हनुमान के जन्मस्थान को लेकर आंध्रप्रदेश और कर्नाटक में क्या विवाद है?

हनुमान जी की पूजा लगभग पूरे देश में भगवान राम के अनन्य भक्त के तौर पर होती है

हनुमान जी की पूजा लगभग पूरे देश में भगवान राम के अनन्य भक्त के तौर पर होती है

Hanuman Janmabhoomi: श्रीराम भक्त हनुमान को लेकर कर्नाटक और आंध्रप्रदेश के बीच विवाद चला आ रहा है कि उनकी जन्मस्थली (Hanuman place of birth claim by Karnataka and Andhra Pradesh) दोनों में से किस राज्य में है. अब कर्नाटक के एक मठ प्रमुख ने नया ही दावा किया.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 14, 2021, 6:37 AM IST
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भगवान श्रीराम (Lord Rama) के दूत हनुमान (Hanuman) को लेकर पहले से ही आंध्रप्रदेश और कर्नाटक में जंग छिड़ी हुई थी. अब इस विवाद में एक और कड़ी जुड़ गई है. दरअसल विवाद में कर्नाटक के शिवमोगा स्थित एक मठ भी कूद पड़ा और दावा कर रहा है कि भक्त हनुमान का जन्म बताए जा रहे दोनों स्थानों पर नहीं, बल्कि कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले के तीर्थस्थल गोकर्ण (Gokarna) में हुआ था.

पवनपुत्र को लेकर हो रहा विवाद

हनुमान जी की पूजा लगभग पूरे देश में भगवान राम के अनन्य भक्त के तौर पर होती है. यहां तक कि उनके भव्य मंदिर भी बहुत सी जगहों पर हैं, जहां नियमित तौर पर पूजा होती है. इधर हनुमान को लेकर दो राज्यों, कर्नाटक और आंध्रप्रदेश के बीच लंबे समय से विवाद चला आ रहा है. बता दें कि कर्नाटक ने हमेशा ये माना कि हनुमान का जन्म हकोप्पल जिले के पास किष्किंधा में अंजनाद्री पहाड़ पर हुआ था.

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आंध्रप्रदेश भी हनुमान का जन्मस्थल अपने यहां बताता है

उसका कहना है कि भक्त हनुमान की जन्मभूमि तिरुमला की 7 पहाड़ियों में से एक है. दिलचस्प बात ये है कि इस पर्वत का नाम भी अंजनाद्रि है. इस बीच जान लें कि आंध्रप्रदेश के चित्तूर जिले में स्थित तिरुपति वेंकटेश्वर मंदिर केवल आंध्रप्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश और दुनिया में हिंदू आस्तिकों की आस्था का केंद्र रहा है. यहां हर साल दूर-दूर से लोग दर्शन के लिए आते हैं.



tirupati lord hanuman birthplace
तिरुपति-तिरुमला मंदिर आंध्रप्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश और दुनिया में हिंदू आस्तिकों की आस्था का केंद्र रहा


क्या कहता है नया दावा

इन दोनों राज्यों के अपने दावों के बीच अब नया एंगल आ चुका है. इसमें कर्नाटक के ही रामचंद्रपुर मठ के संत ने कहा है कि हनुमान की जन्मस्थली बताए जा रहे दोनों स्थानों में नहीं, बल्कि उत्तर कन्नड़ जिले के गोकर्ण में है. गोकर्ण पहले से ही एक तीर्थस्थल रहा है. मैंगलोर के पास स्थित इस जगह पर काफी प्राचीन मंदिर हैं. यहां पर महाबलेश्वर मंदिर भी है, जिसके बारे में कहा जाता है कि ये लगभग 1500 साल प्राचीन है. ये भगवान शिव का मंदिर है. अब हनुमान के जन्मस्थल की बात अगर सच हो जाए, तो ये स्थान और बेहतर तरीके से विकसित हो सकेगा.

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अपने पक्ष में ये प्रमाण दे रहे 

दावा करने वाले रामचंद्रपुर मठ के प्रमुख राघवेश्वर भारती अपनी बात के प्रमाण के तौर पर रामायण का ही हवाला देते हैं. अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक कर्नाटक के शिवमोगा में रामचंद्रपुर मठ के प्रमुख राघवेश्वर भारती ने अपने दावे में रामायण का जिक्र है. उनके मुताबिक रामायण में भगवान हनुमान ने सीता से कहा था कि उनका जन्म स्थान समुद्र के पार गोकर्ण में है. राघवेश्वर भारती ने कहा, 'रामायण में जो प्रमाण मिले हैं उसके मुताबिक हम कह सकते हैं कि गोकर्ण हनुमान की जन्मभूमि है और किष्किंधा में अंजनाद्रि उनकी कर्मभूमि थी.'

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मैंगलोर के पास स्थित गोकर्ण में काफी प्राचीन मंदिर हैं


जांच के लिए समिति बन चुकी 

अब तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TDD) इस बारे में चौकन्ना हो चुका है और इस मामले एक विशेषज्ञ समिति भी बनी है जो पौराणिक तथ्यों के आधार पर जांच कर रही है. हो सकता है कि आने वाले 21 अप्रैल को इस मामले में सामने आई बातें समिति पेश करे. चूंकि भक्त हनुमान को लेकर ये दावा काफी संवेदनशील मुद्दा है, इसलिए पैनल में केवल मंदिर से जुड़े लोग नहीं, बल्कि तमाम तरह के विशेषज्ञ हैं. इनमें वैदिक जानकार, इसरो के वैज्ञानिक और पुरातत्व विभाग के विशेषज्ञ भी शामिल हैं.

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तीनों पक्ष अपनी बात के सबूत जुटाने में लगे 

पैनल की रिपोर्ट आने से पहले तीनों ही दावों से जुड़े विशेषज्ञ अपनी बात को सही मान रहे हैं. कर्नाटक में अपने दावे को पुख्ता करने के लिए एक प्रोजेक्ट पर काम किया जा रहा है. बता दें कि रामायण में भी हंपी से जुड़े हुए किष्किंधा का प्रसंग आता है. अब इसी तरह से इस स्थल को तीर्थ के तौर पर बढ़ावा देने की वहां बात हो रही है. दूसरी ओर आंध्रप्रदेश हमेशा से ही तिरुमला में पवनपुत्र की जन्मस्थली को लेकर निश्चित रहा और वहां पर तीर्थ बना हुआ है ही. वहीं टीडीडी के कार्यकारी अधिकारी केएस जवाहर रेड्डी का कहना है कि उनके पास पौराणिक और पुरातात्विक प्रमाण हैं. इनके आधार पर वो साबित कर सकते हैं कि तिरुपति के अंजनाद्रि पर्वत पर ही हनुमान का जन्म हुआ था.
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