परिवार जो 3 पीढ़ियों से बना रहा है राममंदिर, सोमनाथ से अक्षरधाम तक किए डिजाइन

परिवार जो 3 पीढ़ियों से बना रहा है राममंदिर, सोमनाथ से अक्षरधाम तक किए डिजाइन
अयोध्‍या में राम मंदिर की डिजाइन और निर्माण का का एक परिवार तीन पीढ़ी से देख रहा है. (FILE)

राममंदिर (Ram Temple) की डिजाइन का काम गुजरात के सोमपुरा परिवार (Sompura Family) ने किया है जिसकी तीन पीढ़ी इस काम में जुटी हैं.

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पांच अगस्त से राममंदिर (Ram Mandir) का निर्माण शुरू होने जा रहा है. कई दशकों से इस मंदिर के निर्माण के लिए संघर्ष चल रहा था. इस पर विवाद को हल करने के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी गई. अब इसके निर्माण मार्ग प्रशस्त होने के बाद से इसकी डिजाइन (Design) भी चर्चा में हैं. मंदिर की डिजाइन जिस परिवार (Family) ने की है उसने राम मंदिर ही नहीं बल्कि सोमनाथ (Somnath) और अक्षरधाम (Akshardham) जैसे विश्व प्रसिद्ध मंदिरों की डिजाइन बनाई है. यह परिवार तीन पीढ़ी से राममंदिर से जुड़ा है.

15 पीढ़ियों से मंदिर बना रहा है यह परिवार
अहमदाबाद का यह सोमपुरा परिवार एक नहीं बल्कि 15 पीढ़ियों से मंदिर के डिजाइन का काम कर रहा है. हाल ही में अयोध्या के इस राममंदिर की डिजाइन में बदलाव किया गया. यह बदलाव भी इसी परिवार ने किया और इससे पहले का डिजाइन भी इसी परिवार ने बनाया था. इस परिवार का दावा है कि इसने अब तक कम से कम 131 भारतीय और विदेशी मंदिरों के डिजाइन बनाए हैं. इसमें लंदन का मशहूर स्वामीनारायण मंदिर भी शामिल हैं.

परदादा के साथ पिता ने किया था सोमानाथ मंदिर पर काम
फिलहाल इस पीढ़ी के दो सदस्य निखिल (55) और आशीष (49) राममंदिर का काम अपने पिता चंद्रकांत (77) के साथ देख रहे हैं. आशीष का कहना है कि उनका परिवार पिछली 15 पुश्तों से यह काम कर रहा है. पिता चंद्रकांत भाई सोमपुरा ने गुजरात का सोमनाथ मंदिर उनके दादाजी के साथ डिजाइन किया था. परिवार के इस काम में आशीष के बड़े भाई निखिल के पुत्र भी शामिल हो गए हैं.



पहला मंदिर कब किसने बनाया?
यह पूछे जाने पर क्या उनके अपने पूर्वजों के बनाए पहले मंदिर के बारे में याद है, आशीष ने कहा, “नहीं, सोमपुरा परिवार पिछले 15 पीढ़ियों से मंदिर डिजाइन का काम कर रहा है. यह हमारे लिए नया नहीं हैं इसी लिए यह बताना मुश्किल है कि पहला मंदिर किसने डिजाइन किया था और वह कौन सा था.

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अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का उद्घाटन 5 अगस्त को होना है


पद्मश्री प्रभाशंकर सोमपुरा
चंद्रकांत सोमपुरा ने मंदिर डिजाइन तब सीखा जब बचपन ने उनके दादा प्रभाशंकर सोमपुरा ने उन्होंने वास्तुशास्त्र की शिक्षा दी. आशीष ने बताया, “मेरे परदादा प्रभाशंकर सोमपुरा ने सोमनाथ मंदिर की डिजाइन तो बनाई ही, साथ ही उन्होंने शिल्पशास्त्र पर 14 किताबें भी लिखीं. उन्हें पद्मश्री से सम्मानित भी किया जा चुका है.



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राममंदिर के काम में कौन है सक्रिय
चंद्रकांत के पिता बलदेव सोमपुरा का 51 साल की उम्र में एक दुर्घटना में निधन हो गया था. चंद्रकांत भी अब उम्र हो जाने के कारण घर से अपने बच्चों को सहयोग देते हैं. जबकि निखिल और आशीष श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की मीटिंग में भाग लेते हैं जिसे राममंदिर के निर्माण की देखरेख करने का काम सौंपा गया है.

Chandrakant Sompura
अहमदाबाद के चंद्रकांत भाई के परिवार को पारंपरिक भारतीय नागर शैली के मंदिरों के डिजाइन बनाने में महारत हासिल है.


8 प्रोजक्ट पर हो रहा है काम
निखिल और आशीष मंदरि की डिजाइन और निर्माण का काम देखते हैं. हाल में निखिल के लड़के ने भी इस काम हाथ बंटाना शुरू किया है. वहीं चंद्रकांत घर से ही काम करते हैं और रह डिजाइन और उसमें हुए परिवर्तन को देख कर सलाह देते हैं. इस समय परिवार कुल आठ प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है.

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1989 से जुड़ा राममंदिर से जुड़ा है परिवार
सोमपुरा परिवार 1989 से ही राममंदिर से जुड़ा है. यह परिवार कई पीढ़ियों से बिलड़ा परिवार से जुड़ा हुआ है और उसने देश भर में बिलड़ा मंदिरों को भी डिजाइन किया है. बिड़ला परिवार के जरिए ही सोमपुरा परिवार का उस समय विश्व हिंदु परिषद से जुड़ा. चंद्रकांत बताते हैं कि उन्होंने उत्तरभारत में मंदिरों के लिए मशहूर नागर शैली से राममंदिर को डिजाइन किया है जिसमें 366 स्तंभ होंगे.
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