वेब सीरीज Scam की लोकप्रियता के बीच जानें, क्या कर रही है हर्षद मेहता की फैमली

' स्कैम  1992: द हर्षद मेहता स्टोरी' नाम से ये सीरीज आर्थिक घोटालों पर आधारित है

' स्कैम 1992: द हर्षद मेहता स्टोरी' नाम से ये सीरीज आर्थिक घोटालों पर आधारित है

हर्षद मेहता (Harshad Mehta) जिसे आज भी सबसे बड़ा घोटालेबाज माना जाता है, का दाग धोने के लिए उसके भाई अश्विन ने वकालत पढ़ी और आज मुंबई हाईकोर्ट में प्रैक्टिस कर रहे हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 4, 2021, 11:40 AM IST
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साल 2020 में ओटीटी स्पेस पर अपराध से जुड़ी वेब सीरीज काफी देखी गईं. इनमें सबसे ऊपर ' स्कैम 1992: द हर्षद मेहता स्टोरी' नाम की सीरीज रही. जैसा कि नाम से जाहिर है, ये शेयर मार्केट ब्रोकर हर्षद मेहता के जीवन पर आधारित कहानी थी. इसके बाद से लोग लगातार ये जानने की कोशिश में हैं कि देश के इस सबसे बड़े घोटालेबाज की मौत के बाद उनका परिवार कहां है और क्या कर रहा है.

इसके लिए पहले हर्षद मेहता की पारिवारिक पृष्ठभूमि समझ लेते हैं. गुजरात के राजकोट जिले के एक गांव में जन्मे मेहता का परिवार जल्द ही काम की तलाश में मुंबई आ गया था. वहां कांदीवली में रहते हुए उनके पिता टेक्सटाइल से जुड़ा छोटा-मोटा काम करते. काम उतना ठीक न चलने पर परिवार ने मुंबई छोड़ा और छत्तीसगढ़ (तत्कालीन मध्यप्रदेश) के रायपुर पहुंच गए. यहीं से हर्षद और उनके भाई ने पढ़ाई की और सेल्स का काम करते हुए वापस मुंबई पहुंच गए.

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यही वो शहर था, जिसने हर्षद मेहता को शेयर की अ-ब-स सिखाई और फिर जो हुआ, उसे आज तक देश के इतिहास का सबसे बड़ा घोटाला माना जाता है. दोष साबित होने पर हर्षद जेल पहुंच गए और वहीं साल 2001 में कार्डियक अरेस्ट से उनकी मौत हुई. इसके बाद से एक अलग कहानी शुरू होती है, जो मुजरिम के परिवार के संघर्ष की कहानी है.
मुंबई ने ने हर्षद मेहता को शेयर की अ-ब-स सिखाई


हुआ ये कि हर्षद मेहता की मौत के बाद उनपर से सारे केस अपने-आप ही खत्म हो गए लेकिन परिवार ने तब भी कानूनी लड़ाई नहीं छोड़ी. उनके भाई अश्विन मेहता ने हर्षद की मौत के बाद जीवन के पच्चासवें दशक में वकालत की डिग्री ली और भाई से जुड़े मामलों में लड़ने लगे. साथ ही भाई के नाम से लगा धब्बा हटाने के लिए अश्विन ने अलग-अलग बैंकों को लगभग 1700 करोड़ रुपयों की भरपाई भी की. बता दें कि ये पैसे अश्विन को शेयर मार्केट से ही मिले थे.

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कानूनी लड़ाई लगभग 27 साल चली, जिसके बाद इनकम टैक्स ट्रिब्यूनल ने साल 2019 में यानी हाल ही में मेहता के साथ उनकी पत्नी ज्योति मेहता और अश्विन मेहता से की हुई लगभग 2000 करोड़ रुपए की टैक्स की मांग को खारिज कर दिया. साल 2019 हर्षद मेहता के परिवार के दूसरी कई कानूनी राहतें लेकर आया. जैसे इसी साल ज्योति मेहता ने फेडरल बैंक के खिलाफ एक केस जीता. इसके बाद बैंक को हर्षद की बकाया राशि को ब्याज के साथ ज्योति मेहता को लौटाना पड़ा.

हर्षद मेहता की मौत के बाद उनपर से सारे केस अपने-आप ही खत्म हो गए


हर्षद और ज्योति का एक बेटा भी है, जिसका नाम अतुर है. इस शख्स के बारे में कहीं कोई बड़ी या पुख्ता जानकारी नहीं. ऐसा अनुमान है कि जानबूझकर ही ये परिवार लो-प्रोफाइल रह रहा है ताकि किसी किस्म का कोई खतरा न हो. इसकी वजह हर्षद के घोटालों में कई बड़े राजनेताओं का नाम आना भी है. घोटाले में फंसने पर हर्षद मेहता ने ये कहकर सनसनी मचा दी थी कि मामले से बच निकले के लिए उसने तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हाराव को पार्टी फंड के नाम पर एक करोड़ रुपए की घूस दी थी. हालांकि कांग्रेस ने इसे सिरे से खारिज कर दिया और इस तरह से तत्कालीन पीएम पर रिश्वत लेने का आरोप साबित नहीं हो सका.

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बहरहाल. अतुर मेहता का जिक्र एक बार बिजनेस स्टैंडर्ड में आया था. अखबार के मुताबिक उन्होंने एक टेक्सटाइल कंपनी में काफी बड़ा शेयर खरीदा था. याद करें कि अतुर के दादा यानी हर्षद के पिता ने भी मुंबई आने पर टेक्सटाइल में ही हाथ आजमाया था और खुद हर्षद ने कपड़ा व्यापार में मामूली कारोबारी की तरह काम की शुरुआत की थी, जिसके बाद वे एकदम से सेल्स में आ गए और फिर शेयर मार्केट में.
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