जानिए उस द्वीप के बारे में, जो दुनिया का सबसे बड़ा कोरोना कब्रगाह बन सकता है

जानिए उस द्वीप के बारे में, जो दुनिया का सबसे बड़ा कोरोना कब्रगाह बन सकता है
न्यूयॉर्क का हार्ट आइलैंड (Hart Island) वो द्वीप है, जहां 19वीं सदी से वे लाशें दफनाई जा रही हैं

101 एकड़ में फैले इस द्वीप में रोजाना 24 से भी ज्यादा कोरोना संक्रमित (coronavirus infected) लाशें दफनाने को लाई जा रही हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 11, 2020, 11:27 AM IST
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न्यूयॉर्क का हार्ट आइलैंड (Hart Island) वो द्वीप है, जहां 19वीं सदी से वे लाशें दफनाई जा रही हैं, जिनका कोई रिश्तेदार या जाननेवाला नहीं होता. या फिर जिनके परिवार अंतिम संस्कार का खर्च नहीं उठा सकते. इसके अलावा संक्रामक मानी जाने वाली बीमारी जैसे H.I.V./aids और सिफलिस जैसे यौनरोग से हुई मौत में शवों को यहां दफनाया जाता रहा है. अब कोरोना वायरस से हो रही मौतों के बढ़ने के साथ-साथ इस द्वीप पर शवों को दफनाने का काम फिर जोर पकड़ रहा है.

दुनिया में कोरोना वायरस संक्रमण लगातार बढ़ने के बीच अमेरिका इस वायरस का एपिसेंटर बन चुका है. यहां अबतक 502,876 लोग कोरोना पॉजिटिव हो चुके हैं, वहीं 18,500 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. अकेले न्यूयॉर्क शहर में 5100 से ज्यादा मौतें हुई हैं. यहां तक कि शहर में कब्रगाह या मुर्दाघर भी इन लाशों को रखने के लिए कम पड़ रहे हैं. यही वजह है कि शहर में लाशों को दफनाने के लिए अस्थायी मुर्दाघरों की तलाश जोरों पर है.

बता दें कि फिलहाल कोरोनावायरस के हुई मौत में शव को मुर्दाघर में 6 दिन और रेफ्रिजरेटेड ट्रक में 14 दिनों से ज्यादा वक्त तक नहीं रखा जा सकता है. इससे ज्यादा वक्त होने पर लाशों के खराब होने का डर भी रहता है.



शहर में लाशों को दफनाने के लिए अस्थायी मुर्दाघरों की तलाश जोरों पर है (Photot- Reuters)

मुर्दाघरों के लिए नई जमीन की तलाश के बीच ये खबर आई थी कि शहर के ही पार्कों में लाशें दफनाई जा सकती हैं. यहां तक कि मैनहट्टन के काउंसिल मैन Mark Levine ने इस बारे में ट्वीट भी कर दिया था. बाद में ये ट्वीट हटा लिया गया. इसके बाद शहर के मेयर Bill de Blasio ने पार्कों को कब्रगाह बनाने की बात को अफवाह बताते हुए साफ किया कि हार्ट आइलैंड में अस्थायी तौर पर ये काम शुरू हो चुका है. न्यूयॉर्क में 2008 में तैयार हुए Pandemic Influenza Surge Plan के अनुसार अगर शहर में कोल्ड स्टोरज यूनिट लाशें रखने के लिए कम पड़ जाएं तो Hart Island में लाशें रखी जा सकती हैं.

यहां लाशें दफनाई जा रही हैं लेकिन इस तरीके से कि कोरोना का कहर शांत होने के बाद परिवार अगर अपने परिजन का शव देखना और उसका अंतिम संस्कार करना चाहें तो लाशें निकाली जा सकें. कोरोना के मरीज की मौत के बाद उसे आइसोलेशन वार्ड या मुर्दाघर से इस द्वीप तक ले जाने तक एक खास प्रक्रिया अपनाई जा रही है. इसमें मृत शरीर को लीक-पूफ्र बॉडी बैग में रखकर लकड़ी के कॉफिन में रखा जा रहा है. हर कॉफिन के ऊपर मृतक का नाम बड़े-बड़े अक्षरों में खुदा होता है ताकि अगर कभी किसी वजह से लाश निकालनी पड़े तो आसानी हो. चूंकि शहर के पूर्व में बसे इस द्वीप पर नाव के जरिए ही पहुंचा जा सकता है इसलिए सैकड़ों, हजारों की संख्या में लाशों को अस्थायी तौर पर भी दफनाया जाए तो किसी तरह की महामारी फैलने का डर कम से कम रहेगा.

मुर्दाघरों के लिए नई जमीन की तलाश के बीच ये खबर आई थी कि शहर के ही पार्कों में लाशें दफनाई जा सकती हैं


आमतौर पर द्वीप में काम करने वाले जेल के कैदी हर हफ्ते लगभग 25 अनाम लाशों को दफनाया करते थे. लेकिन मार्च में कोरोना से होने वाली मौतों में रिकॉर्ड बढ़त होने के बाद से ये संख्या लगातार बढ़ रही है. Department of Correction के प्रतिनिधि Jason Kersten बताते हैं कि कोरोना के मृतकों की संख्या बढ़ने के बाद से यहां रोज रेफ्रिजरेटेड ट्रक में लगभग भरकर 2 दर्जन लाशें दफनाने के लिए लाई जा रही हैं. यानी हफ्तेभर में 70 से भी ज्यादा लाशें दफनाई जा रही हैं.

पहले जेलों में रह रहे कैदी यहां कब्रें खोदने और लाशें दफनाने का काम करते आए थे लेकिन कोरोना संक्रमण के खतरे के बीच इस बंदोबस्त में बदलाव किया गया है. दरअसल Federal Bureau of Prisons ने पिछले हफ्ते ही जेल में 14 दिनों के लॉकडाउन की घोषणा कर दी, ताकि कैदियों में संक्रमण न फैले. इसके बाद से हार्ट आइलैंड पर कब्रगाह बनाने के लिए कॉन्ट्रैक्ट दिया जा रहा है. न्यूयॉर्क शहर के अधिकारी लगातार ठेका मजदूरों को इस काम के लिए नियुक्त कर रहे हैं. लाशों को चूंकि अस्थायी तौर पर दफनाया जा रहा है इसलिए मशीनों से पहले ही लंबी लंबी-लंबी संकरी खाइयां खोदी जा रही हैं और उनमें ये कॉफिन रखे जा रहे हैं. संकरा रखने के पीछे ये वजह है कि बहुत सी लाशें आएं तो दफनाने के लिए जगह कम न पड़े. ठेका मजदूर पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्यूपमेंट पहनकर काम कर रहे हैं ताकि किसी भी तरह से उन्हें संक्रमण न फैले.

जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के मुताबिक कोरोना वायरस से कहर से जूझ रहे अमेरिका में आने वाले दिनों में मौत का आंकड़ा और भी ज्यादा हो सकता है.

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