नोबेल की दौड़ में ग्रेटा, नवेलनी, WHO, लेकिन ट्रंप क्यों हुए नॉमिनेट?

नोबेल पुरस्कार के लिए नामांकन की प्रक्रिया पूरी हुई.

इस साल के नोबेल पुरस्कार (Nobel Prize 2021) के लिए नामांकन की प्रक्रिया 31 जनवरी को बंद हो गई. नॉमिनेशनों पर विचार किए जाने के बाद अक्टूबर में पुरस्कार की घोषणा की जाएगी. जानिए कौन हैं इस साल प्रमुख दावेदार (Nominations for Nobel) और क्यों.

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    अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Former US President) के खिलाफ एक तरफ महाभियोग की की कवायद (Impeachment Against Trump) चल रही है, तो दूसरी तरफ उनका नाम 2021 के नोबेल पुरस्कार के लिए नॉमिनेट किया गया है. ट्रंप के अलावा पर्यावरण एक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग (Greta Thunberg) और लगातार सुर्खियों में बने हुए रूस के असंतुष्ट नेता एलेक्सी नवेलनी (Alexei Navalny) भी इस साल के नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नॉमिनेट किए गए हैं. लेकिन इनके अलावा और भी कई नाम नोबेल प्राइज़ की दौड़ में हैं. इनके बारे में आप कितना जानते हैं?

    एक समाचार एजेंसी ने नॉर्वे के कानून निर्माताओं के साथ बातचीत पर आधारित जो सर्वे प्रकाशित किया है, उसके मुताबिक विश्व स्वास्थ्य संगठन और उसके COVAX कार्यक्रम को भी नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया है. यह अहम बात है क्योंकि नॉर्वे के विधि निर्माताओं का रिकॉर्ड रहा है कि वो जिन्हें चुनते रहे हैं, अक्सर वो नोबेल विजेता बनते रहे.

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    नोबेल कमेटी का क्या कहना है?
    नोबेल विजेता का चयन नॉर्वे की नोबेल कमेटी करती है, जिसमें पांच सदस्य नॉर्वे की संसद द्वारा नियुक्त होते हैं. जहां तक नोबेल प्राइज़ के लिए नॉमिनेशन की बात है, तो इस मामले में यह कमेटी कोई टिप्पणी नहीं करती. पिछले करीब 50 सालों से पस्ताव भेजने वालों और जिनके प्रस्ताव विजेता साबित न हों, उनके नाम गोपनीय रखने की परंपरा निभाई जा रही है.

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    नोबेल 2021 विजेता की घोषणा इस साल अक्टूबर में होगी.


    नोबेल पुरस्कार के लिए कई तरह से प्रस्ताव नामांकन के तौर पर कमेटी को मिलते हैं. दुनिया भर के देशों की संसदों से नामांकन भेजे जा सकते हैं. इसके अलावा पूर्व नोबेल विजेता भी पुरस्कार के लिए किसी कैंडिडेट का नाम प्रस्तावित कर सकते हैं. ताज़ा खबर यह है कि 2021 के नोबेल के लिए रविवार को नॉमिनेशन की प्रक्रिया बंद हो गई. अब फैसला कमेटी के हाथ में होगा.

    इस बार ये हैं प्रमुख नामांकन
    अंतर्राष्ट्रीय खबरों की मानें तो पर्यावरण और क्लाइमेट चेंज की दिशा में अग्रणी पैराकार के तौर पर उभरीं टीनेजर एक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग का नाम प्रस्तावित किया गया है. नोबेल शांति पुरस्कार के लिए ग्रेटा का नाम फ्राइडे फॉर फ्यूचर जैसा अभियान शुरू करने के कारण नामांकित किया गया है. दूसरी तरफ, रूस में शांतिपूर्ण ढं गसे लोकतंत्र की बहाली की कोशिश करने के दावों के साथ एलेक्सी नवेलनी का नाम प्रस्तावित हुआ है.

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    आपको बता दें कि नवेलनी पिछले दिनों इसलिए चर्चा में रहे क्योंकि आरोप थे कि उन्हें ज़हर देकर जान से मार डालने की कोशिश हुई और इसके बाद रूस लौटने पर उन्हें एयरपोर्ट पर ही गिरफ्तार किया गया था.

    इनके अलावा, अन्य प्रमुख नामांकनों में बेलारूस की एक्टिविस्ट स्वितलाना सिखानॉस्काया, मारिया कोलेसनिकोवा और वेरोनिका सेपकालो के नाम भेजे गए हैं. इन तीनों ने ईमानदारी से चुनाव कराए जाने के लिए शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किए.

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    किसने भेजे हैं प्रस्ताव?
    यह एक खास फैक्ट है कि नॉर्वे की नोबेल कमेटी प्रस्तावों के बारे में खुलासे नहीं करती, लेकिन प्रस्ताव भेजने वाले खुद अपने नॉमिनेशन के बारे में चाहें तो खुलासा कर सकते हैं. जैसे नवेलनी का नामांकन रूसी अकादमिकों ने भेजा है. यह भी दिलचस्प बात है कि अस बार जिन लोगों या संस्थाओं ने नॉमिनेशन भेजे हैं, वो दुनिया भर में अभिव्यक्ति की आज़ादी के अधिकार की जंग में किसी तरह शामिल रहे हैं.

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    अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुद को पहले भी नोबेल का हकदार बता चुके हैं.


    अमेरिका बेस्ड जर्नलिस्ट प्रोटेक्ट कमेटी, चार्ली एब्दो के पूर्व पत्रकार जित्रनेब अल रज़ूई, हांगकांग फ्री प्रेस, अमेरिका बेस्ड अंतर्राष्ट्रीय फैक्ट चेकिंग नेटवर्क और पैरिस बेस्ड रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स जैसे नाम तस्दीक करते हैं कि इस बार अभिव्यक्ति की आज़ादी का मुद्दाा नोबेल पुरस्कारों के लिए थीम के रूप में सामने आ रहा है.

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    ट्रंप को क्यों किया गया नॉमिनेट?
    आखिर में आपको यह भी जानना चाहिए ट्रप का नाम नोबेल शांति पुरस्कार के लिए दक्षिणपंथी प्रोग्रेस पार्टी के सांसद क्रिश्चियन टिबरिंग ने प्रस्तावित किया है. टिबरिंग का कहना है कि इज़राइल और यूएई के बीच शांति समझौता करवाने में योगदान देने के लिए उन्होंने ट्रंप का नाम नॉमिनेट किया. गौरतलब यह है कि टिबरिंग ने 2019 में भी ट्रंप का नाम उत्तर कोरिया के साथ रणनीतिक कदमों के लिए नोबेल के लिए नॉमिनेट किया था.

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    इस साल फर ट्रंप का नाम नॉमिनेट करने पर टिरिंग ने यह वजह भी बताई कि ट्रंप ने इराक से अमेरिकी सेनाओं को वापस लेने का बड़ा कदम भी उठाया. आपको यह भी याद दिला दें कि खुद ट्रंप ने पिछले साल कहा था कि नॉर्थ कोरिया और सीरिया में उन्होंने जो काम किए, उसके लिए उन्हें नोबेल पीस प्राइज़ मिलना ही चाहिए.

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