इस लड़के पर 10 साल की उम्र में अपराध का है आरोप, 5 साल पाल-पोसकर अब सूली पर चढ़ाएगा सऊदी?

राजनीतिक मतभेदों या विरोधों की कुचलने के लिए सज़ा ए मौत को हथियार की तरह इस्तेमाल करता है सऊदी अरब. एक खास समुदाय समुदाय के खिलाफ सऊदी अरब की दमन की नीति कई सालों से जारी है.

News18Hindi
Updated: June 11, 2019, 9:40 PM IST
News18Hindi
Updated: June 11, 2019, 9:40 PM IST
'उसने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया... वो आतंकी संगठन से जुड़ा था... उसने एक घातक रसायन बनाया... सुरक्षा बलों पर हमला किया और पुलिस थाने को उड़ाने की कोशिश की...' ये तमाम इल्ज़ाम किस पर लगाए गए? जवाब है - दस साल के एक बच्चे पर! जी हां, सऊदी अरब में सख़्त कानूनों और अत्याचारों की कई कहानियां आप सुन चुके होंगे, इसके बावजूद यह ताज़ा कहानी आपका दिल दहला देगी.

पढ़ें : नाराज जापानी महिलाएं क्यों चला रही हैं #KuToo?



सऊदी अरब की जेल में बंद, 18 साल के होने जा रहे एक लड़के को सज़ा ए मौत देने की तैयारी चल रही है लेकिन चौंकाने वाली बात ये है कि इस बच्चे को 13 साल की उम्र में गिरफ्तार किया गया था और वो भी उस कथित जुर्म के लिए, जो उसने तब किया था, जब वह सिर्फ 10 साल का था!

पढ़ें: सऊदी अरब में बच्चों को भी इस निर्मम ढंग से दी जाती है सजा-ए-मौत

मुर्तजा कुरीरिस की यह कहानी एक खौफनाक हकीकत बयान करती है. सऊदी अरब में अगर आप एक खास समुदाय से ताल्लुक रखते हैं तो आपकी जान लेने के लिए सिस्टम आमादा भी हो सकता है.

उस बच्चे को नहीं पता था बचपने का अंजाम!
साल 2011 में, दस साल का मुर्तजा अपने करीब 30 साथी बच्चों के साथ साइकिल चला रहा था. मुर्तजा के पिता अब्दुल्ला एक प्रदर्शनकारी थे, जो शहीदों की कसम खाकर प्रदर्शन जारी रखने के लिए साथियों से कहते थे. पिता के साथ रहते हुए मुर्तजा ने भी कुछ हल्के फुल्के नारे लगाए और अपना मास्क उतारकर वीडियो बना रहे कैमरे की तरफ देखा, मुस्कुराया और वहां से चला गया.
Loading...

Saudi Arab, death sentence, UAE news, capital punishment, Saudi Arab human rights, सऊदी अरब, सज़ा ए मौत, सऊदी अरब समाचार, बच्चे को फांसी, सऊदी अरब अत्याचार
ग्रे कपड़ों में साइकिल पर सवार मुर्तजा. तस्वीर: सीएनएन


वक्त बीतता गया. साल 2014 में, 13 साल का मुर्तजा जब अपने ​परिवार के साथ बहरीन जाने की तैयारी में था, तब उसे किंग फहद कॉज़वे से सऊदी बॉर्डर अफसरों ने गिरफ्तार कर लिया. उस वक्त वकीलों और प्रदर्शनकारियों ने माना कि मुर्तजा सबसे कम उम्र का सियासी कैदी था.

सीएनएन की विस्तृत रिपोर्ट के मुताबिक मुर्तजा को पहले किशोरों की जेल में बंद किया गया. उससे जबरन कबूलनामा लेने की कोशिश की जाती रही और उसे कभी भी वकील से बात करने की इजाज़त नहीं दी गई. उसे कम से कम 15 महीनों तक एक ऐसी कोठरी में रखा गया, जहां वह ​अकेला था. उसे लगातार पीटा जाता रहा. फिर 16 साल के होते ही मुर्तजा को उस जेल में रखा गया, जो वयस्कों के लिए थी यानी जहां उसे नहीं रखा जा सकता था.

तकरीबन चार साल की प्रताड़ना और ट्रायल के बाद मुर्तजा के खिलाफ चार्जशीट दायर की गई. उस पर आरोप लगाए गए कि उसने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने की हिमाकत की थी. अपने भाई के जनाज़े की सभा को उसने उग्र विरोध प्रदर्शन में तब्दील कर दिया था. वह आतंकवादी संगठन से जुड़ा हुआ था और उसने एक घातक रसायन तैयार पुलिस व पुलिस थाने पर हमला करने की साज़िश रची थी.

Saudi Arab, death sentence, UAE news, capital punishment, Saudi Arab human rights, सऊदी अरब, सज़ा ए मौत, सऊदी अरब समाचार, बच्चे को फांसी, सऊदी अरब अत्याचार
मुर्तजा का वह चित्र जो उसकी गिरफ्तारी से पहले लिया गया था. तस्वीर: सीएनएन


इनमें से ज़्यादातर आरोप मुर्तजा पर उस समय के हिसाब से लगाए गए, जब वह सिर्फ दस साल का था. उसका प्रदर्शनकारी भाई सऊदी अरब के सुरक्षा बलों के हाथों मारा गया था. उसके अंतिम संस्कार के वक्त मुर्तजा की उम्र सिर्फ ग्यारह साल की थी. मुर्तजा के भाई के अंतिम संस्कार में कई लोग शामिल हुए थे लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक वह जुलूस शांतिपूर्ण था.

यूएन और एमनेस्टी इंटरनेशनल जैसी संस्थाएं मुर्तजा के बचाव में बयान जारी करते हुए सऊदी अरब की इस सज़ा प्रणाली को गलत करार दे रही हैं, जिनके हिसाब से मुर्तजा को सज़ा ए मौत देने की तैयारी चल रही है. कहा जा रहा है कि उसे सूली पर लटकाकर मारा जा सकता है या मौत के बाद उसकी लाश के टुकड़े किए जाने की सज़ा सुनाई जा सकती है.

आखिर इस सख़्ती की वजह क्या है?
इसी साल अप्रैल में, सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने के 37 आरोपियों को सऊदी अरब में क्रूरता के साथ सामूहिक रूप से मौत के घाट उतार दिया गया था. इन 37 में से एक अब्दुल करीम अल हवाज भी था जिसे 16 साल की उम्र में गिरफ्तार करने के बाद मुकदमा चलाया गया था. ये शिया समुदाय का था.

पढ़ें: सिर काटकर 37 लोगों को दी गई मौत की सजा पर दुनियाभर में कोहराम

इसी तरह शिया समुदाय के तीन नाबालिगों अली अल निम्र, अब्दुल्ला अल ज़हेर और दाऊद अल मरहून को 2012 में ऐसे ही आरोपों में गिरफ्तार किया गया था और खतरा बना हुआ है कि इन तीनों को किसी भी वक्त सज़ा ए मौत दी जा सकती है.

Saudi Arab, death sentence, UAE news, capital punishment, Saudi Arab human rights, सऊदी अरब, सज़ा ए मौत, सऊदी अरब समाचार, बच्चे को फांसी, सऊदी अरब अत्याचार
सऊदी अरब में दो महीने पहले ही 37 लोगों को मौत के घाट उतारा गया था.


कुल मिलाकर माजरा ये है कि शिया समुदाय सऊदी अरब के निशाने पर रहता है क्योंकि शिया मुसलमान वहां अल्पसंख्यक हैं. एमनेस्टी इंटरनेशनल के मध्य पूर्व के रिसर्च डायरेक्टर लिन मालूफ का कहना है कि 'अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भूमिका अहम हो सकती है. सबको मिलकर एक सुर में आवाज़ उठाना चाहिए कि सऊदी व्यवस्था सज़ा ए मौत के प्रावधान को हथियार के तौर पर इस्तेमाल करना बंद करे'. बकौल लिन मालूफ -

राजनीतिक असहमति को कुचल देने और सरकार के खिलाफ आवाज़ उठाने वालों, चाहे वो बच्चे ही क्यों न हों, को सबक सिखाने के लिए सज़ा ए मौत का इस्तेमाल करने का सऊदी अरब का रिकॉर्ड देखें तो हड्डियां कांप जाएंगी... देश का अल्पसंख्यक शिया समुदाय तो इस निशाने पर है ही.

कहानी इतनी ही नहीं है!
ये आंकड़ा गौरतलब है कि साल 2014 से 100 से ज़्यादा शिया सऊदी मुसलमानों के खिलाफ उल्टे-सीधे आरोप लगाकर उन पर स्पेशलाइज़्ड क्रिमिनल कोर्ट में मुकदमे चलाए जाने की रिपोर्ट सामने आ चुकी हैं. हैरानी की बात है कि सरकार का शांतिपूर्ण विरोध करने के आरोप में आतंकवाद निरोधी अदालत में मुकदमे चलाए गए.

पढ़ें: इन नौ देशों में साधारण अपराध पर भी हो जाती है मौत की सजा

एमनेस्टी इंटरनेशनल का दावा ​है कि एससीसी में शिया प्रदर्शनकारियों के खिलाफ चलाए गए मुकदमों में ईमानदारी और इंसाफ से काम नहीं लिया गया. उल्टे सीधे आरोपों में मौत की सज़ा तक दे दी गई. यहां तक कि आरोप लगाने के बाद अत्याचारों के सहारे जबरने कबूलिया बयान लिये गए.

Saudi Arab, death sentence, UAE news, capital punishment, Saudi Arab human rights, सऊदी अरब, सज़ा ए मौत, सऊदी अरब समाचार, बच्चे को फांसी, सऊदी अरब अत्याचार
इंटरनेट पर जारी है मुर्तजा को बचाने की मुहिम


फ्री मुर्तजा और सेव मुर्तजा
सीएनएन की रिपोर्ट से हुए मुर्तजा के केस के खुलासे के बाद सोशल मीडिया पर मुर्तजा के बचाव में चर्चा भी जारी है. फ्री मुर्तजा और सेव मुर्तजा जैसे हैशटैग के साथ लोग इंसाफ की मांग कर रहे हैं. सोशल मीडिया पर इस मुहिम से पाकिस्तान की सियासी सेलिब्रिटी फातिमा भुट्टो भी जुड़ी हैं और उन्होंने भी मुर्तजा के लिए इंसाफ की गुहार लगा चुकी हैं.

एक क्लिक और खबरें खुद चलकर आएगी आपके पाससब्सक्राइब करें न्यूज़18 हिंदी  WhatsApp अपडेट्स

ये भी पढ़ें:
क्या होते हैं मौसम विभाग के येलो, ऑरेंज व रेड अलर्ट?
जब 45 डिग्री के ऊपर जाता है पारा, तो शरीर क्यों होने लगता है बेचारा?
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...