क्या Aliens का फेंका गया अंतरिक्षीय कचरा हैं पृथ्वी की ओर आ रहे चमकीले पिंड

हार्वर्ड के प्रोफेसर ने एक खगोलीय पिंड (Celestial object) के बारे में प्रमाण देने का भी प्रयास किया है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

हार्वर्ड के प्रोफेसर ने एक खगोलीय पिंड (Celestial object) के बारे में प्रमाण देने का भी प्रयास किया है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

हार्वर्ड के प्रोफेसर एवी लोएब यह दावा कर रहे हैं कि अंतरिक्ष से जो चमकीले पिंड पृथ्वी (Earth) की ओर आ रहे हैं वे कोई खगोलीय पिंड (Celestial Objects) नहीं बल्कि एलियंस (Aliens) का फेंका गया कचरा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 3, 2021, 6:14 PM IST
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पृथ्वी (Earth) की ओर उल्काओं (Meteors) या क्षुद्रग्रहों (Asteroid) का आना असामान्य घटना नहीं है. लेकिन यह सुनकर हैरानी हो सकती है कि इस तरह के पिंड जो पृथ्वी की ओर आ रहे हैं वे अंतरिक्ष से आने वाला वह कचरा (Garbage) है जो एलियंस ने वायुमंडल में फेंका है. यह दावा किसी और ने नहीं बल्कि हार्वर्ड (Harvard) के प्रोफेसर एवी लोएब (Avi Loeb) ने किया है.

कौन हैं ये लोएब

लोएब कोई आम आदमी नहीं हैं बल्कि वे हार्वर्ड के खगोलविज्ञान विभाग के प्रमुख हैं और उनका कहना है कि अंतरिक्ष से आने वाले चमकीले पत्थर इस बात का प्रमाण है कि पृथ्वी से बाहर भी इंसान रहते हैं. यह दावा प्रोफेसर लोएब ने अपनी हाल ही में प्रकाशित किताब में किया है जिसका नाम ‘एक्स्ट्राटेरेस्ट्रियल: द फर्स्ट साइन ऑफ इंटेलिजेंट लाइफ बियॉन्ड अर्थ’ है.

साल 2017 में आया था ऐसा पिंड
प्रोफेसर लोएब का कहना है कि साल 2017 में अंतरिक्ष कचरा गिराया था और हाल ही में हमारे सौरमंडल में एक चमकीला पिंड उड़ता हुआ देखा गया था वह एक चमकीले पत्थर के जैसा था. प्रोफेसर लोएब का कहना है कि 6 सितंबर 2017 को वेगा तारे से एक पिंड पृथ्वी के वायुमंडल में आया था और 9 सितंबर को सूर्य के पास चला गया था.

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आमतौर पर सौरमंडल (Solar System) में बाहर के पिंड (Objects) नहीं आ पाते हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

पृथ्वी की ओर लौट कर भी आया था



वेगा तारा हमारी पृथ्वी से 25 प्रकाशवर्ष की दूरी पर स्थित है. लोएब के मुताबिक  यह शुक्र ग्रह के पास से 58900 मील प्रति घंटा की दर से गुजरा था और उसके बाद पैगासस तारासमूह की ओर चला गया. उसके बाद यह 7 अक्टूबर को पृथ्वी की ओर आया.

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सौरमंडल से बाहर का पिंड था ये

इस पिंड का नाम ओउमुआमुआ (Oumuamua)है. इस हवाई शब्द का अर्थ साकाउट है. यह एक सौ मीटर लंबा पिंड था और पहले अंततारकीय पिंड था जो हमारे सौरमंडल में दिखाई दिया था. दिलचस्प बात है यह है कि ओउमुआणुआ (Oumuamua) के बारे में कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि इस पिंड पर सौरमंडल के गुरुत्व का कोई प्रभाव नहीं पड़ा था.

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इस पिंड (Object) की चमक क्षुद्रग्रह (Asteroid) और धूमकेतु (Comet) से कही ज्यादा थी. सांकेतिक फोटो

क्यों मुश्किल था इसे एलियन की वस्तु मानना

लोएब ने इसकी बारे में अपनी किताब में चर्चा करते हुए समझाया है कि क्या हो अगर गुफा में रहने वाले किसी व्यक्ति को सेलफोन मिल जाए. ऐसा व्यक्ति जिसने अपने जीवन में केवल पत्थर ही देखे हों वह तो केवल  इसे चमकीला पत्थर ही समझेगा. लोएब ने यह भी बताया कि खगोलविदों ने यह निष्कर्ष निकाला था कि यह पिंड हर 8 घंटे में सूर्य का प्रकाश प्रतिबिंबित करता है. इससे उन्होंने एक यह आसान निष्कर्ष निकाला कि यह एक चक्कर लगाने में 8 घंटे लगाता है.

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प्रोफेसर लोएब का कहना है कि ओउमुआमुआ असमान्य रूप से चमकीला भी था. यह धूमकेतु या क्षुद्रग्रह से मुकाबले सूर्य की रोशनी को कम से कम 10 गुना ज्यादा प्रतिबिंबित कर रहा था.  लेकिन सबसे खास बात यह थी कि इसे सौरमंडल के बाहर से धक्का मिल रहा था.

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