• Home
  • »
  • News
  • »
  • knowledge
  • »
  • मार्च तक बंद हो जाएंगे भारत के आधे से ज्यादा ATM, जानिए क्यों?

मार्च तक बंद हो जाएंगे भारत के आधे से ज्यादा ATM, जानिए क्यों?

खराब एटीएम (फाइल फोटो)

खराब एटीएम (फाइल फोटो)

इस स्थिति से बचाव के लिए एक ही रास्ता है लेकिन अभी उस कदम को उठाने से अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ सकता है.

  • Share this:
    नोटबंदी के बाद के देशभर में मौजूद करीब 2.4 लाख एटीएम को 500 और 2000 के नए नोटों के हिसाब से बनाया गया था. इसके तुरंत बाद जब 200 रुपये के नोट जारी हुए तो ATM को एक बार फिर से 200 के नए नोटों के हिसाब से बनाया गया. और अभी सारे ATM से 200 के नोट निकलने शुरू भी नहीं हुए थे, सरकार ने 100 रुपये के नए नोट जारी कर दिए, जिसका आकार 66mm*142mm है, जो कि पिछले 73mm*157mm के आकार वाले पुराने 100 के नोटों से छोटे हैं. इसका सीधा सा मतलब ये है कि एक बार फिर से सारे ATM को 100 के इन नए नोटों के लिए तैयार किया जाएगा.

    जुलाई में जब 100 के नए नोट पहली बार सामने आए थे तब बैंकिंग इंडस्ट्री ने 100 करोड़ रुपये और इनके हिसाब से ATM को तैयार करने के लिए करीब एक साल लगने की बात कही थी.

    हर ATM पर आना है 3,000 रुपये का खर्च
    इन नोटों के हिसाब से ATM तैयार करने के लिए बैंकों और ATM सर्विस प्रोवाइडर को पैसे खर्च करने पड़ेंगे और हर ATM के हिसाब से 3,000 रुपये का खर्चा आएगा.

    इतना पैसा खर्च करने के बाद अब भी देशभर में कुल 2.38 लाख ATM में से करीब 1.3 लाख ATM के बंद होने का खतरा सामने है. एटीएम इंडस्ट्री की शीर्ष संस्था कंफडेरेशन ऑफ ATM इंडस्ट्री (CATMI) के मुताबिक, मार्च 2019 तक देश के 50 फीसदी एटीएम बंद हो सकते हैं. इसमें 1 लाख ऑफ साइट एटीएम और 15,000 व्हाइट लेबल एटीएम हैं. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के डेटा के अनुसार, सितंबर तक भारत में 2,21,492 एटीएम काम कर रहे हैं.

    क्या होते हैं व्हाइट लेबल और ब्राउन लेबल एटीएम
    जिस ATM की देखरेख और संचालन गैर बैंकिंग संस्थाएं करती हैं, उसे व्हाइट लेबल एटीएम कहते हैं. ब्राउन लेवल एटीएम का खर्च कई संस्थाएं मिलकर उठाती हैं. वहीं ज्यादातर एटीएम सीधे बैंकों द्वारा संचालित किए जाते हैं.

    बदले नियमों और अपग्रेडेशन के चलते होगा ऐसा
    CATMI ने बताया कि ऐसा हाल ही में नियमों में आए बदलाव के चलते हो सकता है. बंद होने के पीछे हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर को अपग्रेड किए जाने का खर्च भी शामिल है. कैश मैनेजमेंट स्टैंडर्ड और एटीएम में पैसे डालने के तरीकों के बदलने के चलते ये एटीएम बंद होने का डर है. कैश रखने के नए नियमों और इन्हें एटीएम में पैसे डालने के नियमों में आए बदलावों को लागू करने में CATMI के अनुसार करीब 3,000 करोड़ रुपये का खर्च आएगा.

    इस इंडस्ट्री बॉडी ने यह भी कहा कि ATM इंडस्ट्री, जिसमें मैनेज्ड सर्विस प्रोवाइडर भी शामिल हैं, आज भी ब्राउन लेबल ATM डिप्लॉयर और व्हाइट लेबल ATM ऑपरेटर नोटबंदी के झटके से उबर नहीं पाए हैं. और बदलावों को लागू करने के लिए संसाधन जुटाने में परिस्थिति और भी ज्यादा खराब हो गई है. जिससे कि ज्यादातर सर्विस प्रोवाइडर ATM को बंद करने के लिए मजबूर होने वाले हैं.

    बैंक ATM को बंद होने से बचा सकते हैं
    CATMI ने कहा कि अगर बैंक आगे आकर खर्च को बांटने का काम करें तभी इस स्थिति से बचा जा सकता है. जबतक ATM संचालकों को बैंकों की ओर से इस खर्च के लिए कुछ पैसे नहीं मिलते, ऐसा माहौल बनता नज़र आ रहा है कि वे अपना ATM चलाने का कांट्रैक्ट खत्म कर देंगे. जिससे कि बड़ी संख्या में ATM बंद हो जाएंगे. पिछले कुछ वक्त में भारतीय बैंक भी भारी NPA से जूझ रहे हैं ऐसे में यह राह भी आसान नहीं दिखती है. इसका अर्थव्यवस्था पर बुरा असर हो सकता है.

    CATMI के अनुसार, ज्यादातर ATM जो कि बंद होने की कगार पर हैं, वे गैर-शहरी इलाकों में पड़ते हैं. जबकि आज भी यहीं पर ज्यादातर लोग कैश पर निर्भर करते हैं. संस्था ने यह चेतावनी भी दी कि ATM के बंद होने से हज़ारों नौकरियां चली जाएंगी और सरकार के आर्थिक समावेशन के लक्ष्य पर भी असर पड़ेगा.

    यह भी पढ़ें: अगर चीन में नहीं तो कहां बनते और छपते हैं भारतीय नोट?

    पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.

    हमें FacebookTwitter, Instagram और Telegram पर फॉलो करें.

    विज्ञापन
    विज्ञापन

    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज