पुण्यतिथि: कौन थीं वो कादंबरी, जिन्हें जिंदगी भर टूटकर चाहते रहे गुरुदेव टैगोर

गुरुदेव के व्यक्तित्व धीर-गंभीर तो था, लेकिन उनकी भव्यता का जादू महिलाओं को उनके प्रति एक खास आकर्षण में बांध देता था

Sanjay Srivastava | News18Hindi
Updated: August 7, 2019, 2:47 PM IST
पुण्यतिथि: कौन थीं वो कादंबरी, जिन्हें जिंदगी भर टूटकर चाहते रहे गुरुदेव टैगोर
गुरुदेव रविंद्र नाथ टैगोर (फाइल फोटो)
Sanjay Srivastava
Sanjay Srivastava | News18Hindi
Updated: August 7, 2019, 2:47 PM IST
गुरुदेव रविंद्रनाथ टैगोर का आज जन्मदिन है. गुरुदेव की शख्सियत इतनी बड़ी थी कि जो भी उनके संपर्क में आता था, उनसे प्रभावित हुए बगैर नहीं रह पाता था. उनके सपंर्क में आने वाली महिलाओं पर तो उनका गहरा असर होता था. उनकी लंबी चौड़ी कद काठी, धीर गंभीर व्यक्तित्व, जबरदस्त प्रतिभा और कला-संगीत पर उनकी पकड़ महिलाओं को उनका दीवाना बना देती थी.

यही कारण है कि उनके जीवन में उनके संपर्क में कई महिलाएं आईं. जो उनसे प्यार कर बैठीं. लेकिन माना जाता है कि जितना टूटकर खुद गुरुदेव ने कादंबरी से प्यार किया, वो कुछ ज्यादा ही खास रहा. कौन थीं ये कादंबरी. कैसा था रविंद्र नाथ के साथ उनका प्यार, जो समय के साथ और गहरा होता चला गया.

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19वीं सदी में टैगोर परिवार बंगाल के सबसे कुलीन और धनी परिवारों में था. ये परिवार जिस विशाल बंगले में रहता था, वहां रोज साहित्य से लेकर संगीत और नृत्य नाटिकाओं की महफिलें लगा करती थीं. एक से एक बड़ी शख्सियतें इसमें मेहमान के तौर पर शरीक होती थीं. टैगोर परिवार का बहुत बड़ा स्टेट था. गुरुदेव के बाबा प्रिंस द्वारिकानाथ उद्योगपति और जमींदार थे. वो ब्रिटिश किंग के बहुत करीब थे. अपने समय में वो देश के सबसे धनी भारतीय थे.



कौन थीं कादंबरी?
रविंद्रनाथ टैगोर तब आठ साल के थे. उस समय उनके बड़े भाई यतींद्ननाथ की शादी हुई. परिवार में 10 साल की बहू आई. नाम था कादंबरी. यतींद्र उससे 10 साल बड़े थे. आते ही कादंबरी की दोस्ती पति से कहीं ज्यादा देवर रविंद्र नाथ से हो गई. कादंबरी खासी प्रतिभाशाली भी थीं. उनके और रविंद्र के बीच ऐसी दोस्ती पनपी, जो दोनों को दिनोंदिन करीब लाती गई.
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टैगोर ने अपने जीवन में ज्यादातर जितनी रोमांटिक कविताएं लिखीं या महिलाओं की जितनी पेंटिंग्स बनाईं, वो सब कादंबरी को केंद्र में रखकर ही थीं.

कादंबरी नहीं चाहती थीं कि रविंद्रनाथ की शादी हो
सुधीर कक्कड़ अपनी किताब 'यंग टैगोर' में लिखते हैं, भाभी कादंबरी देवी उनका पहला प्यार थी, जिसे उन्होंने आखिरी दिन तक प्यार किया. कादंबरी तो ये भी नहीं चाहती थीं कि रविंद्र नाथ की शादी हो. उन्होंने गुपचुप इसे तोड़ने की भी कोशिश की.

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जब ऐसा नहीं कर पाईं तो रविंद्र पर शादी से इनकार करने का खासा दबाव डाला. उन्हें लगता था कि शादी उन दोनों के संबंधों में दूरियां ले आएगी. गुरुदेव ताउम्र उनके असर में ही रहे.
कृष्णा कृपलानी की किताब 'टैगोर ए लाइफ' कहती है, शायद ही वो कोई काम अपनी पसंदीदा भाभी से पूछे बगैर करते थे. दोनों का प्यार अजीब सा ही था.

कादंबरी की खुदकुशी
जब कादंबरी के नहीं चाहने के बाद भी रविंद्रनाथ की शादी हो गई, तो इसके चार महीने बाद ही निराश कादंबरी ने मात्रा से ज्यादा अफीम खाकर आत्महत्या कर ली. इस खुदकुशी की चर्चा बंगाल में खूब हुईं. टैगोर इस घटना से टूट ही गए.

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इस हादसे के बाद टैगोर और उनकी पत्नी में दूरियां बढ़ गईं. ये नौबत आ गई कि पत्नी उन्हें छोड़कर वापस अपने पिता के घर चली गईं. हालांकि, बाद में टैगोर और पत्नी के संबंध सामान्य हो गए. बाद में उनकी पत्नी उच्च शिक्षित हुईं और इंग्लैंड में भी उन्होंने जाकर पढ़ाई की. उन्होंने कुछ किताबों का अनुवाद भी किया. टैगोर को उनसे पांच बच्चे हुए.

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पहला प्यार अन्ना यानि अन्नपूर्णा
17 साल की उम्र में रवि अहमदाबाद में अपने बड़े भाई सत्येंद्रनाथ टैगोर के पास गए, जो वहां आईसीएस थे. सत्येंद्रनाथ ने उन्हें मुंबई में अपने दोस्त डॉक्टर आत्माराम पांडुरंग के पास भेजा. उस परिवार की बेटी अन्नपूर्णा से भी उनकी नज़दीकियां हो गई. वो खूबसूरत और स्मार्ट थीं. वो खुद पहली ही नज़र में टैगोर के प्यार में पड़ गई.

लंदन में डॉ. स्कॉट की बेटी 
इसके बाद उन्हें कुछ समय के लिए लंदन जाना पड़ा. वहां वो डॉ. स्कॉट के साथ पेइंग गेस्ट के तौर पर ठहराए गए. डॉ. स्कॉट की दो बेटियां थीं. उनमें से एक को इस युवा कवि से प्यार हो गया.

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सुंदर और चार्मिंग रेनू
फिर उनकी जिंदगी में रेनू अधिकारी नाम की युवती आईं. वो काफी सुंदर और चार्मिंग महिला थीं. वो भी गुरुदेव से उतना ही प्यार करती थीं. टैगोर ने उन्हें 200 पत्र लिखे थे.

अर्जेंटीनाई विधवा के करीब
जब वो अर्जेंटीना के ब्यूनस आर्यस प्रवास के लिए गए, तो वो वहां एक बड़े बंगले में रुके, जो प्लेट नदी के किनारे था. उसी दौरान वो एक महिला विक्टोरिया के प्रति संवेदनाएं महसूस कर लगे. 63 साल की इस विधवा के करीब आए, विक्टोरिया ने बाद में इस बारे में विस्तार से लिखा भी कि टैगोर किस कदर उसकी जिंदगी बन गए.

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First published: August 7, 2019, 2:41 PM IST
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