कैसे केरल का हेल्थ सिस्टम कोरोना पर सबसे अच्छा काम कर रहा है

कैसे केरल का हेल्थ सिस्टम कोरोना पर सबसे अच्छा काम कर रहा है
कोरोना को स्टेट इमरजेंसी घोषित करने के बाद कई प्रोटोकॉल बनाए गए

कोरोना वायरस (coronavirus ) पर नियंत्रण के मामले में देश में केरल (Kerala) मॉडल को सबसे अच्छा माना जा रहा है. ये वही राज्य है जहां कोरोना का सबसे पहला मामला आया था और संक्रमण तेजी से फैलता गया

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देश में बीते कुछ ही दिनों में कोरोना के मामले बढ़कर 4,314 हो चुके हैं. महाराष्ट्र (781) और तमिलनाडु (571) से लेकर कई राज्यों में कोरोना वायरस का संक्रमण बढ़ता जा रहा है. जबकि इनके ठीक उलट केरल में अब संक्रमण की दर घट रही है. अब यहां पॉजिटिव मरीजों की संख्या 314 तक सीमित रह गई है. इसके पीछे केरल का हेल्थ मॉडल है, जो कोरोना से पहले जानलेवा निपाह और जीका वायरस को भी पछाड़ चुका है.

कोरोना का केंद्र कहे जा रहे इस राज्य में 30 मार्च तक 222 लोग कोरोना संक्रमित थे, जो 5 अप्रैल तक 306 तक पहुंचे. अगर दूसरे राज्यों से तुलना की जाए तो केरल अब नियंत्रण की ओर जा रहा है, जहां रोज आ रहे मामलों की संख्या लगातार कम हो रही है. माना जा रहा है कि केरल के स्वास्थ्य मंत्रालय ने शुरुआत में ही सख्त कदम लेने शुरू कर दिए थे, जिनका परिणाम अब दिख रहा है. 2018-19 में आए निपाह वायरस के बाद यहां की सरकार सतर्क थी.

क्या कदम लिए गए
30 जनवरी को पहले मरीज की पुष्टि के बाद कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग शुरू हुई. इसके बाद केरल में लगातार जांचें होनी शुरू हुई. जो भी सर्दी-खांसी या बुखार जैसे लक्षणों के साथ पहुंचे, उसकी तुरंत जांच अनिवार्य कर दी गई. यहां तक कि अस्पतालों में संदिग्धों की तलाश में mock drills भी की गईं. जांच का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पूरे देश में 3 अप्रैल तक 66 हजार जांच हुई, इसमें से 10 हजार जांच अकेले केरल में हुई है.
पहले मरीज की पुष्टि के बाद कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग शुरू हुई




पेशेंट जीरो के बाद मुहिम
पहले मरीज की पुष्टि होने के बाद उसके संपर्क में आए सभी लोगों को खोजने के लिए यहां अस्पताल की ही टीम काम कर लगी. जैसे ही कोई संदिग्ध मिलता, उसे तुरंत आइसोलेशन वार्ड में रखकर निगरानी शुरू हो जाती, जबकि बाकियों को सेल्फ क्वारंटीन में रहने की हिदायत दी गई. एक लाख 70 हजार से अधिक लोगों को घरों में क्वारंटाइन करके रखा गया. संदिग्ध या विदेश से लौटे लोगों को 14 दिन की बजाए एतहियात के तौर पर 28 दिन क्वारंटीन में रखा गया क्योंकि कुछ मामलों में देखा गया है कि लक्षण 22 सामने आने में 22 दिनों का वक्त भी लेते हैं. गांवों के स्तर पर भी केरल में तैयारी हुई. यहां पंचायत के सदस्य और स्वास्थ्य कर्मी लगातार इसपर नजर रखते कि होम क्वारंटीन किए गए लोग 28 दिनों तक बाहर न निकलें.

रोजाना मीटिंग होती रही
कोरोना को स्टेट इमरजेंसी घोषित करने के बाद कई प्रोटोकॉल बनाए गए. इसके तहत एक कंट्रोल रूम बना, जिसमें 18 एक्सपर्ट्स की टीम कई बातों को मॉनिटर करने के लिए तैयार हुई. इसमें होम क्वारंटीन का पालन, कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग, आइसोलेशन, मेडिकल स्टाफ की ट्रेनिंग जैसी बातें शामिल थीं. ये टीम रोज दिन में 2 बार मिलती और समस्याएं सुनती-बताती. शाम की मीटिंग में हेल्थ मिनिस्टर भी शामिल होते और जिलों की अपडेट सुनते.

जो भी सर्दी-खांसी या बुखार जैसे लक्षणों के साथ पहुंचे, उसकी तुरंत जांच अनिवार्य कर दी गई


ऐसे रखी गई नजर
यहां 2 तरह के कॉल सेंटर बनाए गए. 1 सेंटर पर लोग कोरोना को लेकर अपने सवाल पूछ सकते हैं तो दूसरे कॉल सेंटर में वही लोग कॉल कर सकते हैं जो क्वारंटीन हैं. इसके तहत अकेले रहने के दौरान उनके मानसिक स्वास्थ्य पर नजर रखी जाती है. साथ ही साथ एक मीडिया मॉनिटरिंग टीम बनी, जो फेक न्यूज पर नजर रखती. ये सोशल मीडिया पर कोरोना या उसके इलाज को लेकर चल रही अफवाहों को देखती और उनपर सही चर्चा कराती. कई मामलों में फेक न्यूज फैलाने वालों को अरेस्ट भी किया गया.

हाथ धोने के लिए कैंपेन
राज्य सरकार ने छोटी-छोटी बातों को भी नजरअंदाज नहीं किया. जैसे कोरोना से बचाव से लिए हाथ धोने या सोशल डिस्टेंसिंग रखने की बात. सरकार ने हैंड वाश की आदत डलवाने के लिए ब्रेक द चेन मुहिम शुरू की. इसके तहत लोगों को दिन में कई बार साबुन से हाथ धोने को कहा जाता रहा ताकि कोरोना संक्रमित के संपर्क में आ भी जाएं तो संक्रमण की चेन न चल पड़े. कैंपेन के तहत सार्वजनिक जगहों पर वॉश बेसिन लगवाए गए.

कोरोना के नियंत्रण में सबसे बड़ा योगदान केरल के मजबूत हेल्थकेयर सिस्टम का माना जा रहा है


मजबूत है हेल्थकेयर सिस्टम
वैसे कोरोना के नियंत्रण में सबसे बड़ा योगदान केरल के मजबूत हेल्थकेयर सिस्टम का माना जा रहा है. यहां हर 3 गांवों के बीच कम से कम 2 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं. देश का औसत 7.3 किलोमीटर है, जबकि केरल में ये स्वास्थ्य केंद्र हर 3.95 पर हैं. यहां पर अनुभवी डॉक्टर होते हैं, जिन्हें दूसरे बड़े अस्पतालों की तरह ही तनख्वाह दी जाती है ताकि वे अगर निःशुल्क न कर सकें, तो 5 रुपए फीस लेकर इलाज कर सकें.

चिकित्सा और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर खर्च के लिए सभी राज्य अलग-अलग पूंजी तय करते हैं. इसके तहत केरल सरकार साल 2019-20 में अपने कुल व्यय में 5.14 प्रतिशत (लगभग 6,300 करोड़ रुपए) हेल्थ पर खर्च कर रही है. इसके बाद इसके बाद तमिलनाडु 4.15 प्रतिशत पर जबकि महाराष्ट्र 4.07 प्रतिशत पर है. वहीं यूपी में पब्लिक हेल्थ पर कुल खर्च में से 3.63 प्रतिशत सेहत पर जा रहे हैं. इसके अलावा कोरोना आउटब्रेक के बाद केरल सरकार ने Covid-19 के लिए अलग से 20,000 करोड़ के स्पेशल पैकेज की घोषणा की.

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