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Guru Nanak Jayanti 2021: लोगों को आध्यात्म से जोड़ता है गुरू नानक का दर्शन

Guru Nanak Jayanti 2021: लोगों को आध्यात्म से जोड़ता है गुरू नानक का दर्शन

गुरु नानक देव (Guru Nanak Dev) के दर्शन ने ही सिख धर्म का रूप लिया था. (तस्वीर: Wikimedia Commons)

गुरु नानक देव (Guru Nanak Dev) के दर्शन ने ही सिख धर्म का रूप लिया था. (तस्वीर: Wikimedia Commons)

गुरु नानक देव जी (Guru Nanak dev ji) की जयंती हर साल कार्तिक पूर्णिमा के प्रकाश पर्व के रूप में मनाई जाती है. उनके बचपन में कई चमत्कारिक घटनाएं घटी जिन्हें देखकर उनके गांव के लोग उन्हें एक दिव्य पुरुष समझने लगे थे. शुरू से ही गुरू नानक में जिज्ञासा बहुत अधिक थी और वे हर बात को समझना चाहते थे इसी वजह से उन्होंने हिंदू और इस्लाम दोनों धर्म का अध्ययन किया. वे कुरीतियों और अवांछनीय परंपराओं का हमेशा विरोध करते रहे. उन्होंने हिंदू और इस्लामिक दोनों ही धर्मों के तीर्थों की यात्रा की और लोगों को सरल और सहज आध्यात्म (Spritualism) की राह दिखाई और सिख धर्म (Sikh Religion) की स्थापना की.

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    सिख धर्म के संस्‍थापक गुरु नानक देव (Guru Nanak Dev) का जयंती प्रकाश पर्व के रूप में देश भर में मनाई जा रही है. सिक्खों के प्रथम गुरू रहे गुरू नानक ने अपने समय में हिंदू और मुसलमानों पर समान रूप से प्रभाव डाला था. सामाजिक और जीवन से संबंधित कुरीतियों को खत्म करने उपदेश देने के साथ उन्होंने ईश्वर प्राप्ति की ऐसी आध्यात्मिक राह दिखाई थी जो आम लोगों के लिए सहज थी जिसमें किसी तरह के कर्मकांड और प्रपंच नहीं थे. गुरु नानक देव जी की जन्मतिथि कार्तक पूर्णिमा का दिन मानी जाती है जो दिवाली के 15 दिन का बाद आती है. सिख समुदाय के लोग इसी दिन उनका जन्मदिन पूरबपर्व या प्रकाशोत्व के रूप में मनाते हैं.

    जयंती और जन्मदिवस
    गुरु नानक का साल1469 में कार्तिक पूर्णिमा के दिन  तलवंडी नामक स्थान पर हुआ था जो पाकिस्तान के पंजाब प्रांत का हिस्सा है. बाद में तलवंडी का नाम ननकाना साहब पड़ गया. उनका जन्मदिवस अंग्रेजी ग्रेगेरियन कैलेंडर के हिसाब से 15 अप्रैल को पड़ता है . लेकिन सिख समुदाय उनकी जयंती 15 अप्रैल को नहीं बल्कि कार्तिक पूर्णिमा के रूप में मनाता है.
    नानक जी का परिवार
    नानक जी का जन्म एक हिंदू परिवार में हुआ था. इनकी माता का नाम तृप्ती देवी और पिता का नाम कल्याण या मेहता कालू जी था. उनकी बहन का नाम नाककी थी. 16 वर्ष की उम्र में इनका विवाह गुरदासपुर जिले के लाखौकी नाम स्‍थान की रहने वाली कन्‍या सुलक्‍खनी से हुआ था.  श्रीचंद और लख्मी चंद नाम के उनके दो पुत्र थे.

    संसार में नहीं लगता था मन
    गुरु नानक का मन शुरू से सांसारिक विषयों में नहीं लगता था वे हमेशा सोच विचार और चिंत में डूबे रहते थे. उनके पिता ने उनके लिए गांव में एक छोटी दूकान खुलवा दी. एक दिन पिता ने उन्हें 20 रूपए देकर बाजार से खरा सौदा कर लाने को कहा तो नानक ने उन पैसों से रास्ते में मिले कुछ भूखे साधुओं को भोजन करा दिया और आकर पिता से कहा की वे खरा सौदा कर लाए है.

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    गुरु नानक देव (Guru Nanak Dev) ने लोगों को एकीश्वरवाद और निराकार ईश्वरवाद की शिक्षा दी. (फाइल फोटो)

    चिंतन और सत्संग
    सारा समय वे आध्यात्मिक चिंतन और सत्संग में व्यतीत करने लगे. वे अंधविश्वास और आडंबरों के पर सवाल उठाते रहते थे. उनके समय में कई चमत्कारिक घटनाएं घटी जिनसे प्रभावित होकर उनके गांव के लोग उन्हें दिव्यात्मा का दर्जा देने  लगे थे. नानक देव जी एक दार्शनिक, समाज सुधारक, कवि, गृ​हस्थ, योगी और देशभक्त भी थे. उन्होंने गुरुनानक देव जी मूर्तिपूजा को निरर्थक माना और हमेशा ही रूढ़ियों और कुसंस्कारों के विरोध करते रहे.

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    तीर्थों की यात्रा का चाव
    नानक देव जी को तीर्थों की यात्रा की बहुत इच्छा रहा करती थी. वे फकीरों की तरह कभी एक स्थान पर ज्यादा देर नहीं टिके बल्कि वे समाज को जागरूक करने के लिए एक गांव से दूसरे गांव जाते थे. उन्होंने हिंदुओं के तीर्थ हरिद्वार, अयोध्या, प्रयाग, काशी, गया, पटना, असम, बीकानेर, पुष्कर तीर्थ, दिल्ली, पानीपत, कुरुक्षेत्र, जगन्नाथपुरी, रामेश्वर, सोमनाथ, द्वारका, नर्मदातट तक की यात्रा की तो बगदाद तक की यात्रा भी की जहां उनके साथी और मित्र मरदाना की कब्र मौजूद है जो यात्रा के दौरान नहीं रहे थे.

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    गुरु नानक (Guru Nanak) एक फकीर की तरह घूम घूम कर लोगों को उपदेश देते रहे. (फाइल फोटो)

    इक ओंकार का मंत्र
    गुरु नानक देव ने दुनिया को ‘इक ओंकार’ का मंत्र दिया  था जिसका अर्थ होता है कि  ईश्वर एक है और  वह सर्वत्र मौजूद है. यही वजह है कि ओंकार को सिखधर्म में बहुत महत्व दिया जाता है उनका कहना था कि हमें सभी के साथ प्रेमपूर्वक रहना चाहिए. उनके अनुसार ईश्वर कहीं बाहर नहीं, बल्कि हमारे अंदर ही है. गुरुनानक जी के प्रेम और आध्यात्मिक विचारों के कारण पंजाब और उसके आसपास के समाज में भारी बदलाव भी देखने को मिला. उन्होंने नानक जी ने करतारपुर (पाकिस्तान) नामक स्‍थान पर एक नगर को बसाया  जो आज एक तीर्थ स्थल है.

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    नानकदेव का कहना था कि ईश्वर दुनिया की हर जगह और हर प्राणी में मौजूद हैं. उनकी भक्ति मे डूबे लोगों को किसी का डर नहीं सताता. ईमानदारी और मेहनत से पेट भरना चाहिए और उसी कमाई में से जरूरत मंद की सहायता करनी चाहिए. इसके साथ ही ना तो बुरा काम करने के बारे सोचना चाहिए और ना ही किसी को सताना चाहिए. हमेशा खुश रहना चाहिए और ईश्वर से सदा अपने लिए क्षमा याचना करनी चाहिए.

    Tags: History, India, Religion, Research, Sikh Community

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