तैराकी के शौकीन संभल जाएं, हो सकती है ये खतरनाक बीमारी

कई बार हालात इतने खराब हो जाते हैं कि इंफेक्शन कानों से होता हुआ शरीर के दूसरे हिस्सों जैसे सिर तक पहुंच जाता है. ये एक मेडिकल इमरजेंसी है जो टालने पर जानलेवा हो सकती है.

News18Hindi
Updated: August 11, 2019, 12:55 PM IST
तैराकी के शौकीन संभल जाएं, हो सकती है ये खतरनाक बीमारी
पानी में पाए जाने वाले बैक्टीरिया कानों को संक्रमण या स्थायी बहरापन भी दे सकते हैं (प्रतीकात्मक फोटो)
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Updated: August 11, 2019, 12:55 PM IST
आप भी स्विमिंग पूल या नदी-तालाब देखकर उसमें छपाक से कूद पड़ने को उतावले हो पड़ते हैं तो जरा संभलकर. आपका ये पानी प्रेम आपके कानों की सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है. पानी में पाए जाने वाले बैक्टीरिया कानों को संक्रमण या स्थायी बहरापन भी दे सकते हैं. बोलचाल की भाषा में इसे स्विमर्स ईयर कहते हैं.

ऐसे समझें स्विमर्स ईयर को
यह ईयर कनाल का संक्रमण है जिसमें कानों के बाहरी हिस्से में सूजन, जलन और दर्द होता है. कानों को प्रोटेक्ट करने वाली बाहरी सतह कई बार धूल-मिट्टी, रेत या पानी जाने से हट जाती है, जिसके कारण कानों में सूजन आ जाती है और दर्द रहता है. इस संक्रमण को मेडिकल की भाषा में ऑटाइटिस एक्सटर्ना भी कहते हैं. आमतौर पर पानी या मिट्टी में पाए जाने वाले बैक्टीरिया इसकी वजह होते हैं लेकिन कई बार फंगस और वाइरस भी ये इंफेक्शन दे सकते हैं. शुरुआत में संक्रमण की अनदेखी करने पर यह गंभीर हो सकता है.

क्या हैं इसके लक्षण

इसके शुरुआती लक्षणों में कानों में खुजलाहट, हल्की सी लाली, कानों को छूने पर सनसनाहट और इससे पारदर्शी, गंधरहित पानी निकलना शामिल हैं. संक्रमण बढ़ने पर इन सारे लक्षणों में बढ़ोत्तरी के साथ ही कानों से मवाद आना, सुनने की क्षमता कम होना जैसी बातें होती हैं. तेज दर्द जो कानों से होकर चेहरे और गर्दन तक फैल जाता है और मरीज को बुखार भी आता है.

पानी या मिट्टी में पाए जाने वाले बैक्टीरिया इसकी वजह होते हैं (प्रतीकात्मक फोटो)


इन वजहों से भी हो सकता है इंफेक्शन
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अगर कोई दिन में कई-कई घंटे पानी या नमी वाले हालातों में बिताता है तो ये बैक्टीरिया के पनपने के लिए आदर्श हालात देता है. यहां तक कि कानों को लगातार साफ करने की आदत भी कान खराब कर सकती है. खासकर हेयरपिन या किसी लकड़ी से साफ करते हैं तो इससे कान की बाहरी सतह छिल जाती है और बैक्टीरिया भीतर प्रवेश कर जाते हैं. यहां तक कि कई बार म्यूजिक सुनने के लिए हेडफोन या हैंड्स-फ्री का इस्तेमाल भी इस तरह के संक्रमण की वजह होता है. हेयर स्प्रे या हेयर डाई के कानों में जाने पर भी आप स्विमर्स ईयर के मरीज बन सकते हैं.

वैसे तो ज्यादातर वक्त हमारे कान खुद ही किसी भी इंफेक्शन से लड़ने के लिए तैयार रहते हैं. कानों के अंदरुनी हिस्से में पाया जाने वाला ईयर वैक्स ईयर कनाल को किसी भी चोट से बचाता है और जर्म्स का फैलना रोकता है. हालांकि अगर कानों के भीतर किसी भी किस्म का जख्म हो जाए तो ईयर वैक्स इंफेक्शन रोकने में मदद नहीं कर पाता है.

समस्या के गंभीर पहलू
समय रहते पहचान और इलाज न होने से मरीज को कई तरह की गंभीर समस्याएं हो सकती हैं. उदाहरण के तौर पर अस्थायी बहरापन. यदि संक्रमण तीन महीने या इससे अधिक रहे तो यह क्रॉनिक संक्रमण की श्रेणी में आ जाता है और इलाज अधिक मुश्किल हो जाता है. कई बार यह कानों की बाहरी सतह से होता हुआ सिर के भीतरी हिस्से तक पहुंच जाता है और मस्तिष्क को भी नुकसान पहुंचा सकता है. बुजुर्गों और डायबिटीज के मरीजों को इस संक्रमण का अधिक खतरा रहता है.

कानों की ज्यादा सफाई या दूसरे के हेडफोन से म्यूजिक सुनना भी भारी पड़ सकता है (प्रतीकात्मक फोटो)


ऑटाइटिस एक्सटर्ना कानों की बाहरी सतह का संक्रमण है जो आमतौर पर कानों में पानी या धूल जाने से होता है. वैसे कानों में किसी भी तरह की नमी या खरोंच लगना यह संक्रमण दे सकता है. इससे कान में दर्द, पानी या मवाद बहना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं. पहचान और बीमारी की दशा के आधार पर इलाज किया जाता है. अधिक दर्द होने पर मरीज को दवा के साथ ईयर पैक के इस्तेमाल की सलाह भी दी जाती है.

लंबे समय तक टालने पर खतरनाक
लॉन्ग टर्म स्विमर्स ईयर भी एक अवस्था है जो तब आती है जब बीमारी तीन महीने या इससे ज्यादा वक्त तक खिंच चुकी हो. इससे बैक्टीरिया का इलाज मुश्किल हो जाता है. कई बार हालात इतने खराब हो जाते हैं कि इंफेक्शन कानों से होता हुआ शरीर के दूसरे हिस्सों तक पहुंच जाता है. जैसे कि सिर की हड्डियों और कार्टिलेज में. ये एक मेडिकल इमरजेंसी है जिसमें तुरंत इलाज की जरूरत होती है.

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First published: August 11, 2019, 12:55 PM IST
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