नासा के भावी अभियानों में उपयोग किया जाएगा ‘हरा’ ईंधन, जानिए क्या होगा फायदा

नासा के भावी अभियानों में उपयोग किया जाएगा ‘हरा’ ईंधन, जानिए क्या होगा फायदा
नासा अपने आने वाले अंतरिक्ष अभियानों में एक बेहतर और कम जहरीले ईंधन का उपयोग करेगा. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

नासा (NASA) ने अपने अगले अंतरिक्ष अभियानों (Space Missions) के लिए नए ईंधन (Fuel or Propellant) और उसके उपयोग संबंधी तकनीक (Technology) का सफल परीक्षण कर लिया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 23, 2020, 6:52 PM IST
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अमेरिका की स्पेस एजेंसी नासा (NASA) के बहुत से महत्वाकांक्षी अभियानों (Missions) पर काम चल रहा है. इन अभियानों को बेहतर और कम खर्चीला बनाने के लिए कई तरह के शोध लगातार हो रहे है. इन्हीं में से एक शोध में नासा ने एक ऐसी तकनीक (Technology) में सफलता पाई है जिससे अब वह अंतरिक्ष प्रक्षेपण (Space Launch) प्रक्रिया में उपयोग में आना वाला बेहतर ईंधन (Fuel or Propellant) का इस्तेमाल कर सकेगा. इस बात की अधिक संभावना है कि नासा अपने आने वाले अभियानों में इस ईंधन का उपयोग भी करने शुरू कर देगा.

अभी तक किस ईंधन का होता था उपयोग
नासा के अभियानों में अभी तक टॉक्सिक हाइड्राजीन का उपयोग ईंधन के तौर पर होता था. लेकिन अब इसकी जगह कम जहरीले या टॉक्सिक प्रोपेलेंट या ईंधन का इस्तेमाल होगा. नासा ने इस ईंधन से संबंधित तकनीकों का भी सफलतापूर्वक परीक्षण कर लिया है.

नए ईंधन का अभियान
नासा ने पिछले साल ग्रीन प्रोपेलैंड इन्फ्यूजन मिशन (GPIM) लॉन्च किया था जिसमें उसने ईंधन और उसके अनुरूप प्रपल्शन सिस्टम की पहली बार अंतरिक्ष में जांच की थी नासा ने गुरूवार को जानकारी दी कि यह अभियान में अब पूरा होने वाला है. इस अभियान में ग्रीन ईंधन और उसका प्रपल्शन सिस्टम अपेक्षा अनुरूप सफल रहा है. अब दोनों ही भविष्य के अभियानों के उपयोग के लिए तैयार हैं.



पिछले 50 सालों में पहली बार ऐसा प्रयोग
अमेरिका के हंट्सविले, अलबामा में मार्शल स्पेस फ्लाइट सेंटर में GPIM अभियान के मैनेजर  टिम स्मिथ ने बताया कि पिछले 50 साल में यह पहली बार है कि नासा ने नए हाई परफॉर्मेंस प्रोपेलैंट का परीक्षण किया है. इसमें न केवल हाइड्राजीन को सहयोग करने की बल्कि उसका विकल्प बनने की पूरी क्षमता है जो साल 1960 से अब तक अंतरिक्ष यानों में इस्तेमाल किया जाता रहा है.
GPIM अभियान का प्रमुख कामGPIM मिशन को एक मोनो प्रोपेलैंट का परीक्षण करना था, यह एक ऐसा रासायनीक प्रोपेलेंट है जो बिना किसी अलग ऑक्सीडाइडर की सहायता के खुद ही जल सकता है. इस प्रोपेलैंट को एडवांस स्पेसक्राफ्ट एनर्चेटिक नॉन टॉक्सिक (ASCENT) कहते हैं. इस प्रोपेलैंट का आविष्कार अमेरिकी एयर फोर्स रिसर्च लैबोरेटरी ने कैलीफोर्निया के एडवर्ड्स एयर फोर्स बेस पर किया था.खरबों डॉलर के asteroid का अन्वेषण करेगा नासा, जानिए क्यों है ये इतना कीमतीअब इस मिशन में होगा इसका उपयोगयह GPIM का सफल परीक्षण ही था जिसके कारण नासा ने इसे अपने अगले अभियानों के लिए ईंधन के तौर पर चुना है. नासा अपने अगले मिशन जिसका नाम लूनार फ्लैशलाइट है, में इसका उपयोग करेगा. यह एक छोटा सा अंतरिक्ष यान है जो चंद्रमा के क्रेटरों के अंदर पानी की बूंदों की मौजूदगी के बारे में स्पष्ट जानकारी देगा. इसे आर्टिमिस I के साथ प्रक्षेपित किया जाएगा. आर्टिमिस नासा का ओरियोन स्पेसक्राफ्ट और स्पेसलॉन्च सिस्टम रॉकेट का पहला संयुक्त प्रक्षेपण होगा.


गुलाबी रंग का या हरा
वैसे तो ASCENT का रंग गुलाबी है, लेकिन फिर भी इसे हरा या ग्रीन कहा जा रहा है क्योंकि यहहाइड्रजीन के मुकाबले बहुत कम जहरीला है. हाइड्रजीन के लिए खास सुरक्षा सूट्स की जरूरत होती है और इसके अलावा इसे यान में भरने के प्रक्रिया भी काफी जटिल और कठिन है.

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नासा का कहना है कि ASCENT से अंतरिक्ष यान और अधिक दूरी तक जा सकेंगे या लंबे समय तक काम कर सकेंगे इसके कारण इनकी प्रभावोत्पादकता बढ़ जाती है. GPIM अभियान अब पूरा होने को है और इसका अंतरिक्ष यान अब अपने कक्षा से दूर होकर जलने लगा है. सात बार जलने की प्रक्रिया से गुजर कर यह पृथ्वी की निचली कक्षा में करीब 180 किलोमीटर तक आ जाएगा जिसके बाद यह सिंतबर माह के अंत में पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करेगा.
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