वैज्ञानिकों ने 39 खगोलीय घटनाओं की गुरुत्व तरंगों को पकड़ा, जानें इनकी अहमियत

इतनी ज्यादा गुरुत्व तरंगें (Gravitational Waves) 39 अलग अलग घटनाओं की वजह से पैदा हुईं.  (प्रतीकात्मक तस्वीर: R. Hurt/Caltech-JPL)
इतनी ज्यादा गुरुत्व तरंगें (Gravitational Waves) 39 अलग अलग घटनाओं की वजह से पैदा हुईं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: R. Hurt/Caltech-JPL)

LIGO और VIRGO वेधशालाओं ने पिछले छह महीने में 39 खगोलीय घटनाओं से जन्मी गुरुत्व तरंगों (Gravitational Waves) को पकड़ा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 29, 2020, 7:00 PM IST
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गुरुत्व तरंगों (Gravitational Waves) बहुत ही संवेदनशील होती हैं उन्हें अवलोकित करना बहुत ही मुश्किल काम होता है लेकिन फिर भी दुनिया में कई ऐसी वेधशालाएं (Observatories) हैं जो इन गुरुत्व तरंगों को पकड़ सकती हैं. 2016 में वैज्ञानिकों ने सबसे पहले गुरुत्व तरंगों को पहली बार पकड़ा था जिसके बाद गुरुत्व तरंगों को औपचारिक तौर पर विज्ञान में मान्यता मिली थी. हाल ही में LIGO और Virgo की वेधशालाओं में एक दो नहीं 39 अलग अलग गुरुत्व तरंगों को पकड़ा गया है.

पिछले छह ही महीनों में
पिछले छह महीनों में वैज्ञानिकों ने गुरुत्व तरंगों को 39 बार अवलोकित किया है. ये तरंगें  दो ब्लैक होल के विलय जैसी प्रचंड घटनाओं द्वारा पैदा की गई थीं. इसमें स्पेस टाइम को खींचने और सिकोड़ने की क्षमता थी. LIGO और Virgo  के शोधकर्ताओं ने इन घटनाओं के अपने अध्ययनों को हाल ही में प्रकाशित किया है.

कितनी घटनाओं का पता चल गया था तभी
लिगो वेबसाइट की रिपोर्ट के अनुसार शोधकर्ताओंने एडवांस LIGO और एडवांस Virgo में एक अप्रैल 2019 और 1 अक्टूबर 2019 के बीच कॉम्पैक्ट बाइनरी विलय से आई इन गुरुत्व तरंगों की खोज के बारे में जानकारी दी. शोधकर्ताओं का कहना है कि इन 39 घटनाओं में से 26 की जानकारी तभी दे दी गई थी जबकि 13 घटनाएं पहली बार बताई जा रही हैं.



किन घटनाओं ने पैदा किया इन तरंगों को
शोधकर्ताओं ने इसके साथ ही इन घटनाओं के स्रोत की भी जानकारी दी. उनके मुताबिक इन घटनाओं के पीछे बाइनरी ब्लैकहोल विलय से लेकर न्यूट्रॉन तारों, न्यूट्रॉन तारे-ब्लैक होल की बाइनरी  या फिर बाइनरी ब्लैक होल तक हो सकते हैं.

Black Hole
इन तरंगों (Waves) से बाइनरी ब्लैकहोल (Black Hole) के बारे में जानकारी मिल सकती है. (तस्वीर : NASA_JPL-Caltec )


क्या होती हैं ये तरंगें
नासा के मताबिक गुरुत्व तरंगें अंतरिक्ष में बहुत तेजी से कंपन करने वाली दिखाई न पाने वाली तरंगे हैं. गुरुत्व तरंगों का विचार सबसे पहले अल्बर्ट आइंस्टीन ने दिया था. उनका कहना था कि जब दो खगोलीय पिंड एक दूसरे का चक्कर लगाते हैं तो उससे अंतरिक्ष में एक लहर पैदा होती है. जैसे तालाब में पत्थर फेंकने पर लहर बनती है. वैज्ञानिकों ने इस गुरुत्व तरंग का नाम दिया है.

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क्या जानकारी मिल सकती है इनसे
साइंस न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार LIGO कॉलेब्रेशन के सदस्य और न्यूयॉर्क में रोचेस्टर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के खगोलभौतिकविद रिचर्ड ओ शॉघनेसी ने बताया कि विलय हो चुके ब्लैकहोल बहुत विशाल लगते हैं और तेजी से घूमते लगते हैं. ऐसी जानकारी वैज्ञानिकों का उन प्रक्रियाओं को जानने में मददगार होती है जिससे ब्लैक होल टकराने से पहले एक साथ जुड़े थे.

Neutron Star, Gravitational Waves
इन तरंगों से न्यूट्रॉन तारे (Neutron Star)और ब्लैक होल के विलय की जानकारी मिलने की उम्मीद है.


ब्लैक होल के बारे में मिल सकती है जानकारी
शोधकर्ताओं का मानना है कि इस बार के अवलोकनों ने कई नई जानकारियां दी हैं जिससे उन्हें पता चला है कि बाइनरी ब्लैकहोल के बारे में वे जितना जान पाए थे उससे कहीं ज्यादा जानने को है. इसके अलावा इन विलय की घटनाओं के बारे में इन तरंगों से ज्यादा पता नहीं चलता है. इनसे केवल हमें ब्लैकहोल का सीधे अध्ययन करने का मौका मिलता है. क्योंकि उनसे किसी और तरह का विकिरण नहीं निकलता है.

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शोधकर्ताओं का कहना कि विलय होते ब्लैक होल और बाइनरी न्यूट्रॉन तारे एक खास तरह की प्रयोगशाला हो सकते हैं. उनका मानना है कि गुरुत्व तरंगों से गुरुत्व और खगोलभौतकी दोनों ही का अध्ययन किया जा सकता है. लिगो और वर्गो ने वैज्ञानिकों को इन बाइनरी पिंडों के बारे में जानकारी हासिल करने का एक मौका दिया है.  जैसे जैसे डिटेक्टर बेहतर होंगे वैज्ञानिकों को और गहरी जानकारी मिलने की उम्मीद है.
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