जन्मदिन विशेष: गुरु नानकदेव- संत जिसने अपनी सादगी से स्थापित किया धर्म

गुरु नानक देव (Guru Nanak Dev) का जन्म दिवस अंग्रेजी तारीख के मुताबिक नहीं मनाया जाता है. (फाइल फोटो)

गुरु नानक देव (Guru Nanak Dev) का जन्म दिवस अंग्रेजी तारीख के मुताबिक नहीं मनाया जाता है. (फाइल फोटो)

सिक्ख धर्म (Sikh Religion) के संस्थापक गुरु नानक देव जी (Guru Nanak dev ji) का जन्म अंग्रेजी तारीख के हिसाब से 15 अप्रैल को हुआ था, लेकिन उनकी जन्म तिथि हर साल कार्तिक पूर्णिमा को मनाई जाती है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 15, 2021, 6:35 AM IST
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सिख धर्म के संस्‍थापक गुरु नानक देव (Guru Nanak Dev) का जन्‍म आज ही के दिन यानी 15 अप्रैल को हुआ था, लेकिन उनका जन्मदिवस अंग्रेजी ग्रेगेरियन कैलेंडर के हिसाब से नहीं मनाया जाता है. वे सिखों के प्रथम गुरू के रूप में प्रसिद्ध गुरु नानक देव जी ने हमेशा ही सामाजिक कुरीतियों का विरोध किया और समाज को सही राह दिखाने वाले दिव्य पुरुष की तरह प्रसिद्ध हुए.

नहीं मनाया जाता यह जन्मदिवस

गुरु नानक का जन्म 15 अप्रैल 1469 को तलवंडी नामक स्थान पर हुआ था. बाद में तलवंडी का नाम ननकाना साहब पड़ा, आजादी के बाद यह पाकिस्तान के पंजाब प्रांत का हिस्सा हो गया था.  गुरु नानक देव जी की जन्मतिथि कार्तक पूर्णिमा का दिन मानी जाती है जो दिवाली के 15 दिन का बाद आती है. सिख समुदाय इसी दिन उनका जन्मदिन प्रकाशोत्व के रूप में मनाता है और अंग्रेजी तारीख केवल एक याद रह गई है.

हिंदू परिवार में जन्म
नानक जी का जन्म एक हिंदू परिवार में हुआ था. इनकी माता का नाम तृप्ती देवी और पिता का नाम कल्याण या मेहता कालू जी था. 16 वर्ष की उम्र में इनका विवाह गुरदासपुर जिले के लाखौकी नाम स्‍थान की रहने वाली कन्‍या सुलक्‍खनी से हुआ था. इनके दो पुत्र श्रीचंद और लख्मी चंद थे.

बचपन से ही सांसारिकता से दूरी

गुरु नानक बचपन से सांसारिक विषयों से उदासीन रहा करते थे. गुरु नानक का सोच-विचार में डूबे रहते थे. तब उनके पिता ने उन्हें व्यापार में लगाया. उनके लिए गांव में एक छोटी सी दूकान खुलवा दी. एक दिन पिता ने उन्हें 20 रूपए देकर बाजार से खरा सौदा कर लाने को कहा. नानक ने उन रूपयों से रास्ते में मिले कुछ भूखे साधुओं को भोजन करा दिया और आकर पिता से कहा की वे खरा सौदा कर लाए है.



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गुरु नानक देव (Guru Nanak Dev) ने एक फकीर की तरह घूम फिर कुरीतियों और सामाजिक बुराइयों को दूर करने का प्रयास किया. (फाइल फोटो)


सादगीपूर्ण दार्शनिक

सारा समय वे आध्यात्मिक चिंतन और सत्संग में व्यतीत करने लगे. गुरु नानक के बचपन के समय में कई चमत्कारिक घटनाएं घटी जिन्हें देखकर गांव के लोग इन्हें दिव्य व्यक्तित्व वाले मानने लगे. नानक देव जी ने सिखों के प्रथम गुरु माने जाते हैं. वे अंधविश्वास और आडंबरों के सख्त विरोधी रहे नानक देव जी एक दार्शनिक, समाज सुधारक, कवि, गृ​हस्थ, योगी और देशभक्त भी थे. उन्होंने गुरुनानक देव जी मूर्तिपूजा को निरर्थक माना और हमेशा ही रूढ़ियों और कुसंस्कारों के विरोध करते रहे.

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यात्रा के तीन चक्र

गुरुनानक देवी जी अपने दोनों पुत्रों के जन्म के बाद अपने चार साथी मरदाना, लहना, बाला और रामदास के साथ तीर्थयात्रा पर निकल पड़े। ये चारों ओर घूमकर उपदेश देने लगे। उन्होंने तीन यात्राचक्र पूरे किए, जिनमें भारत, अफगानिस्तान, फारस और अरब के मुख्य मुख्य स्थानों का भ्रमण किया. उन्होंने ये यात्राएं साल 1507 ई. में 1515 ई. तक की जिन्हें विचरण यात्रा आम लोगों की भाषा में उदासियां कहा जाता है.

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गुरु नानक देव (Guru Nanak Dev) एकीश्वरवाद और आधात्मिकता से ओतप्रेत शिक्षा दिया करते थे. (फाइल फोटो)


इन स्थानों की यात्रा

नानक देव जी कभी एक स्थान पर ज्यादा देर नहीं टिके बल्कि वे समाज को जागरूक करने के लिए फकीरों की तरह ही रहे. उन्होंने हरिद्वार, अयोध्या, प्रयाग, काशी, गया, पटना, असम, बीकानेर, पुष्कर तीर्थ, दिल्ली, पानीपत, कुरुक्षेत्र, जगन्नाथपुरी, रामेश्वर, सोमनाथ, द्वारका, नर्मदातट, मुल्तान, लाहौर आदि स्थानों का भ्रमण किया. बगदाद में उनके साथी और मित्र मरदाना की कब्र मौजूद है जो यात्रा के दौरान नहीं रहे थे.

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इक ओंकार का मंत्र

गुरु नानक देव ने ही इक ओंकार का मंत्र दिया यानी ईश्वर एक है. वह सभी जगह मौजूद है. हम सबका “पिता” वही है इसलिए सबके साथ प्रेमपूर्वक रहना चाहिए. उनके अनुसार ईश्वर कहीं बाहर नहीं, बल्कि हमारे अंदर ही है. गुरुनानक जी के विचारों से समाज में परिवर्तन हुआ. नानक जी ने करतारपुर (पाकिस्तान) नामक स्‍थान पर एक नगर को बसाया और एक धर्मशाला भी बनवाई.
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