क्या तिरुपति समेत दूसरे मंदिरों में चढ़े बाल तस्करी के जरिए China जा रहे हैं?

तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) बीते दो सालों में कई बार बालों की नीलामी के विवाद में फंस चुका

तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) बीते दो सालों में कई बार बालों की नीलामी के विवाद में फंस चुका

तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) बीते दो सालों में कई बार बालों की तस्करी के विवाद (hair smuggling controversy) में फंस चुका. माना जा रहा है कि तस्कर ई-नीलामी में शामिल हो बालों को खरीदते और भारी कीमत पर उसे चीन को बेचते हैं.

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चीन से लगातार चले आ रहे तनाव के बीच एक और गरमाने वाली खबर आ चुकी है. भारत और म्यांमार की सीमा पर बालों की खेप पकड़ी गई, जो कथित तौर पर तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) से तस्करी के जरिए चीन भेजी जा रही थी. इन बालों की कीमत थोड़ी-बहुत नहीं, बल्कि लगभग 2 करोड़ रुपये है. वैसे इससे पहले भी चीन बालों की तस्करी के कारण चर्चा में रहा है.

अमेरिका में दिखा अलग ही मामला

पिछले साल के अंत और इस साल की शुरुआत में भी अमेरिका के कस्टम विभाग ने बालों का एक जखीरा पकड़ा, जो चीन के शिनजिंयाग प्रांत से आया था. लगभग 11.8 मैट्रिक टन के ये विग 8 लाख डॉलर से ज्यादा कीमत के माने गए. चीन से पहुंचे इन शिपमेंट के बारे में कहा जा रहा है कि चीनी प्रशासन उइगर मुस्लिम महिलाओं के बाल जबर्दस्ती काट रहा है. यूएस कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन (CBP) के अधिकारियों ने द एसोसिएटेड प्रेस से चर्चा में ऐसा संदेह जाहिर किया.

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शिनजिंयाग में जबरन बाल काटने का संदेह 

बता दें कि शिनजिंयाग प्रांत में उइगर मुस्लिमों के कैंप बने हुए हैं, जहां महिलाएं भी हैं. माना जा रहा है कि यहां महिलाओं के न केवल जबरन बाल काटे जा रहे हैं, बल्कि प्रोडक्ट बनाने के लिए उनका और बच्चों का इस्तेमाल भी किया जा रहा है. प्रांत में छोटी-बड़ी कुल 37 कंपनियां हैं, जो इस पर काम करती हैं.

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भारत और म्यांमार की सीमा पर बालों की खेप पकड़ी गई




क्या है देवस्थानम का मुद्दा 

ये तो हुई चीन के अपने ही लोगों पर हिंसा कर उनके बाल आयात करने की बात लेकिन भारत में तिरुपति वाला मुद्दा जोर पकड़ रहा है. वैसे तो बालों की खेप लगभग दो महीने पहले भारत-म्यांमार सीमा से जब्त हुई थी लेकिन अब ये मामला गरमाया है. हुआ ये कि असम राइफल्स की टीम ने शक के आधार पर 120 बैग पकड़े, जिसमें बालों की खेप दिखी.

ऐसे पहुंचते हैं बाल यहां से वहां 

इसके बाद से अधिकारियों के गोलमोल बयान आने लगे. द हिंदू अखबार की एक रिपोर्ट में अधिकारियों ने बताया कि जो ट्रक पकड़े गए, उनमें तिरुपति से आए बाल थे. वहीं इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से साफ किया गया ये बाल एक नेटवर्क के जरिए रास्ता बनाते हैं, जैसे पहले ये भारत की सीमा पारकर थाइलैंड जाएंगे और वहां से बनकर चीन पहुंचेंगे. ये पूरी प्रक्रिया है.

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क्या कहना है ट्रस्ट का 

इस बीच देवस्थानम ट्रस्ट ने साफ किया कि पकड़े गए बालों का उनके यहां अर्पित बालों से कोई लेना-देना नहीं. बता दें कि आंध्रप्रदेश के तिरुमला तिरुपति देवस्थानम में हर साल लाखों लोग अपने बाल चढ़ाते हैं. इनमें बच्चों का मुंडन संस्कार भी होता है, वहीं भारी संख्या में महिलाएं भी आस्था के कारण अपने केश चढ़ाती हैं. इन बालों से लोगों की आस्था जुड़ी होती है और ऐसे में उन्हें चीन में तस्करी किया जाना श्रद्धालुओं को भड़का सकता है.

हर तीन महीने में बालों की नीलामी

इसी बात को ध्यान में रखते हुए ट्रस्ट ने बताया कि उनके यहां चढ़े बालों की इंटरनेट पर नीलामी होती है और इसे इंटरनेशनल खरीददार लेते हैं. ये नीलामी हर तीन महीने में होती है क्योंकि इतने ही समय में काफी मात्रा में बाल इकट्ठा हो जाते हैं. केवल साल 2020-21 में ट्रस्ट को बालों से लगभग 131 करोड़ रुपये की आमदनी हुई.

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चीन का शुचेंग प्रांत दुनिया का विग कैपिटल कहलाता है- सांकेतिक फोटो (pixabay)


मंदिर करते हैं बालों की ई-नीलामी 

वैसे देवस्थानम ही नहीं, बल्कि देश के कई मंदिरों में श्रद्धालु अपने बाल अर्पित करते हैं. ये बाल नीलामी के जरिए देश के दूसरे हिस्सों या विदेशों तक जाते हैं. वहीं देवस्थानम के अधिकारियों को ये जानकारी नहीं कि बाल ई-नीलामी के बाद कहां जाते हैं. माना जा रहा है कि दलाल ही ये बाल कम कीमत पर लेकर उसे भारी कीमत पर चीन को बेच रहे होंगे, जहां चीन उससे और भी ज्यादा मुनाफा कमा रहा होगा.

चीन क्या करता है बालों का

इस देश में बालों की विग बनाने का बड़ा कारोबार है. अनुमानित तौर पर ये कारोबार दुनियाभर की विग इंडस्ट्री का 70 प्रतिशत है. चीन के शुचेंग प्रांत की बात करें तो यहां 3 लाख से ज्यादा लोग इस कारोबार में है. ये प्रांत दुनिया का विग कैपिटल कहलाता है. यहां की एक अलीएक्सप्रेस के जरिए रोजाना 40000 से ज्यादा विग बिकते हैं. ये केवल एक साइट की बात है, चीन में ऐसे ढेरों साइट्स पर बिक्री चलती है. अमेरिका और ब्रिटेन इन विग्स के सबसे बड़े खरीददार हैं जो भारी दामों पर विग खरीदते हैं. यहां तक कि ऑर्डर पर विग कस्टमाइज भी करवाए जाते हैं, जो और महंगा होता है.

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देवस्थानम को लेकर क्यों है संदेह

फिलहाल बवाल इस बात पर हो रहा है कि इंटरनेशनल मार्केट में बालों की कीमत बढ़ने के बाद भी देवस्थानम ट्रस्ट की कमाई इसमें खास बढ़ी नहीं. इस पर खुद देवस्थानम के कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी यूनियन का कहना है कि इस मामले की जांच होनी चाहिए कि कहीं जानबूझकर बालों की नीलामी के दौरान तस्करों को तो नहीं जोड़ा जा रहा, जिनका संबंध चीन से है.
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