क्या अमेरिका को पछाड़कर चीन दुनिया की सबसे बड़ी इकनॉमी हो गया है?

चीन इकनॉमी के मामले में अमेरिका से कहीं आगे निकल चुका है (Photo- news18 via Reuters)
चीन इकनॉमी के मामले में अमेरिका से कहीं आगे निकल चुका है (Photo- news18 via Reuters)

अर्थव्यवस्था पर नजर रखने वाली कई अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएं (international organizations) मानने लगी हैं कि चीन इकनॉमी के मामले में अमेरिका से कहीं आगे (China overtaken the US as world's largest economy) निकल चुका है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 24, 2020, 9:13 AM IST
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एक तरफ पूरी दुनिया कोरोना महामारी से आई मंदी (recession due to coronavirus) से लड़ रही है, वहीं चीन (China) दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनकर उभरा है. इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड (IMF) की जारी ताजा रिपोर्ट के मुताबिक चीन अमेरिका से भी आगे निकल गया है. तो क्या चीन वाकई में सुपर पावर बन जाएगा! जानिए, क्या है चीन और अमेरिका के बीच सुपर पावर की इस स्पर्धा का सच.

मंदी के बीच चीन की बढ़त
साल 2008 में अमेरिकी बैंक लीमैन ब्रदर्स के दिवालिया होने के साथ ही दुनियाभर में मंदी की लहर चल पड़ी. अब लगभग एक दशक बाद दोबारा वही मंदी दिख रही है. कोरोना वायरस के कारण आई इस मंदी से विकसित और काफी ताकतवर देश भी फिलहाल जूझ रहे हैं. दूसरी तरफ चीन इससे बाहर आया दिख रहा है. कम से कम हालिया आंकड़े तो यही बताते हैं. हफ्तेभर पहले ही चीन ने विकास दर के नए डाटा जारी किए. इसमें उसकी इकनॉमी पिछली तिमाही में करीब 5 प्रतिशत बढ़ी हुई है.

IMF के अनुसार चीन सबसे आगे है सांकेतिक फोटो (news18 hind)

क्या बताते हैं आंकड़े


ये तो हुए कोरोना दौर के साथ आए ताजा आंकड़े लेकिन इसके अलावा जो खबर आ रही है, वो ज्यादा चिंतित करने वाली है. IMF ने पर्चेजिंग पावर पैरिटी (PPP) के आधार पर जो डाटा निकाले, उसके अनुसार चीन सबसे आगे है. ये पीपीपी को देखें तो चीन की अर्थव्यवस्था 24.2 डॉलर ट्रिलियन की है, वहीं अमेरिका की इससे काफी कम लगभग 20.8 डॉलर ट्रिलियन है.

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क्या है मुद्रा की क्रयशक्ति
बता दें कि अलग-अलग देशों में आय के स्तरों की तुलना करने के लिए दुनियाभर में पर्चेसिंग पावर पैरिटी (PPP ) का उपयोग किया जाता है. इससे किसी देश की अर्थव्यवस्था के आकार का पता लगाया जा सकता है. इससे ये भी समझ आता है कि आप अपने पैसों से अलग-अलग देशों में कितना और क्या खरीद सकते हैं. यानी कुल मिलाकर इससे दो देशों के बीच तुलना करते हुए ये समझ आता है कि दो देशों की मुद्रा की क्रयशक्ति में कितना अंतर है या क्या समानताएं हैं.

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क्या चीन है अमेरिका से आगे
इसमें ये दिखा कि एक अमेरिकी डॉलर में अमेरिका में जितनी चीजें खरीदी जा सकती हैं, उससे लगभग दोगुनी चीन में मिलती हैं. इसे हम वेनेजुएला के उदाहरण से भी समझ सकते हैं. आर्थिक तौर पर लगभग दिवालिया हो चुके उस देश ने हाल में एक लाख का नोट जारी किया लेकिन इस नोट में भी खाने-पीने की जरूरत बमुश्किल पूरी हो पा रही है. इस तरह से देखें तो चीन अमेरिका से आगे है.

आय के स्तरों की तुलना करने के लिए दुनियाभर में पर्चेसिंग पावर पैरिटी (PPP ) का उपयोग किया जाता है- सांकेतिक फोटो (Pixabay)


चीन में सालभर का उत्पादन 
द इकनॉमिस्ट की रिपोर्ट के अनुसार साल 2019 में चीन के कामगारों ने 99 ट्रिलियन युवान (चीनी मुद्रा) से ज्यादा का सामान और सेवाएं पैदा कीं. वहीं अमेरिका में 21.4 ट्रिलियन डॉलर के लगभग उत्पादन हुआ. वैसे पिछले साल 6.9 युवान से मिलकर एक डॉलर होता था. इस हिसाब से चीन की जीडीपी अमेरिका से कम लगभग 14 ट्रिलियन डॉलर हुई. इस पक्ष को देखें तो चीन अमेरिका से पीछे लगता है लेकिन इस अर्थव्यवस्था का दूसरा पहलू भी है.

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हर जगह दिखा विकास
अगर किसी वस्तु की खरीद के तौर पर देखें तो 3.8 युवान ही एक डॉलर के बराबर है. इस हिसाब से गणित किया जाए तो चीन की अर्थव्यवस्था पहले से ही यानी पिछले साल से ही अमेरिका से आगे निकल चुकी है. चीन में पिछले तीन दशकों के भीतर तेजी से विकास हुआ. ये विकास बाजार में ही नहीं, बल्कि सभी क्षेत्रों में दिख रहा है. इसमें ग्राहकों की खरीदी की शक्ति से लेकर मिलिट्री को भी जोड़ सकते हैं.

चीन में पिछले तीन दशकों के भीतर तेजी से विकास हुआ- सांकेतिक फोटो (Pixabay)


ब्लूमबर्ग ने भी IMF के आंकड़ों को दोबारा जांचा. इसमें निकलकर आया कि चीन का विकास साल 2021 में 26.8% हो सकता है, जो साल 2025 में बढ़कर 27 प्रतिशत से भी ज्यादा रहेगा. रिपोर्ट के मुताबिक ये वैश्विक अर्थव्यवस्था में अमेरिकी योगदान से ज्यादा माना जा रहा है.

कई दूसरे शोध भी यही बताते हैं 
इस बारे में PwC (PricewaterhouseCoopers) ने भी विस्तृत स्टडी की, जिसमें ये देखने की कोशिश थी कि अगले 30 सालों यानी 2050 में इकनॉमिक सुपरपावर में कैसा बदलाव आएगा. स्टडी में कई चौंकानेवाले बातें निकलकर आईं. इसके अनुसार अमेरिका, जापान और जर्मनी तब अपनी जगहों से लुढ़ककर नीचे हो जाएंगे. वहीं चीन और भारत काफी आगे निकल जाएंगे. भारत के मामले में अनुमान है कि  2050 में दुनियाभर की जीडीपी में 15% भारत का होगा. एक और बात जो निकलकर आई, उसके अनुसार वियतनाम, फिलीपींस और नाइजीरिया जैसे देशों में भी 30 सालों में काफी विकास होगा.
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