों में भी बंट गया था. पूर्वी जर्मनी और पश्चिमी जर्मनी. इन दोनों देशों का भी दीवार गिरने के बाद एकीकरण हो गया था.

1950 और 1960 के दशक के शीत युद्ध में पश्चिमी देश बर्लिन को पूर्वी ब्लॉक की जासूसी के लिए भी इस्तेमाल करते थे. जब तक सीमा खुली थी तो वे रूसी सेक्टर में चले जाते थे. 1960 में लगभग 80 जासूसी सेंटर थे. इतने ही सेंटर पूर्वी ब्लॉक के खिलाफ भी काम कर रहे थे. इस तरह के जासूसी युद्ध को उस जमाने में खामोश युद्ध कहा जाता था.

कब और क्यों बनी ये दीवार

इन्हीं सब वजहों से परेशान हो कर 1961 में 12 और 13 अगस्त की रात पूर्वी और पश्चिमी बर्लिन की सीमा को बंद कर दिया गया. हजारों सैनिक सीमा पर तैनात किए गए और मजदूरों ने कंटीले तार लगाने शुरू किए. इसके बाद वहां दीवार बननी शुरू हुई. यह काम रात को एक बजे शुरू किया गया. सड़कों पर जलने वाली लाइटें भी बंद कर दी गईं ताकि पश्चिमी हिस्से के लोगों को पता न चले.

सुबह तक शहर दो हिस्सों में बंट चुका था और लोगों को पता ही नहीं चल रहा था कि क्या हो रहा है. समय बीतता गया और लोग दीवार पार कर अपनों से मिलने की कोशिश करते रहे.

बर्लिन के बीचों बीच दीवार खड़ी होने से ये शहर दो भागों में बंट गया

Loading...

करीब तीन दशक तक पूर्वी और पश्चिमी बर्लिन को अलग अलग रखने के बाद आखिरकार साल 1989 में बर्लिन की दीवार गिरा दी गई. दीवार का गिरना आखिरकार जर्मन एकीकरण का कारण साबित हुआ.

क्या हुआ था जर्मनी के विभाजन के बाद 
दूसरे विश्व युद्ध के बाद जब जर्मनी का विभाजन हो गया, तो सैंकड़ों कारीगर और व्यवसायी रोज पूर्वी बर्लिन को छोड़कर पश्चिमी बर्लिन जाने लगे. बहुत से लोग राजनैतिक कारणों से भी समाजवादी पूर्वी जर्मनी को छोड़कर पूंजीवाद जर्मनी यानि पश्चिमी जर्मनी जाने लगे. इससे पूर्वी जर्मनी को आर्थिक और राजनीतिक रूप से बहुत हानि होने लगी. बर्लिन दीवार का उद्देश्य इसे रोकना था. इस दीवार के विचार की कल्पना वाल्टर उल्ब्रिख्त ने की थी. सोवियत नेता निकिता ख्रुश्चेव ने इसे मंजूरी दी.

पूर्वी जर्मनी और पश्चिमी जर्मनी के बीच ये दीवार सोवियत संघ के इशारों पर खड़ी की गई थी


दीवार ने रोक दिया आना जाना 
बर्लिन की दीवार बनने से यह प्रवास बहुत कम हो गया. 1949 से 1962 के बीच जहां पूर्वी जर्मनी से 25 लाख लोग सीमा पार कर पश्चिमी जर्मनी में पहुंचे तो इस दीवार बनने के बाद 1989 तक केवल 5000 लोग.

हालांकि इस दीवार का बनना समाजवादी गुट के प्रचार तंत्र के लिए बहुत बुरा साबित हुआ. पश्चिम के लोगों के लिए यह समाजवादी अत्याचार का प्रतीक बन गई, खास तौर पर जब बहुत से लोगों को सीमा पार करते हुए गोली मार दी गई.

बहुत से लोगों ने सीमा पार करने के अनोखे तरीके खोजे. इसमें सुरंग, गरम हवा के गुब्बारे, दीवार के ऊपर गुजरती तारों पर खिसकना शामिल था.

30 साल पहले 09 नवंबर के दिन जब ये दीवार टूटी तो दोनों जर्मनी देशों में खुशी की लहर दौड़ गई


1980 के दशक में सोवियत संघ के पतन और कई टुकड़ों में बंटने के बाद पूर्वी जर्मनी में राजनीतिक उदारीकरण शुरू हुआ. सीमा नियमों को ढीला किया गया. फिर पूर्वी जर्मनी में बहुत से प्रदर्शन हुए. आखिरकार वहां सरकार गिर गई.

जब लोगों ने इस दीवार को तोड़ा तो इसके टुकड़े यादगार के तौर पर ले आए. बर्लिन दीवार के गिरने से पूरे जर्मनी में नए राष्ट्रवाद का उदय हुआ. इसके परिणामस्वरूप पूर्वी जर्मनी के लोगों ने जर्मनी के साथ एकीकरण पर मंजूरी दी. तीन अक्टूबर 1990 को जर्मनी फिर एक देश बन गया.

ये भी पढें- नेहरू ने क्‍यों कहा था कि मैं ब्राह्मण हूं और ब्राह्मण ही रहूंगा
जब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राममंदिर-बाबरी मस्जिद परिसर को 3 हिस्सों में बांटा था
जानिए कौन हैं वो 5 जज, जो देश के सबसे बड़े मुकदमे का ऐतिहासिक फैसला सुनाएंगे

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए नॉलेज से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: November 9, 2019, 10:00 AM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...